महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का विजन रंग ला रहा है: प्रोफ़ेसर रणबीर नंदन

प्रोफ़ेसर रणबीर नंदन* 

आपके शरीर का कोई अंग काम नहीं करता तो आप किसी काम के नहीं रह जाते हैं. यहां तो सवाल आधे अंग का है.  समाज का जब भी अंग विकास के मार्ग पर अग्रसर हो, निर्णय लेने में भागीदार बने तो विकास की रफ्तार क्या हो सकती है, इसे आसानी से देखा जा सकता है. बिहार में  मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने सत्ता संभालने के बाद से ही इस चीज को समझा. उन्होंने राज्य में सबसे पहले स्थानीय निकाय व नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की.  इसने पूरे देश को दिखाया कि किस प्रकार घरों से निकल कर महिलाएं निर्णय लेने की व्यवस्था की भागीदार बनती है. सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ी भागेदारी ने, चाहे वो क्षेत्र राजनीति का हो, या फिर अर्थव्यवस्था का, राज्य के  विकास दर को  दहाई के आंकड़े  के पार पहुंचाया है.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस मौके पर हमें लगता है कि महिलाओं को समाज में बराबरी का अधिकार हर हाल में मिलना चाहिए. आप जैसे ही महिलाओं को अपने घर के छोटे से छोटे निर्णय में साझीदार बनाते हैं, माहौल बदलने लगता है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने जिस प्रकार से सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 फीसदी के आरक्षण की व्यवस्था की है,  इससे महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और सरकारी तंत्र में अपनी सहभागिता प्रदर्शित करने का मौका मिल रहा है.

माननीय मुख्यमंत्री जी ने पिछले साल वयस्क होती बच्चियों को रोगमुक्त रखने के उद्देश्य से सभी जिलों में किशोरी योजना को आरंभ किया है. इसके तहत 1.30 लाख किशोरियों को पहले साल लाभ के लिए चिन्हित किया गया है. इसमें हर किशोरी को 600 कैलोरी ऊर्जा देने के लिए उचित पोषाहार की व्यवस्था की गई है.  इसी प्रकार मातृवंदन योजना के तहत गर्भवती माताओं की दवा व अन्य व्यवस्था के लिए छह हजार रुपए की सहायता राशि तीन किश्तों में उपलब्ध कराई जा रही है.

बिहार सरकार ने जेंडर बजटिंग के माध्यम से महिलाओं के लिए कई योजनाओं को लागू करने का प्रयास किया है.  राज्य स्तर पर महिलाओं से संबंधित योजनाओं पर जहां 2012-13 में 7835.6 करोड़ रुपए खर्च होते थे, वह 2017-18 में वह बढ़कर 20,615.4 करोड़ पर पहुंच गया है. मतलब पांच साल में तीन गुना बढ़ोत्तरी.

राज्य सरकार महिलाओं को स्वरोजगार के क्षेत्र में भी हाथ आजमाकर आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम कर रही है. अनुसूचित जाति की महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए हमारी सरकार ने महिला समृद्धि योजना की शुरुआत की है.  इसके तहत 10 हजार रुपए का अनुदान महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए दिया जा रहा है. इसके अलावा चार फीसदी की ब्याज दर पर 15 हजार रुपए का अतिरिक्त ऋण दिया जा रहा है.  सरकार के सात निश्चय में भी आरक्षित रोजगार महिलाओं का अधिकार को शामिल किया गया है.  माननीय मुख्यमंत्री जी ने महिलाओं की आवाज पर बिहार में शराबबंदी की घोषणा कर दी.  इसने बिहार में एक नई सामाजिक क्रांति की शुरुआत की है.

नीतीश कुमार उदाहरण हैं कि अगर राजनीतिक नेतृत्व संजीदा हो जाए और समाज की आधी आबादी के प्रति शासन की जिम्मेवारियों को पूरा करने में लग जाए, तो समाज मौन क्रांति का गवाह बनता है, और इसकी धमक आने वाले दशकों तक सुनाई पड़ती है.

*प्रोफ़ेसर रणबीर नंदन वरिष्ठ जदयू नेता और बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं.


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