लोकसभा में हैं कुल 131 SC-ST रिजर्व सीट, जानें कैसे होता है सीटों का निर्धारण

कुछ ही दिनों में देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे लेकर चुनाव आयोग तैयारी कर रहा है और सूत्रों के हवाले से जैसी जानकारी मिल रही है उसके अनुसार आने वाले सप्ताह में चुनाव तिथियों की घोषणा हो जायेगी. लोकसभा में कुल 545 सीटें हैं, जिनमें से 543 सीटों पर चुनाव होते हैं और दो सदस्य एंग्लो इंडियन समुदाय से मनोनीत किये जाते हैं. कुल 543 सीटों में से 131 सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं. 2009 से पहले देश में अनुसूचित जाति के लिए 79 सीट रिजर्व थे जिसे बढ़ाकर 84 कर दिया और अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व सीट 41 सीट से बढ़ाकर 47 कर दिया गया. आजादी के वक्त समाज के पिछड़े तबके को राजनीति में भागीदारी देने के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था.

देश में लोकसभा सीटों का निर्धारण परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है और आजादी के बाद से अबतक देश में चार बार 1952, 1963 ,1973 और 2002 में इस आयोग ने लोकसभा क्षेत्रों और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया है. 2002 के परिसीमन के बाद यह तय किया गया है कि अब 2026 के बाद जो पहली जनगणना होगी, उसके बाद तक इस आयोग की सिफारिशें मानी जायेंगी. इस आयोग की सिफारिशों को राष्ट्रपति के आदेश से जारी किया जाता है जिसे कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है.

कैसे होता है एससी-एसटी सीटों का निर्धारण
तो यहां बात हो रही थी एससी और एसटी रिजर्व सीटों की. अभी देश में कुल 131 सीटें एससी और एसटी के लिए रिजर्व हैं. परिसीमन आयोग का यह अधिकार है कि वह यह निर्धारित करे कि कौन सा सीट एसएसी रिजर्व होगा और कौन सा एसटी. इसके लिए जो मापदंड तय किये गये हैं उसके मूल में जनसंख्या है. जनसंख्या के आधार पर यह तय किया जाता है कि कोई सीट रिजर्व होगा. जिस सीट पर एसएसी या एसटी लोगों की जनसंख्या ज्यादा होती है उस सीट को उनकी जनसंख्या के अनुसार रिजर्व घोषित कर दिया जाता है.

लोकसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आवंटन राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अनुपात के आधार पर किया गया है, जो कुल जनसंख्या से संबंधित है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 330 में इससे संबंधित पूरी जानकारी दी गयी है. जिसके अनुसार लोक सभा में अनुसूचित जातियों के लिए, असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अन्य अनुसूचित जनजातियों के लिए और असम के स्वशासी जिलों की अनुसूचित जनजातियों के लिए, स्थान आरक्षित रहेंगे.

साथ ही किसी राज्य [या संघ राज्यक्षेत्र] में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात, लोक सभा में उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को आबंटित स्थानों की कुल संख्या से यथासंभव वही होगा जो, यथास्थिति, से राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की अनुसूचित जातियों की अथवा उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्रट की या उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के भाग की अनुसूचित जनजातियों की, जिनके संबंध में स्थान इस प्रकार आरक्षित हैं, जनसंख्‍या का अनुपात उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र ट की कुल जनसंख्‍या से है.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.