रामविलास के ‘चिराग’ लड़ रहे जमुई से चुनाव,भूदेव चौधरी से होगी सीधी टक्कर

बिहार के जमुई लोकसभा क्षेत्र पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि यहां से लोकजन शक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. चिराग पासवान वर्ष 2014 में पहली बार यहां से चुनकर आये थे और संसद पहुंचे थे. चिराग पासवान का मुकाबला उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के नेता भूदेव चौधरी से हो रहा है. भूदेव चौधरी पहले भी यहां से सांसद रह चुके हैं, उन्होंने 2009 में यहां से चुनाव जीता था. कुशवाहा की पार्टी को महागठबंधन में कुल पांच सीटें मिलनी है, जिसमें से मात्र एक जमुई के ही प्रत्याशी की घोषणा की गयी है.
परिसीमन के बाद एक बार फिर अस्तित्व में आया संसदीय क्षेत्र
जमुई लोकसभा क्षेत्र एक ऐसा संसदीय क्षेत्र है, जिसका अस्तित्व आजादी के बाद था और 1952 में यहां चुनाव हुआ भी. लेकिन 1957 में इस सीट का अस्तित्व नहीं था और इसे मुंगेर के साथ जोड़ दिया गया था. फिर 1962 से 1971 तक इस सीट का अस्तित्व रहा, लेकिन 1977 से यह सीट मुंगेर में शामिल कर दिया गया. 2002 में परिसीमन की रिपोर्ट में इस सीट को अलग करने की सिफारिश की गयी और 2009 में यहां चुनाव हुआ, जिसमें भूदेव चौधरी विजयी हुए थे, उस वक्त वे जदयू के साथ थे.
चिराग पासवाग और भूदेव चौधरी के बीच टक्कर
भूदेव चौधरी 60 साल के हैं और पूर्व सांसद हैं. उन्होंने 2017 में जदयू से किनारा कर लिया था और उपेंद्र कुशवाहा के साथ आ गये थे. अभी वे जमुई सुरक्षित सीट से अपना भाग्य आजमा रहे हैं और उनके मुकाबले में लोक जनशक्ति पार्टी के युवा नेता चिराग पासवान खड़े हैं. वे जमुई लोकसभा क्षेत्र से 2014 का चुनाव जीत चुके हैं. चिराग पासवान ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है, साथ ही वे बॉलीवुड में भी भाग्य आजमा चुके हैं. पिछले चुनाव में चिराग ने राजद के सुधांशु शेखर भास्कर को हराया था.
छह विधानसभा हैं शामिल
जमुई लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं, जो जमुई, मुंगेर और शेखपुरा जिले से मिलकर बने हैं. तारापुर, शेखपुरा, सिकंदरा, जमुई, झाझा और चकाई विधानसभा क्षेत्र जमुई लोकसभा में शामिल हैं. जमुई सुरक्षित सीट पर वोटरों की कुल संख्या 1,404,016 है. इसमें से महिला मतदाता 651,501 हैं जबकि 752,515 पुरुष मतदाता हैं.
जातीय समीकरण
जमुई एससी रिजर्व सीट है और बिहार का काफी पिछड़ा इलाका है. यहां नक्लसियों का भी प्रभाव है. बावजूद इसके चिराग पासवान यहां मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं क्योंकि पिछली बार जदयू उनसे अलग था, जबकि इस बार चिराग पासवान पूरे एनडीए के उम्मीदवार हैं.

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