टिकट बंटवारे में भाजपा ने कई “दिग्गज” नेताओं को किया साइड लाइन

भाजपा को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी में बनाने में आरएसएस के संगठन को छोड़कर जिन दो नेताओं की अहम भूमिका रही है, उनमें लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी सर्वप्रमुख हैं. लेकिन मोदी युग की शुरुआत के साथ ही भाजपा के लौह पुरुष आडवाणी की छवि दबती गयी है और आज स्थिति इस मुकाम पर है कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए जारी प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम नहीं है. हालांकि आडवाणी की उम्र इतनी हो चुकी है कि उन्हें चुनाव लड़ने से खुद को परे कर लेना चाहिए था, जैसे कि सुषमा स्वराज ने स्वास्थ्य कारणों से किया, लेकिन आडवाणी जी ने ऐसा नहीं किया, जिसके कारण पार्टी ने उनका टिकट काट दिया.

अब यह चर्चा का विषय हो सकता है कि आडवाणी जी की पार्टी में साख कितनी कम हुई है, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा इस चुनाव में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और वह किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट नहीं देना चाह रही है जिसका रिपोर्टकार्ड चुनाव में जीत सुनिश्चित ना करता हो. अंदरखाने से खबर यह है कि इस बार वाजपेयी सरकार के वक्त की तिकड़ी में से दो आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का टिकट पार्टी काट रही है. आडवाणी के बारे में तो पता चल चुका है, जोशी को भी शायद कानपुर से टिकट नहीं मिलने जा रहा है.

बड़े नेताओं को किया साइडलाइन
इनके अतिरिक्त जिन और बड़े नामों को पार्टी इस बार के चुनाव में टिकट नहीं देने जा रही है उनमें शांता कुमार, कलराज मिश्र, कड़िया मुंडा, सुमित्रा महाजन जैसे नाम शामिल हैं. सूत्रों के हवाले से जैसी खबरें आ रही हैं उसके अनुसार पार्टी इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है, वह सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट देना चाह रही है जो अपनी जीत सुनिश्चित करने का माद्दा रखते हों. इसके लिए पार्टी ने उम्रदराज नेताओं को ‘साइडलाइन’ कर दिया है.

प्रदेश स्तर के नेताओं का भी टिकट काटा गया
भाजपा द्वारा अब तक प्रत्याशियों की जो सूची जारी की गयी है उसमें प्रदेश स्तर के कई नेताओं का नाम शामिल है. उत्तर प्रदेश के 12 सांसदों का टिकट काटा गया है. मध्यप्रदेश में भी कई सांसदों को टिकट नहीं दिया गया है. बिहार में तो जदयू के साथ गठबंधन को लेकर भी भाजपा के कई सांसदों के टिकट कटे हैं, जिनमें शाहनवाज हुसैन और पुतुल कुमारी सर्वप्रमुख हैं.

झारखंड में वयोवृद्ध नेता कड़िया मुंडा का टिकट काटा गया है, वहीं रांची सांसद रामटहल चौधरी का टिकट काटे जाने की भी संभावना है. रांची सांसद ने कहा कि उनका टिकट कटा तो अगल-बगल की सीटों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा. सारी एजेंसियों ने उनके नाम पर अच्छा फीडबैक दिया था. क्षेत्र के विधायकों, मंडल और जिला पदाधिकारियों तथा वरीय नेताओं ने हमारे नाम पर अपनी सहमति दी थी. भाजपा सांसद रामटहल चौधरी के रांची से लाेकसभा टिकट कटने की आशंका के बीच उनके समर्थकों ने प्रदेश भाजपा कार्यालय का घेराव किया. रविवार को करीब दो सौ की संख्या में आए समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के बाहर और भीतर घुस कर नारेबाजी की. वे नारे लगा रहे थे, “रामटहल को टिकट देना होगा…दादागिरी नहीं चलेगी …रामटहल नहीं तो कोई नहीं…भारत माता की जय…नरेंद्र मोदी जिंदाबाद…”


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