वाह ज़नाब वाह: महान पिता के महान बेटे तबला वादक जाकिर हुसैन

नवीन शर्मा

जिन दिनों अपने देश में सिर्फ दूरदर्शन ही एकमात्र टीवी चैनल हुआ करता था उस दौरान टीवी पर ताजमहल चायपत्ती का एक विज्ञापन आता था. इसमें घुंघराले बालों वाला एक खूबसूरत शख्स तबले की थाप के साथ अपने बालों को हिलाते हुए कहता था वाह ताज बोलिए. यह शख्स मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन थे. वे शायद भारत के सबसे पहले टीवी पर विज्ञापन में आने वाले पहले संगीतकार थे.

लीजेंड पिता के प्रतिभाशाली पुत्र

किसी भी क्षेत्र के महान व्यक्ति की संतानों को उनके अभिभावक से अनुवांशिक गुण तो हासिल होते हैं. प्रशिक्षण व उपयुक्त माहौल से उस क्षेत्र में आगे बढ़ने की सुविधाएं भी मिलती हैं. लेकिन उनके सामने अपने अभिभावक द्वारा खींची गई लकीर से बड़ी लाइन खींचने की चुनौती होती है. जाकिर के सामने भी ऐसी चुनौती थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया. जाकिर हुसैन का जन्म महान तबला वादक अल्लाह रखा के घर में हुआ था. जाकिर ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपनी पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की है.

जाकिर ने प्रारंभिक शिक्षा सेंट माइकल हाई स्कूल, माहिम से ग्रहण की और सेंट ज़ेवियर कॉलेज, मुंबई से वे ग्रेजुएट हुए. जाकिर हुसैन बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा पाने वाले बच्चे के रूप में उभरे थे. 3 साल की आयु से ही उनके पिता उन्हें पखावज पढ़ाने लगे थे. 11 साल की अल्पायु से ही वे यात्रा करने लगे थे. 1970 में वे अपना अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करने के उद्देश से यूनाइटेड स्टेट गये थे. ग्रैमी अवार्ड पानेवाले दुसरे  भारतीय ( पहले पंडित रविशंकर थे) जाकिर हुसैन  का पहला प्लेनेट ड्रम एल्बम 1991 में रिलीज़ किया गया था. जिसके लिए उन्हें 1992 में बेस्ट म्यूजिक एल्बम के लिए ग्रैमी अवार्ड भी मिला था. उस समय उनके क्षेत्र में यह पुरस्कार पाने वाले वह पहले भारतीय थे.बाद में उनकी प्रतिभा को देखते हुए ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट एल्बम एंड टूर ने मिक्की हार्ट, जाकिर हुसैन, सिकिरू अडेपोजू और गिओवान्नी हिडैल्गो को अपनी 15 वी एनिवर्सरी के मौके पर प्लेनेट ड्रम एल्बम के लिए खरीद लिया था. ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट एल्बम ने उस समय वैश्विक स्तर पर 2009 को 51 वे ग्रैमी अवार्ड्स सेरेमनी में ग्रैमी अवार्ड भी जीता था.

मलयालम फिल्म वनाप्रस्थं के लिए उन्होंने एक संगीतकार के रूप में भी काम किया था. 1999 के AFI Los Angeles International Film Festival में इस फिल्म को ग्रैंड जूरी पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया गया था. 2000 में उन्हें इस्तानबुल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार दिया गया, बाद में 2000 में ही मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2000 में ही नेशनल फिल्म अवार्ड्स भी उन्होंने जीते. कई फिल्मो के लिये उन्होंने गाने भी गाये तथा कई फिल्मो को उन्होंने संगीत भी दिया है. उनकी तबले की धुन का प्रयोग लिटिल बुद्धा सहित कई फिल्मो में भी किया गया है. उनके द्वारा किये गये सामूहिक और एकल प्रदर्शन में 1998 का, “जाकिर एंड हिज फ्रेंड” और दी स्पीकिंग हैण्ड: जाकिर हुसैन” भी शामिल है. जाकिर हुसैन बिल लास्वेल के “वर्ल्ड म्यूजिक सुपरग्रूप” के तबला विज्ञान के सदस्य भी हैं.

अन्टोनिया मिन्नेकोला के साथ विवाह

जाकिर का विवाह अन्टोनिया मिन्नेकोला के साथ हुआ, जो कत्थक नर्तकी एवं शिक्षिका थीं, साथ ही वह जाकिर की मेनेजर भी थीं. उन्हें दो बेटिया है, अनीसा कुरैशी और ल्सबेल्ला कुरैशी. जाकिर 2005-06 में प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी के म्यूजिक डिपार्टमेंट के प्रोफेसर भी रह चुके है और साथ ही वे स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके है. फिलहाल वे सेन फ्रांसिस्को में रह रहे है.

 

1988 में जब उन्हें पद्म श्री का पुरस्कार मिला था तब वह महज 37 साल के थे और इस उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले अपने समय के सबसे कम उम्र के व्यक्ति भी थे. जाकिर हुसैन ने अपनी तबला बजाने की कला से पुरी दुनिया को अपना दीवाना बना दिया था. उनके लाइव प्रदर्शन को देखने लोग दूर-दूर से आया करते थे और उनके संगीत की धुन में खो जाते थे. भारत की  शास्त्रीय संगीत की महान परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए देश को ऐसे महान कलाकार पर सदैव गर्व रहेगा.


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