एक थी बैंडिट क्वीन सीमा परिहार…

Er S D Ojha

साल था 1983 . उस दिन मूसलाधार बारिश हो रही थी । 13 साल की सीमा परिहार अपने माता पिता और भाइयों के साथ छुपी हुई थी । घर टपक रहा था । तभी बाहर फायर की आवाज हुई । दरवाजा तोड़कर तीन चार डकैत घर के अंदर आ गये । घर में घुसते हीं उन्होंने सीमा परिहार को पकड़ा । माँ बाप और भाई डकैतों के सामने गिड़गिड़ाते रहे , पर उन्होंने सीमा परिहार को नहीं छोड़ा । उसी अंधेरी बरसाती रात में वे सीमा को 35 किलोमीटर दूर चम्बल की घाटी में दस्युराज लालाराम बागी के यहां ले गये । इस अपहरण का मास्टरमाइंड डकैत लालाराम ही था । बगैर शादी किए उसने सीमा परिहार को अपने साथ रख लिया । एक बेटा भी हुआ । वह बेटा आज बड़ा हो गया है ।  

सीमा परिहार के पिता जब पुलिस में रपट लिखवाने पहुँचे थे तो पुलिस ने रपट नहीं लिखी । उल्टे उसके पिता को हीं जेल में डाल दिया । घर की कुर्की भी कर दी गयी । जब इन बातों का पता सीमा को चला तो उसका खून खौल उठा । उसने चम्बल के जालौन जिले के शिव मंदिर में जाकर अपनी पहली ट्रेनिंग ली । उसने पहले दुनाली से फिर 315 बोर के रायफल से फायर किया । लालाराम बागी के मुठभेड़ में मरने से पहले उसने निर्भय गुर्जर से शादी कर ली । यह शादी लाला राम की मर्जी से हुई थी । निर्भय गुर्जर की बुरी आदतों से तंग आकर सीमा परिहार ने उसे दल से भगा दिया । खुद दल का मुखिया बन बैठी । बाद में निर्भय गुर्जर भी पुलिस के हाथों मारा गया ।

सीमा परिहार ने स्वतंत्र रुप से डाके डालने शुरू कर दिए थे । वह बिल्कुल निर्भय होकर पुलिस थाने से हथियार छीनने लगी । सीमा को पुलिस के हथियारों पर भरोसा होता था । वह देसी हथियार नहीं चलाती थी । देसी हथियार कब दगा दे दे कहा नहीं जा सकता । ये हथियार कभी कभी अपने लोगों पर हीं चल जाते थे। पुलिस का शिकंजा उस पर कसता जा रहा था । एक दिन मजबूर होकर उसने साल 2000 में सरेंडर कर दिया था । उस पर मुकदमा चला । जेल हुई । अंततोगत्वा 2004 में उसकी जेल से रिहाई हो गयी थी ।

सीमा परिहार की सरेंडर की शर्त थी कि सरेंडर के बदले उसके भाइयों को सरकारी नौकरी दी जाय । सरकार ने सरकारी नौकरी नहीं दी, बल्कि एक भाई को एनकांऊटर में मरवा दिया । सीमा परिहार उसकी लाश घर ले आई । एक बार फिर उसका खून खौला था । वह फिर से चम्बल के बीहड़ों में जाने के लिए सोचने लगी थी, पर अपने बेटे के कैरियर और मृत भाई के मासूम बच्चे को देखकर उसने इरादा बदल दिया । सीमा परिहार ने फिल्म “Wounded- The Bandit Queen” में काम किया था । हालाँकि फिल्म व्यवसायिक तौर पर सफल नहीं रही, पर इसने आलोचकों का ध्यान अपनी ओर खींचा.  वह बिग बाॅस के घर में भी रही थी । इनसे जो पैसे मिले उनसे सबसे पहले सीमा ने सारा कर्जा उतारा । कुछ बचे पैसों को भरण पोषण के लिए रखा । इस समय वह अपने भाई के साथ दीमक से भरे एक घर में रह रही है । ज्ञातव्य हो कि सरकार ने घर देने का भी वादा किया था ।

2008 अक्टूबर में सीमा परिहार ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर लिया. यूपी के ओरैया गाँव में जन्मी सीमा परिहार के दस्यु बनने की कहानी शोषण, अपमान और इस बदले की कहानी है. परिस्थितियों ने उसे हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया, पर फूलन देवी को अपना आदर्श मानने वाली सीमा एक जीवट वाली महिला थी. फिलहाल उस पर से कई केस हटा लिए गए हैं और बाकी केस में उसे जमानत मिल गयी है.


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