महिला दिवस: याद आ रही हैं भागलपुर की दो महान विभूतियाँ डॉ कादम्बिनी गांगुली और रूकैया सखावत हुसैन

मुकुटधारी अग्रवाल* 

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भागलपुर की दो महिला व्यक्तित्व का नाम जेहन मे आना स्वाभाविक है उनमे एक हैं डॉ कादंम्बनी गांगुली और दूसरी हैं रुकैया सखावत हुसैन.


भागलपुर के ब्रहमसमाजी ब्रजकिशोर बसु की पुत्री कादंम्बनी गांगुली का जन्म यहीं 18 जुलाई 1861 को हुआ था. वे  उन्नीसवीं शताब्दी की पहली महिला थी जिनहे ब्रिटिश शासन काल मे पहली महिला स्नातक और पहली महिला चिकित्सक होने का गौरव प्राप्त था.  उनकी प्रारम्भिक शिक्षा भागलपुर मे वर्ष 1868 ई मे स्थापित बर्नाकुलर मिडिल गर्ल स्कूल मे हुआ था .1882 ई मे उन्होने मेट्रिक की और 1880ई मे एफ ए (वर्तमान मे इंटर ) और 1882 ई मे ग्रेजुएशन की परीक्षा पास की थी.  उस जमाने मे वे न केवल तत्काल बंगाल अपितु सम्पूर्ण ब्रिटिश भारत की पहली महिला ग्रेजुएट थी , उन्होने जब कलकत्ता मेडिकल कालेज मे दाखिला लेना चाहा तब उन्हे दाखिला नहीं मिला क्योंकि उस समय लड़कियो के लिए मेडिकल की पढ़ाई करना वर्जित था.  तब कादंबनी के गुरु द्वारकानाथ गांगुली जो बाद मे इनके पति भी हुये , ने वायसराय से लेकर गवर्नर तक कादम्बनी के मेडिकल कालेज मे दाखिला को लेकर आन्दोलन चलाया जिसके फलस्वरूप 1883 ई मे उन्हे कलकत्ता मेडिकल कालेज मे दाखिला मिला.  वर्ष 1883 ई मे उन्हे बीएससी यानी ग्रेजुएट आफ बंगाल मेडिकल कालेज की डिग्री मिली. तत्पश्चात वे मेडिकल की उच्च शिक्षा के लिए लंदन गई और वहाँ उन्होने एल 0एफ0पी0एस और एल0आर0सी 0पी की डिग्री हासिल की भारत लौटने के बाद उन्हे लेडी डेफरिन वूमेन हास्पिटल मे नौकरी मिली.  पाँच वर्ष तक नौकरी करने के बाद वे पुनःमेडिकल की उच्च शिक्षा लेने के लिए 1893 ई मे ईडनवर्ग गई.  डॉ कादंम्बनी गांगुली मे देश के प्रति प्रेम कूट कूट कर भरी हुई थी और उन्होने बंबई मे 1889 मे आयोजित इंडियन नेशन कॉंग्रेस के अधिवेशन मे भाग लिया और महिलाओ की स्थिति मे सुधार की वकालत की थी.  उन्हे बंगाल महिला संघ का सचिव बनाया गया और उहोने 1906ई मे कलकत्ता मे महिला सम्मेलन का आयोजन भी किया था.


रूकैया सखावत हुसैन का जन्म पूर्वी बंगाल (अब बंगला देश ) के रंगपुर मे हुआ था लेकिन उनकी शादी 1896 ई मे भागलपुर के एक बड़े सरकारी अधिकारी सखावत हुसैन से हुई थी. आज भी भागलपुर नगर निगम की एक सड़क का नाम सखावत हुसैन लेन है. रूकैया बड़ी शिक्षित महिला थी और उन्होने उर्दू ,बंगला और अङ्ग्रेज़ी की शिक्षा पाई थी.  वे लड़कियो की शिक्षा को लेकर अपने समय मे स्कूल की स्थापना की थी. उस समय मुस्लिम समाज मे लड्कियों की शिक्षा की कोई कल्पना नहीं करता था ,तब उन्होने सारे विरोध के बाद भी लड़कियो का स्कूल खोला था और उसके लिए 10 हज़ार रुपए का प्रावधान भी अपने पास से किया था.  उन्हे न केवल लड़कियो की शिक्षा की दिशा मे उल्लेखनीय कार्य किया बल्कि महिलाओ के अधिकार और उनकी समस्याओ पर भी खूब लिखा. 1905 ई मे उनकी अङ्ग्रेज़ी के लिखी पहली रचना ‘ सुलताना का सपना प्रकाशित हुआ था.  अपने पति के देहावसान होने के बाद वे कलकत्ता चली गई.
खेद तो इस बात का है कि आज न तो डॉ कादम्बनी गांगुली और न ही रूकैया सखावत हुसैन की कोई स्मृति भागलपुर मे बची हुई है.

*मुकुटधारी अग्रवाल भागलपुर के वरिष्ठ और गणमान्य नागरिकों में से हैं. वे पत्रकार रह चुके  हैं और सोशल मीडिया पर गहराई से तमाम विषयों पर लिखते हैं.


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