दुनिया में 10%लोग लेफ्टी हैं. 87% लोग दाएं हाथ से काम करते हैं. मात्र 3% लोग दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हैं

Er S D Ojha

बायें हाथ से काम करने वालों को लेफ्टी कहते हैं .इस दुनियां में 10 प्रतिशत लोग लेफ्टी हैं . 87 प्रतिशत लोग दाएं हाथ से काम करते हैं . मात्र 3 प्रतिशत लोग दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हैं .गांधी जी इन्हीं 3 प्रतिशत लोगों में से एक थे . वे जब दायें हाथ से लिखते लिखते थक जाते थे तो बायें हाथ से लिखना शुरू कर देते थे . प्राख्यात कथाकार राजेंद्र यादव ने अपनी आत्मकथा “मुड़ मुड़ के देखता हूं” में किन्हीं मीता वशिष्ट का जिक्र किया है , जो दोनों हाथों से बखूबी लिख लेती थीं . सचिन तेंदुलकर दायें हाथ से बल्लेबाजी करते थे, पर लिखते बायें हाथ से थे . इस तरह दोनों हाथों से काम करने वालों को क्रास वायर्ड कहते हैं

न्यूयार्क के सेंट लारेंस विश्व विद्यालय के अध्ययन के मुताबिक दायें हाथ के मुकाबिल बायें हाथ वाले लोगों का आई क्यू लेबल 140 से अधिक होता है . बायें हाथ वाले बाक्सिंग , टेनिस जैसे खेलों में ज्यादा अच्छे होते हैं . यदि आप लेफ्टी हैं तो दायें तरफ देखने वाले चेहरे ज्यादा आसानी से बना सकते हैं . दायें हाथ वालों की तुलना में आप ज्यादा आसानी से स्ट्रोक से उबर सकते हैं . तेजी से बदलते आवाजों को आसानी से सुन सकते हैं . लेफ्टी गणित व संगीत में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. इंटरएक्टिव खेलों में 32% व गैर इंटरएक्टिव खेलों में 11% लेफ्टी लोगों की भागीदारी होती है .

अगर माता पिता दोनों लेफ्टी हों तो संतान के लेफ्टी होने की 26.1% सम्भावना होती है . यदि दोनों में से एक लेफ्टी हुआ तो संतान की लेफ्टी होने की सम्भावना 19.1 % होती है . यदि माता पिता दोनों राइटी ( दायें हाथ वाले ) हुए तो संतान के लेफ्टी होने की 9.5% चांसेस होते हैं . माता पिता बच्चों का लेफ्टी होना कत्तई पसंद नहीं करते . वे बच्चों को मार मार कर दायें हाथ वाला बनाना चाहते हैं . ऐसा कर वे प्रकृति के बरखिलाफ काम करते हैं . प्रकृति ने बच्चे को लेफ्टी बनाया है तो इसमें हम और आप क्या कर सकते हैं ? प्रताड़ना से कुछ नहीं होगा . बच्चा जैसा है वैसा हीं माता पिता को स्वीकार करना पड़ेगा अन्यथा बच्चे का प्राकृतिक विकास रुक जायेगा . मानसिक स्तर उस स्तर का नहीं होगा , जितना कि होना चाहिए .

कुछ लोग बायें हाथ को बहुत ज्यादा भाव नहीं देते .एक मुहावरा है – बायें हाथ का खेल . मतलब अत्यंत सरल कार्य . एक बच्चे ने परीक्षा में इस मुहावरे को वाक्य में इस प्रकार प्रयोग किया – “शेर का शिकार करना मेरे बायें हाथ का खेल है , पर अफसोस कि वही हाथ टूटा हुआ है .” वैसे दुनियां में बहुत से ऐसे लेफ्टी हुए हैं ,जिनकी तूती बोली जाती थी . सिकंदर महान ,नैपोलियन वोनापार्ट , जार्ज वुश सीनियर , जुलियस सीजर , चार्ली चैपलिन ,अल्बर्ट आइंसटीन, ग्रेटा गार्वो , विंस्टन चर्चिल, मर्लिन मुनरो , प्रिंस चार्ल्स , क्वीन विक्टोरिया , हरिवंशराय बच्चन आदि लेफ्टी के प्रमुख उदाहरण हैं.दिग्गज चित्रकार मिशलैंगलो की फ्रेस्को भी लेफ्टी थे .आज के दौर में ब्रायन लारा ,सौरभ गांगुली ,पेले ,विल क्लिंटन ,युवराज सिंह व अमिताभ बच्चन हैं. और भी कुछ नाम होंगे .

परीक्षा में लेफ्टी लोगों के लिए कोई इनबिल्ट कुर्सी नहीं रखी जाती , जिससे इन लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है .मेडिकल साइंस लेफ्टी होने को कोई बीमारी नहीं मानता . यह एक सामान्य प्रक्रिया है . लेफ्टी होने का निर्णय मां के गर्भ में हीं हो जाता है . कई बार प्रीमेच्योर डिलविरी होने पर भी बच्चे लेफ्टी बन जाते हैं. वैसे लेफ्टी के लिए एक विशेष जीन्स जिम्मेदार होता है , जो पीढ़ी दर पीढ़ी सफर करता रहता है . यदि आपका दाहिनी तरफ का दिमाग ज्यादा सक्रिय है तो आपके लेफ्टी होने की सम्भावना प्रबल होगी .

कुछ लोग इस मिथक से जुड़े होते हैं कि लेफ्टी डरपोक ,स्कीट्सफिनीया के मरीज व कम उम्र वाले होते हैं. पर इस तरह की कोई बात नहीं होती . लेफ्टी लोग उतने हीं सामान्य होते हैं , जितना कि राइटी लोग . हां , लेफ्टी लोग लीक से हटकर हैं , क्योंकि ज्यादातर लोग राइटी हैं . जावेद अख्तर ने शायद लेफ्टी लोगों के लिए हीं लिखा है –

जिधर जाते हैं सब , जाना अच्छा नहीं लगता .
मुझे पामाल रास्तों का सफर अच्छा नहीं लगता.


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