महिला हिंसा एवं शोषण के विरुद्ध पटना में ग्रीन मार्च

पटना/07 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज दिनांक 07 मार्च, 2019 को गाँधी मूर्ति, गाँधी मैदान, पटना में सामाजिक संगठनों तथा शैक्षिक संस्थानों द्वारा उमड़ते सौ करोड़ अभियान के अंतर्गत महिला हिंसा व शोषण के विरुद्ध गाँधी मूर्ति, गाँधी मैदान से कारगिल चौक तक “ग्रीन मार्च” का आयोजन किया गया। जिसमे 500 से अधिक छात्र-छात्राएं, विद्यालयों एवं संगठनों के प्रतिनिधी, बुद्धिजीवी एवं सोशल एक्टिविस्टों ने भाग लिया. इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के से आये छात्र-छात्राओं ने संस्कृति कार्यक्रम के माध्यम से सन्देश दिया.

उमड़ते सौ करोड़ अभियान की राज्य समन्वयक रजनी ने कहा कि आज महिलाओं के समक्ष कई चुनौतियाँ एक साथ सामने खड़ी हैं. एक ओर जहाँ वे परिवार के अन्दर, कार्यस्थल पर और सड़क पर हिंसा का सामना कर रही हैं तो दूसरी ओर व्यावसायिक (प्रोफेशनल) जिम्मेदारियों में बेहतरी का दबाव भी बना हुआ है. यही नहीं सामाजिक ताने-बाने के अंदर परिवार को बनाये रखने कि जिम्मेदारी भी महिलाओं के कंधे पर है. और ट्रांस महिलाओं कि बात करें तो वे अभी भी परिवार में शामिल होने के लिए संघर्ष कर रही हैं.

रजनी ने कहा कि आने वाले समय में प्रकृति के साथ खिलवाड़ और प्राकृतिक संसाधनों के अन्यायपूर्ण दोहन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना भी इन महिलाओं को ही करना है क्योंकि किसी भी समस्या का प्रभाव सबसे ज्यादा उनपर होता है जो हाशिये पर होते हैं. ऐसे में पूरी दुनिया में पर्यावरण की चुनौतियों से भी महिलाओं को ही जूझना है. आज हम जिस स्तर पर भी पर्यावरण के सम्बन्धी समस्याओं का सामना कर रहे हैं उसका सामना करने के लिए आवश्यक है कि हम महिलाओं को बराबर का अधिकार और सुरक्षित परिवार एवं समाज दें. इसीलिए हम महिलाओं को न सिर्फ हिंसा और शोषण के विरुद्ध लड़ना है बल्कि पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी भी अपने कन्धों पर लेना है.

मौके पर देवप्रिया दता जो पर्यावरण के बचाव के लिए कार्यरत हैं ने कहा कि आज हम युवाओं और किशोरों को भी महिलाओं के प्रति होने वाले हिंसा और पर्यावरण के दोहन के प्रति जागरूक कर रहे हैं और हम चाहते हैं कि वे इस बात को समझे और इस लड़ाई को और मजबूत बनायें. सोशल एक्टिविस्ट रेशमा प्रसाद ने कहा कि हम अकेले-अकेले नहीं लड़ सकते इस लिए “उमड़ते सौ करोड़ अभियान” सभी को अपने साथ जोड़ने की कवायद कर रहा है ताकि हम सशक्त होकर अपनी लड़ाई लड़ सकें और आज पटना के कई विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं इसमें भाग ले रही हैं.

इस अवसर पर पटना यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट मेम्बर डॉ सागरिका चौधरी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा ग्लोबल स्तर पर चिंता का विषय है और बिना इसे समाप्त किये हम सभ्य समाज की कल्पना नहीं कर सकते. बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग पर शराबबंदी जैसा सराहनीय कदम उठाया और आज इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं. बिहार में घरेलु हिंसा के मामलों में कमी आई है और महिलाएं खुली हवा में सांस ले रही हैं. साथ ही पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए आरक्षण से गाँव का चेहरा बदल रहा है, सशक्त महिला नेतृत्व उभर कर आ रहा है, बच्चियां आज साइकिल चलाकर स्कूल जा रही हैं, ये सब समाज को एक सकारात्मक दिशा दे रहे हैं. बिहार के इसी मॉडल को देश भर में लागू करने की जरुरत है.

इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा अलग-अलग तरह की प्रस्तुति की गई और यह सन्देश दिया कि संतुलित विकास के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि महिलाओं की अनदेखी न हो, सामाजिक कुरीतियों/कुप्रथाओं पर भी तंज किया गया कि किस प्रकार कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज़ प्रथा, आदि के कारण लड़कियों-महिलाओं का शोषण किया जाता रहा है। एक तरफ उन्हें देवी का रूप दिया गया है, तो दूसरी तरह उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। आधुनिक समाज में भी अनेकों घर-परिवार में लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है, जबकि उन्होंने सभी क्षेत्रों में अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है, वे आज वैज्ञानिक, समाजसेवी, पत्रकार, लेखिका, शिक्षिका, डॉक्टर, कलाकार सभी प्रकार की भूमिकाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साथ ही, वह घर-समाज में माँ, बेटी, पत्नी, मित्र के रूप में भी बखूबी अपने किरदार को निभाती हैं।

जैसा कि विदित है कि ‘उमड़ते सौ करोड़’ अभियान एक विश्वस्तरीय अभियान का रूप ले चुका है, लड़कियों और महिलाओं के विरुद्ध हो रहे शोषण के विरुद्ध यह अभियान एकजुट होकर एक सशक्त आवाज बन गया है। इसके अंतर्गत महिला हिंसा के विरुद्ध ‘सुरक्षित परिवार, समाज और सड़क’ के साथ एकजुटता का आह्वान किया जाता है। इस आन्दोलन के द्वारा विभिन्न सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा किये जाने वाले प्रयासों को एकजुट कर सशक्त प्रयास करता रहा है, जिससे महिलाओं के घर, कार्यस्थल तथा सार्वजानिक स्थानों पर होने वाले हिंसा को न सिर्फ समाप्त किया जाये, बल्कि उनके लिए समान  भागीदारी भी सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर सामाजिक संगठनों से पद्मश्री सुधा वर्गीज, रजनी, शाहीना परवीन, देवप्रिया दत्ता, रेशमा, प्रियदर्शिनी ने भाग लिया, एवं शैक्षिक संस्थाओं में त्रिभुवन स्कूल से महुआ दासगुप्ता, रेडियंट इंटरनेशनल से मनीषा सिंह, एस.आर.विद्यापीठ से स्वप्ना मित्रा, इंदिरापुरम् पब्लिक स्कूल से दीपा शरण, पटना विमेंस बी.एड. कॉलेज से सिस्टर सरोज, तरुमित्रा से मार्गरेट मोल्मो, नारी गुंजन तथा रविन्द्र भवन के सदस्यों ने भाग लिया. सरगम महिला बंद ने भी इस मार्च में भाग लिया.


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