धनबाद सीट भाजपा का गढ़, क्या कीर्ति आज़ाद कांग्रेस के ‘लकी चार्म’ बन पायेंगे?

रांची : कांग्रेस ने कल झारखंड के दो लोकसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की, जो चौंकाने वाले थे.   एक, धनबाद लोकसभा सीट से कीर्ति आज़ाद को खड़ा करने की घोषणा की गयी, वहीँ ST के लिए रिज़र्व सीट खूंटी से कांग्रेस ने कालीचरण मुंडा को उम्मीदवार के रूप में उतारने का फैसला किया है. खूंटी लोकसभा सीट से झारखण्ड में जन आंदोलन का सशक्त चेहरा दयामनी बारला भी रेस में थीं. झारखण्ड में जन आंदोलन के नेताओं ने भाजपा के खिलाफ गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया था. पिछले दिनों दयामनी बारला और सोनिया गाँधी के बीच मुलाक़ात भी हुई थी. ऐसे में एक उम्मीद बंधी थी कि शायद इस बार दयामनी बारला को कांग्रेस अपना उम्मीदवार बनाएगी. पर अब इस सम्भावना पर पानी फिर चुका है. कांग्रेस के इस फैसले से झारखण्ड के जन आंदोलन के नेताओं में निराशा फ़ैल गयी है. अब दयामनी बारला का अगला कदम क्या होगा इस पर फिलहाल राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र है. ज्ञात हो कि दयामनी बारला 2014 का लोक सभा चुनाव आम आदमी पार्टी के टिकट पर लड़ चुकी हैं.

अब बात  धनबाद से कांग्रेस प्रत्याशी कीर्ति आजाद की. कांग्रेस ने भाजपा के बागी प्रत्याशी कीर्ति आजाद को धनबाद लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. धनबाद लोकसभा सीट से तीन नाम अधिक चर्चा में थे, लेकिन चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे और राजेंद्र प्रसाद सिंह से अधिक पार्टी ने कीर्ति को तवज्जो दी. गौरतलब है कि कीर्ति आजाद भाजपा की टिकट पर तीन बार दरभंगा से सांसद रहे हैं, उन्होंने 2014 का चुनाव भी दरभंगा से ही लड़ा था. लेकिन पार्टी से निष्कासित किये जाने के बाद उन्होंने फरवरी में कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया. ध्यान देने वाली बात यह है कि महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर दरभंगा सीट राजद के खाते में चली गयी और वहां से अब्दुलबारी सिद्दीकी चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में यह बड़ा सवाल बन गया था कि आखिर कीर्ति आजाद कहां से चुनाव लड़ेंगे?

ज्ञात हो कि धनबाद सीट एक तरह से भाजपा का गढ़ है, पहले यहां एसपी रणधीर वर्मा की पत्नी लगातार चुनाव जीतती रहीं थीं वहीं पिछले दो चुनाव में यहां से भाजपा के पीएन सिंह चुनाव जीत रहे हैं. इस बार भी पीएन सिंह को ही भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में कीर्ति अाजाद अौर पीएन सिंह के बीच सीधा मुकाबला होगा. चूंकि कीर्ति विपक्ष के साझा उम्मीदवार हैं इसलिए वे पीएन सिंह को टक्कर दे सकते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन एक पक्ष यह भी है कि कीर्ति बाहर के कैंडिडेट हैं, हालांकि लोगों से कनेक्ट होने के लिए उन्होंने यह कह दिया है कि मैं झारखंड का मूल निवासी हूं क्योंकि उन्होंने पिता गोड्‌डा जिले के थे.उम्मीद करता हूं कि धनबाद की जनता मुझे निराश नहीं करेगी. दो-तीन दिन के अंदर धनबाद में आकर चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दूंगा.

उनके पिता भागवत झा आजाद झारखंड की गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं. यहीं इनका पैतृक आवास है.

धनबाद लोकसभा क्षेत्र में बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों की अच्छी खासी आबादी है जो चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. इस सीट पर सिंह मेंशन का प्रभाव भी दिखता है. साथ ही धनबाद में शहरी मतदाताओं का दबदबा भी साफ दिखता है. इस सीट पर करीब 62 फीसदी शहरी मतदाता और 38 फीसदी ग्रामीण मतदाता है. अनुसूचित जाति के वोटर्स 16 फीसदी और अनुसूचित जनजाति के अाठ फीसदी है. इस संसदीय क्षेत्र के तहत 6 विधानसभा सीटें (बोकारो, सिन्दरी, निरसा, धनबाद, झरिया, चन्दनकियारी) आती हैं. इसमें चंदनकियारी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने चार सीटें (बोकारो, सिन्दरी, धनबाद, झरिया), मार्क्सिस्‍ट कोऑर्डिनेशन ने एक सीट (निरसा) और झारखंड विकास मोर्चा ने एक सीट (चन्दनकियारी) पर जीत हासिल की. इस सीट पर वोटरों की संख्या 18.89 लाख है, जिनमें 10.32 लाख पुरुष वोटर और 8.57 लाख महिला वोटर शामिल हैं.

अगर धनबाद लोक सभा सीट के इतिहास पर गौर फरमाएं तो हम पाते हैं कि बंगाली उम्मीदवार भी यहां से जीतते आये हैं. पहले तीन चुनाव में कोंग्रेसी उम्मीदवार को जीत हासिल हुई. 1952 और 1957 में पी सी बोस, तो 1962 में पी आर चक्रवर्ती। 1967 में निर्दलीय उम्मीदवार रानी ललिता राज्य लक्ष्मी की जीत हुई. पर 1971 में कांग्रेस की वापसी हुई. और कांग्रेस के उम्मीदवार राम नारायण शर्मा जीते. अगले दो चुनाव में एमसीसी उम्मीदवार ए के रॉय ने जीत हासिल की, 1977 और 1980 में. 1984 में कांग्रेस के शंकर दयाल सिंह जीते. 1989 में ए के रॉय ने वापसी की. 1991 से लगातार चार बार भाजपा के टिकट पर शहीद पुलिस अफसर रणधीर वर्मा की पत्नी रीता वर्मा ने जीत हासिल की. 2004 में यह सीट पुनः कांग्रेस के खाते में गयी और चंद्र शेखर दुबे को जीत हासिल हुई. पिछले दो बार से लगातार धनबाद लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा के पशुपति नाथ सिंह कर रहे हैं.

अब इस बार इस सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार कीर्ति आज़ाद ताल ठोंक रहे हैं. जैसा कि हम देख रहे हैं कि धनबाद लोकसभा सीट पर कम्युनिस्टों का भी अच्छा ख़ासा प्रभाव रहा है. हालाँकि मंडल आंदोलन के शुरुआत के बाद से इस प्रभाव में कमी आयी है, पर इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया सकता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में एमसीसी के आनंद महतो तीसरे स्थान पर आये थे. जहाँ भाजपा के पी एन सिंह को 543,491 वोट मिले थे, वहीँ कांग्रेस के अजय कुमार दुबे को 250,537 वोट और तीसरे स्थान पर रहे एमसीसी के उम्मीदवार आनंद महतो को कुल 110,185 वोट. ऐसे में कीर्ति आज़ाद की राह कठिन मालुम पड़ रही है.


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