काला तीतर मधुर स्वर में गाता है

Er S D Ojha

1976 में काला तीतर हरियाणा का राजकीय पक्षी चुना गया था । तब से आज तक 43 वर्ष का एक विचारणीय समय गुजर चुका है । काले तीतर की जन संख्या में 60% कमी आ गयी है । राजकीय पक्षी घोषित करने कामतलब था कि इस पक्षी का संरक्षण किया जाय , पर वन्य स्थलों की कमी और अवैध शिकार के चलते इस काले तीतर की प्रजाति संकट में पड़ गयी है । यह अनाज , घास के बीज , चींटियां और कीड़े मकोड़े खाता है ।

खेतों में आवश्यकता से ज्यादा कीटनाशकों का प्रयोग होता है । इन कीटनाशकों के कारण अनाज और बीज जहरीले हो जाते हैं । इनको खाने पर काले तीतर धीमी मौत मरने लगते हैं । अतः जब खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव करें तो किसी कृषि पंडित से जरुर सलाह ले लें । कृषि पंडित आपको कीटनाशकों की सही मात्रा बताएगा । आपका एक सीमित मात्रा से हीं काम हो जाएगा और काले तीतर समेत बहुत से पक्षियों की जीवन लीला सुरक्षित रहेगी ।

काले तीतर का शिकार भी उनकी संख्या को कम करता है । काला तीतर बड़े मधुर स्वर में गाता है । शिकारी काले तीतर को पिजरे में कैद कर जंगल में ले जाते हैं , जहां यह गाता है । इसके गायन को सुनकर मादा तीतर आकर्षित हो वहां आती है । शिकारी आसानी से मादा का शिकार कर लेते हैं । यह सरासर धोखा है । इस धोखे के कारण काले तीतर कम होते जा रहे हैं । सैय्याद खुश हो रहा है ।तीतर मर रहे हैं ।

एक प्रथा मुगल काल से चली आ रही है , जिसमें काले तीतरों को लड़ाया जाता है । जो जीता वही सिकंदर , लेकिन इस क्रम में एक तीतर मर जाता है । इस तरह से एक काले तीतर की कमी हो जाती है । आज भी कमोवेश यह परम्परा जारी है । तीतर लड़ते हैं और मरते हैं । एक एक कर काले तीतर मरते जाते हैं । इनकी जनसंख्या में बेशुमार कमी होती जाती है ।

काले तीतर का शिकार करने वाले को तीन साल की सजा और दस हजार के जुर्माने का प्राविधान है , पर बहुत कम लोगों की सजा होते देखा गया है । काले तीतर होटलों में पकते हैं । खाने वाले खाते हैं । हरियाली पसंद करने वाला यह पक्षी बेमौत मरता है । इसका शिकार करना इसलिए भी आसान है कि यह ज्यादा ऊंचा नहीं उड़ पाता है । एकांतवासी इस पक्षी का खात्मा हो रहा है । खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी तक इसके लिए कोई ब्रीडिंग सेण्टर भी नहीं बना है ।


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