बढ़ती गरमी से 2030 तक श्रमिकों की उत्पादकता में आयेगी कमी, भारत में 5.8% का अनुमान

नयी दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण भारत में श्रमिकों की उत्पादकता में 5.5 प्रतिशत की कमी आ रही है, जबकि पूरी दुनिया में यह आंकड़ा 2.2 प्रतिशत का है. रिपोर्ट के अनुसार जिस तरह गर्मी बढ़ रही है, उससे 2030 तक 8 करोड़ नौकरियों में समान उत्पादकता का नुकसान होगा.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की ताजा रिपोर्ट में यह अनुमान किया गया है. संगठन ने यह अनुमान उस आधार पर लगाया है कि इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री की बढ़ोत्तरी हो जाएगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि तापमान में 1.5 डिग्री वृद्धि से 2030 में दुनिया भर में काम के घंटों में उत्पादकता के लिहाज से 2.2 फीसदी का नुकसान होगा, जो 2400 बिलियन यूएस डॉलर के आर्थिक नुकसान के बराबर है.

गरमी बढ़ने से शरीर के झेलने की क्षमता कम हो सकती है, ऐसी स्थिति में जब तापमान 35 डिग्री से अधिक हो जाता है और आद्रर्ता की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है. इंसान की उत्पादकता घटने लगती है.

गरमी का असर सभी देशों में एक जैसा नहीं होगा. सबसे अधिक प्रभाव दक्षिण एशिया और पश्चिमी अफ्रीका के देशों पर पड़ेगा, जहां गरमी अधिक पड़ती है. इन क्षेत्रों में क्रमश: 4.3 करोड़ और 90 लाख नौकरियों के समान काम के घंटों का नुकसान होने के आसार हैं. गरीब देशों पर गरमी और उत्पादकता घटने का असर ज्यादा होगा.गर्मी की अधिकता का सबसे अधिक गरीब देशों में होगा और उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना होगा. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के श्रमिकों की उत्पादकता में 5.8 प्रतिशत की कमी आयेगी, जहां के अधिकतर लोग कृषि और निर्माण कार्य में संलग्न हैं.

चीन में काम के घंटों में जो कमी आयेगी उसका प्रतिशत 0.78 प्रतिशत है. अमेरिका में यह प्रतिशत 0.21 और रूस में 0.01 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यस्थलों पर ऐसे इंतजाम किए जाने की जरूरत है, ताकि श्रमिक उच्च तापमान में भी काम कर सके.  कार्यस्थल पर पीने के पानी का पर्याप्त इंतजाम होना चाहिए साथ ही उनके लिए गरमी से  बचने के इंतजाम भी होने चाहिए.


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