लालू यादव की करीबी झारखंड राजद प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा ने थामा भाजपा का दामन, पार्टी के अस्तित्व पर सवाल

रांची : आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर झारखंड में एक बड़ा बदलाव दिखा है, जिसने प्रदेश में एक तरह से राजद के अस्तित्व को शून्य पर ला खड़ा किया है. कारण है लालू यादव की बेहद करीबी मानी जाने वाली पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष अन्नापूर्णा देवी ने आज भाजपा की सदस्यता ले ली है. अंदरखाने की खबर यह है कि कोडरमा से वर्तमान सांसद रवींद्र राय का टिकट काटकर अन्नापूर्णा देवी को टिकट दिया जायेगा. वैसे भी अन्नपूर्णा बिना टिकट के आश्वासन के राजद छोड़ भाजपा में तो जायेंगी नहीं, इसलिए भाजपा सांसद रवींद्र राय के लिए बुरी खबर है. उनके साथ राजद के पूर्व विधायक जनार्दन पासवान ने भी भाजपा की सदस्यता ली. वहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह ने भी पार्टी से किनारा कर लिया है.

जानें अन्नपूर्णा देवी को
अन्नापूर्णा देवी ने 1998 में अपने पति रमेश प्रसाद यादव की मौत के बाद राजनीति में प्रवेश किया था और वे लालू प्रसाद यादव की काफी करीबी मानी जाती थीं. लगभग 50 साल की अन्नापूर्णा देवी कोडरमा से चुनाव लड़ना चाह रहीं थीं, लेकिन महागठबंधन के समझौते के कारण यह सीट बाबूलाल मरांडी की पार्टी के खाते में चला गया, ऐसे में अन्नपूर्णा के लिए वहां से चुनाव लड़ना संभव नहीं था, बस इसी वजह से अन्नपूर्णा ने भाजपा का दामन थाम लिया. पिछले एक सप्ताह से झारखंड के मीडिया हाउस इस बात के कयास लगा रहे थे कि अन्नापूर्णा देवी भाजपा में शामिल होंगी, जिसे अन्नपूर्णा ने खारिज भी किया था, लेकिन आज यह कयास सच साबित हुए. अन्नपूर्णा ने रांची महिला काॅलेज से पढ़ाई की है. अन्नपूर्णा देवी झारखंड में विधायक और मंत्री भी रह चुकी हैं. 1998 में उन्होंने विधानसभा का पहला उप चुनाव लड़ा था. इसके बाद वर्ष 2000 में विधानसभा का आम चुनाव 2005 व 2009 का विधानसभा चुनाव जीती थी. वही उसके उनके पति स्वर्गीय रमेश प्रसाद यादव वर्ष 1990 से लेकर 1998 तक कोडरमा के विधायक रहे थे.

राजद के लिए बड़ा झटका
अन्नपूर्णा देवी झारखंड में पार्टी अध्यक्ष थीं, उनका जाना निश्चिततौर पर पार्टी के लिए बड़ा झटका है. उनके पार्टी छोड़ने से कोडरमा में समाजवादी विचारधारा व सामाजिक न्याय के संघर्ष के एक युग का अंत होगा. हालांकि अन्नपूर्णा को राजद ने पार्टी से निष्कासित कर दिया और गौतम सागर राणा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, लेकिन राजद अन्नपूर्णा देवी के जाने के दुख से इतनी जल्दी उबर नहीं पायेगा और झारखंड में यह राजद की राजनीति के लिए बहुत ही बड़ा खतरा है. वैसे भी झारखंड में राजद की जमीन मजबूत नहीं है ऐसे में अन्नपूर्णा का यूं जाना लालू यादव के लिए बड़ा झटका है. इधर खबर है कि लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन में राजद को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है, जिससे पार्टी नाराज है. पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी चतरा सीट की डिमांड कर रही है, अगर यह सीट पार्टी को नहीं मिला तो राजद अकेले ही 14 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

अन्नपूर्णा से नाराज समर्थक
अन्नपूर्णा के भाजपा में शामिल होने से अन्नपूर्णा के कट्टर समर्थक नाराज है. ऐसे में अन्नपूर्णा के लिए अपने समर्थकों को मनाना भी गंभीर चुनौती है. कोडरमा में उनका बहुत प्रभाव है और राजद का संगठन मजबूत है अब उन्हें अन्नपूर्णा किस तरह अपने पाले में लाती हैं, यह देखने वाली बात होगी.


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