“सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज” होगा विश्व स्वास्थ दिवस का थीम

रणविजय कुमार

दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य स्तर को सुधारने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष इसका आयोजन विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम “सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, हर जगह हर कोई” पर मनाया जाएगा.

क्या है “सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज: डब्ल्यूएचओ के अनुसार सभी व्यक्ति एवं समुदाय द्वारा बिना किसी आर्थिक बाधा के समुचित स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से प्राप्त करना ही “सार्वभौमिकस्वास्थ्यकवरेज’’ का बुनियादी उद्देश्य है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व की आधी जनसंख्या अभी भी मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं हासिल करने से वंचित रह जाती है. स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने के कारण वैश्विक स्तर पर लगभग 10 करोड़ जनसंख्या गरीबी की तरफ़ बढ़ने पर मजबूर हैं. साथ ही 80 करोड़ से अधिक की जनसंख्या( विश्व की लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या) अपने पूरे खर्च का 10 प्रतिशत खर्च अपने बेहतर स्वास्थ्य पर व्यय करते हैं. सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज केवल स्वास्थ्य पर ख़र्च करना नहीं है बल्कि बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त करने के क्रम में शामिल स्वास्थ्य कर्मी, स्वास्थ्य सुविधाएं एवं प्रसार, स्वास्थ्य तकनीकी, इनफार्मेशन सिस्टम, गुणवत्तापूर्ण सुविधा तंत्र के साथ गवर्नेंस एवं स्वास्थ्य सुनश्चित करने में सरकारी सहयोग के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करना है. विश्व स्वास्थ्य दिवस के माध्यम से इसमें गति लाने की कोशिश की जाएगी.

यह है प्रमुख सन्देश:

  • “सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज” संभव है बस सकारात्मक प्रयास की जरूरत है
  • स्वास्थ्य सभी का मौलिक अधिकार है. इसलिए सभी को यह जानकारी हो कि कौन से स्वास्थ्य सेवाएं उनके लिए है एवं ऐसी सुविधाएं कहाँ प्राप्त होगी
  • गुणवत्ता एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसानी से पहुँच ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की बुनियाद है
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदान करने की पहली इकाई है जहाँ टीकाकरण, परिवार नियोजन, सुरक्षित मातृत्व के साथ मूलभूत स्वास्थ्य समस्याओं से निदान प्राप्त होता है

बेहतर जीवन शैली है जरुरी:देखा जाए तो दुनिया भर में करोड़ों लोग गैर संचारी रोग जैसे मधुमेह, हाईपरटेंशन, हृदयरोग से ग्रसित है जबकि अधिकतर लोग पोलियो, नेत्रहीनता, कुष्ठ, टीबी, मलेरिया, एड्स जैसे भयानक रोगों के शिकार हैं.

डबल्यूएचओ के अनुसार दुनियाभर में गैर-संचारी रोगों से प्रत्येक वर्ष 41 मिलियन लोगों को मरते हैं, जो वैश्विक स्तर पर सभी मौतों के 71% के बराबर है। वहीं प्रत्येक वर्ष, “समय से पहले” 30 और 69 वर्ष की आयु के बीच एनसीडी से 15 मिलियन लोग मरते हैं; इनमें से अधिक मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं. वहीं भारत में 2016 में करीब 9.5 मिलियन मौतों में से 5.9 मिलियन मौतें गैर संचारी रोगों से हुयी है.

 

 


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