रांची में कठिन है डगर संजय सेठ की, रामटहल चौधरी बने हैं ‘वोटकटवा’, सुबोधकांत को मिलेगा फायदा

रांची : आखिरकार भाजपा ने रांची लोकसभा सीट से उम्मीदवार की घोषणा कर दी. रांची के प्रमुख व्यवसायी और झारखंड राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है. संजय सेठ श्री कृष्ण जन्मोत्सव समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं. संजय सेठ को प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा रांची शहर पिछले कुछ दिनों से हो तो रही थी लेकिन भाजपा यह जुगत भिड़ाने में जुटी थी कि कोई ऐसा उम्मीदवार ढूंढा जाये, जो राम टहल चौधरी की जगह बखूबी ले सके और चौधरी के बागी होने पर भी पार्टी अपनी जीत सुनिश्चित कर ले. अब सवाल यह है कि क्या संजय सेठ पार्टी को रांची सीट दिला पायेंगे?

गौरतलब है कि रांची लोकसभा सीट पर संजय सेठ का सीधा मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय से होना है. यह बताने की जरूरत नहीं है कि सुबोधकांत सहाय रांची सीट से तीन बार सांसद भी रहे हैं और केंद्रीय मंत्री भी. सुबोधकांत सहाय के साथ रांची का आदिवासी वोटर तो खड़ा है ही, मुस्लिम मतदाता भी सुबोधकांत को ही वोट करते हैं और एक तरह से ये उनके हार्डकोर मतदाता हैं. झारखंड में क्रिश्चयन और मुस्लिम हमेशा से कांग्रेस के साथ रहे हैं जिसका फायदा सुबोधकांत को मिलता रहा है.

परेशानी वाली बात यह है कि भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशी और पांच बार रांची से सांसद रहे राम टहल चौधरी का टिकट काट दिया है और रामटहल चौधरी कड़िया मुंडा तो हैं नहीं कि विरोध ना करें, तो चौधरी जी ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है और वे निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले हैं. राम टहल चौधरी 17 तारीख को अपना नामाकंन दाखिल करेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं है कि रामटहल का अपना एक वोट बैंक है, जो कहीं खिसकने वाला नहीं है. कुर्मी वोटर्स जो हमेशा से रामटहल चौधरी को वोट करते आये हैं अगर उन्होंने इस बार भी रामटहल चौधरी का साथ दिया, तो संजय सेठ के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है, क्योंकि सुबोधकांत के पास जो वोट बैंक है वो खिसकने वाला नहीं है.

हालांकि पिछले चुनाव में रांची लोकसभा सीट से सुदेश महतो और अमिताभ चौधरी भी खड़े थे, लेकिन इस बार सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है. चूंकि आजसू ने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया है, इसलिए आजसू का वोट भी भाजपा को ही मिलेगा यह संजय सेठ के लिए अच्छी खबर है, लेकिन रामटहल उनके लिए चुनौती हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में सुबोधकांत को दो लाख से ज्यादा मतों से हराया था.

संजय सेठ पहली बार रांची सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, व्यवसायी वर्ग तो खैर उनके साथ है और जानकार बता रहे हैं कि उन्होंने खादी बोर्ड के जरिये आदिवासियों को भी अपने पक्ष कर रखा है, लेकिन यह समर्थन वोट में कितना तब्दील होगा यह देखने वाली बात होगी.


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