वेस्ट इंडीज की तूफानी चौकड़ी के आगे घंटों पिच पर खड़े रहने वाले गावस्कर

नवीन शर्मा

टेस्ट क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाज़ों में शुमार सुनील गावस्कर 70 साल के हो गये हैं। एक समय भारतीय बल्लेबाज़ी की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले गावस्कर न सिर्फ भारत के, बल्कि विश्व क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाज़ों मे शुमार किए जाते हैं. टेस्ट क्रिकेट मे सबसे पहले 10,000 रन बनाने वाले गावस्कर जहां आज 70 साल की उम्र में भी अपने जुनून क्रिकेट से जुड़े हुए हैं वे अंग्रेजी भाषा में क्रिकेट के सबसे बेहतरीन कमेंट्री करते हैं। सन्नी क्रिकेट से संबंधित लेख भी लिखते हैं।

पैदा होते ही खो गए थे गावस्क‍र
सुनील गावस्कर, का जन्म 10 जुलाई, 1949 को हुआ था, वो जन्म के समय खो गए थे। गावस्कर ने अपनी आत्मकथा, (Sunny Days) में उन दिनों को याद करते हुए लिखा है, ‘मैं शायद कभी एक क्रिकेटर नहीं बन पाता और ये किताब तो कभी आप लोगों के सामने नहीं आ पाती. अगर मेरे एक रिश्तेदार, नारायण मसूरेकर, मेरे जन्म के दिन मेरी ज़िंदगी में न आए होते.’ सुनील ने आगे लिखा कि ऐसा लगता है कि नान-काका (जैसा कि मैं उन्हें बुलाया करता था), जो मुझे मेरे जन्म के दिन हॉस्पिटल में देखने आए थे, उन्होंने मेरे बाएं कान के पास एक छेद देखा था.’
उन्होंने आगे बताया कि कैसे उनके नान-काका ने उन्हें एक मछुवारी के बच्चे से एक्सचेंज होने से बचा लिया. ‘अगले दिन वो फिर से हॉस्पिटल आए और उन्होंने मेरी मां के पालने में रखे बच्चे को गोद में लिया। वो ये देखकर डर गए कि उस बच्चे के कान के पास वो छेद नही थे जो उन्होंने मेरे कान के पास देखा था। उसके बाद हॉस्पिटल के सारे पालनों में मुझे ढूंढा गया और आख़िरकार, मैं एक मछुवारी के पास सोता हुआ पाया गया।इस बात से बिलकुल बेखबर, कि मेरे कारण कितना हो हल्ला हो चुका था.’

बने पहले दस हज़ारी
गावस्कर के नाम वैसे तो कई रिकॉर्ड हैं. पर, उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही मानी जाती है कि वो विश्व क्रिकेट में पहले बल्लेबाज़ बने, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाए।अपने करियर के दौरान गावस्कर ने सबसे ज़्यादा टेस्ट रन और सबसे ज़्यादा टेस्ट सेंचुरी बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था।उन्होंने करीब दो दशक तक सबसे ज़्यादा टेस्ट सेंचुरी (34) का रिकॉर्ड अपने नाम रखा था।
जब तक सचिन तेंदुलकर ने उनका ये रिकॉर्ड 2005 में नही तोड़ा था।

वेस्ट इंडीज के फास्ट बोलिंग अटैक के सामने सबसे खतरनाक

गावस्कर के जमाने में वेस्ट इंडीज का तेज गेंदबाज़ी अटैक सबसे खतरनाक माना जाता था,लेकिन विश्व क्रिकेट में उस समय गावस्कर ऐसे बल्लेबाज़ थे, जो उस अटैक के सामने बेखौफ होकर खेलते थे। अधिकतर बल्लेबाज जहां तेज गेंदबाजों से बचने के हेलमेट पहनते थे वहीं गावस्कर टोपी पहन कर ही मैदान में उतरते थे। मार्शल, होल्डिंग और गार्नर जैसे इंडीज पेस अटैक के सामने गावस्कर का 65.45 का औसत था और ये ना सिर्फ उस समय, बल्कि आज के हिसाब से भी काफी ज़्यादा है।

 
टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहले 10,000 रन बनाने के अलावा, उनके नाम 2005 तक सबसे ज़्यादा टेस्ट सेंचुरी लगाने का रिकॉर्ड था. उनके नाम डेब्यू सीरीज में सबसे ज़्यादा रन (774) बनाने का रिकॉर्ड है। वेस्ट इंडीज के खिलाफ एक सीरीज में सबसे ज़्यादा रन (774) बनाने का रिकॉर्ड भी सनी के नाम है। इनके अलावा भी गावस्कर के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं।

 
गावस्कर को क्रिकेट में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कई सम्मानों से नवाज़ा गया।इसमें सबसे बड़ा सम्मान पदमश्री और पदम्भूषण हैं. इनके अलावा बॉर्डर-गावस्कर टूर्नामेंट को उनका नाम दिया गया है। उनके गृहनगर वेंगुर्ला में उनके नाम का स्टेडियम है। . 2012 में उन्हें बीसीसीआई की तरफ से कर्नल सी.के.नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाज़ा गया था।

क्रिकेट से सनी अब भी जुड़े हुए हैं. वो अक्सर कमेंटेटर और विश्लेषक के रूप में कई चैनलों में नज़र आते हैं. इसके अलावा वो अक्सर लेख लिखते रहते हैं और कई जगहों पर लेक्चरार के तौर पर भी जाते हैं. वे कई कमिटियों का हिस्सा‍ हैं और क्रिकेट से अब भी काफी करीब हैं।


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