My Brother…Nikhil (2005): HIV और गे रिलेशनशिप पर एक भावप्रवण फिल्म

Balendushekhar Mangalmurty

2005 में फिल्म डायरेक्टर ओनिर (Onir) ने एड्स और सेम सेक्स रिलेशनशिप के मुद्दे पर फोकस करते हुए एक भावप्रवण फिल्म बनायी थी, My Brother… Nikhil. फिल्म का समय 1987 से 1994 तक का है. इस समय एड्स पर आम लोगों में जागरूकता काफी कम थी और सेम सेक्स रिलेशनशिप में इनवॉल्वड लोगों को गलत नज़रों से देखा जाता था और उन्हें प्रताड़ित किया जाता था. 2018 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा Section 377  को हटाने के बाद से क़ानूनी तौर पर प्रतारणा रुकी है, हालाँकि समाज में अभी भी उन्हें isolation, victimization का सामना करना पड़ता है और एक लम्बी जंग अभी भी आगे बनी हुई है. फिल्म में भाई और बहन के बेहद स्ट्रांग बॉन्डिंग पर भी फोकस किया गया है. ओनिर खुद भी गे हैं और वे इसे पब्लिक फोरम पर पूरी डिग्निटी के साथ स्वीकार करते हैं. ये एक बड़ी वजह है कि फिल्म में सेम सेक्स रिलेशनशिप में इनवॉल्वड निखिल और नाइजेल के रिलेशनशिप को आम बॉलीवुड की फिल्मों की तरह कैरीकेचर और हास्य का विषय नहीं बनाया गया है, बल्कि इसे पूरी सेंसिटिविटी से, दो नार्मल लोगों के रिश्तों की तरह दिखाया गया है.

फिल्म एक रियल किरदार के जीवन पर आधारित है: Dominic D”Souza.

फिल्म गोआ में केंद्रित है. और फिल्म एक रियल किरदार के जीवन पर आधारित है: Dominic D”Souza. डोमिनिक वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फण्ड संस्था में काम करते थे और रेगुलर ब्लड डोनर थे. The Goa, Daman and Diu Public Health Act, 1985 के तहत ब्लड डोनेशन के लिए ब्लड टेस्टिंग अनिवार्य कर दिया गया. 1989 में ब्लड टेस्ट में डोमिनिक HIV पॉजिटिव पाए गए. गोवा का पहला केस. पब्लिक अवेयरनेस बेहद कम था, और अधिकारियों के पास भी इसके लिए कोई ठोस रणनीति नहीं थी. ऐसे में उन्हें पकड़ कर हॉस्पिटल के ट्यूबरक्लोसिस वार्ड में बंद कर दिया गया. यहाँ वे 64 दिन रहे, बिलकुल अकेले. इसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी और उन्हें पक्ष में फैसला आने के बाद उन्हें रिहा किया गया. उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा. इसके बाद अप्रैल 1992 में अपनी दोस्त Isabel de Santa Maria Vas के साथ मिलकर HIV/एड्स के शिकार लोगों के क़ानूनी, स्वास्थ्य सम्बन्धी हक़ की लड़ाई के लिए एक एनजीओ Positive People शुरू किया. इसके एक महीने के बाद मई 1992 में मुंबई के एक अस्पताल में उनकी मौत हो गयी.

फिल्म की कहानी:
निखिल ( Sanjay Suri) गोवा का चैंपियन स्वीमर है. उसके सामने सुनहरा भविष्य है. उसे गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया से स्पोर्ट्स के लिए स्कालरशिप मिली है. उसके पिता नवीन कपूर ( Victor Banerjee) उसके माध्यम से कई सपनों को पूरा करने की सोच रहे हैं, पिता की आँखों का दुलारा है, कई बार वो पिता की आकाँक्षाओं का बोझ महसूस करता है. उसका एक दोस्त है नाइजेल ( Purab Kohli), जो गोवा में ही इंस्टिट्यूट ऑफ़ oceanography में रिसर्चर है. उसके माँ बाप गोवा के ही रहने वाले थे, पर फिलहाल दुबई में सेटल्ड हैं. निखिल लड़कियों में काफी पॉपुलर है, पर दोस्ती से परे उसकी उनमे रूचि नहीं है. निखिल अपनी बहन अनामिका ( Juhi Chawla) से बेहद क्लोज है. दोनों की बॉन्डिंग बेहद स्ट्रांग है.
दरअसल पूरी फिल्म फ्लैशबैक में है. निखिल से जुड़े हर लोग उसे याद कर रहे हैं.
लीना गोम्स ( Dipannita Sharma) न्यूयॉर्क से आयी है. निखिल से प्यार करती है और निखिल के पिता दोनों की शादी के लिए उत्साहित हैं. पर निखिल को इंटरेस्ट नहीं है. लीना को कहता है, वो उससे प्यार नहीं करता, एक दोस्त के रूप में पसंद करता है. लीना अपसेट है. माँ बाप समझ नहीं पा रहे. लीना इतनी अच्छी लड़की है, और दोनों साथ में खूबसूरत कपल दीखते हैं. फिर बात क्या है? कहीं ड्रग्स, व्रग्स का तो चक्कर नहीं? निखिल एकदम से उबल पड़ता है: Dad, stop lecturing me all the time !
पिछले कुछ दिनों से निखिल के चेहरे पर चोट लगी है, जो ठीक नहीं हो रही है. एक दिन डॉक्टर उसे पूछते हैं, क्या तुम्हे कभी ब्लड लेने की जरुरत पड़ी? या unsafe सेक्सुअल प्रैक्टिस किया तुमने? या हाल फिलहाल फ़ूड पोइज़निंग हुई थी तुम्हे, उस समय इंट्रावेनस मेडिसिन ( intravenous medicine) दिया गया था?
रात का समय है. अनु गहरी नींद में सो रही है. निखिल उसके कमरे में जाता है. वो बेहद डरा हुआ है. उसके गोद में सिर रखकर fetal पोजीशन में लेट जाता है.
माँ बाप क्लब गए हैं. वही क्लब, जहाँ वे बरसों से जाते रहे हैं, के वेटर ने उन दोनों को जाने के लिए कह दिया है. निखिल स्वीमिंग पूल में प्रैक्टिस के लिए उतरता है, सारे स्वीमर्स पूल से बाहर निकल जाते हैं.
निखिल को HIV है. पिता को पता चलता है तो वे निखिल को बेतरतीब तरीके से मारना शुरू करते हैं, ” बेशर्म तेरी वजह से हम सिर उठाकर नहीं चल सकते.”

“उसके चेहरे से खून बह रहा था फिर भी मैंने उसे घर से निकाल दिया” पिता याद कर रहे हैं. मां अनीता रोसारियो कपूर ( Lilette Dubey) ने भी उसे नहीं रोका था. पर अनु ने पेरेंट्स की इस हरकत का पुरजोर विरोध किया था, डैड उसे फैमिली के सपोर्ट की जरुरत है.
निखिल अपने दोस्त नाइजल के यहाँ शिफ्ट हो जाता है.

गोवा एक छोटी सी जगह है और निखिल उस छोटी सी जगह के लिए बेहद पॉपुलर. जल्द ही पुरे गोवा में उसके HIV पॉजिटिव होने की बात फ़ैल जाती है. अभी HIV/एड्स को लेकर बेहद कम जागरूकता है. निखिल का आइसोलेशन और stigmatization शुरू हो जाता है. इस बुरे वक़्त में उसके साथ सिर्फ नाइजेल और अनु हैं. अनु के साथ बेहद मज़बूती से उसका बॉयफ्रेंड सैम खड़ा है. सैम पर भी अपने माँ बाप का प्रेशर है पर सैम अनु से कहता है, समय के साथ मेरे पेरेंट्स समझ जाएंगे. नाइजेल याद कर रहा है, सवाल ये नहीं है कि निखिल को HIV इन्फेक्शन कैसे हुआ? सवाल ये है कि टेस्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद उसके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया?

पुलिस निखिल को पकड़ कर ले जाती है. क्वारंटाइन के लिए ले जाते वक़्त उसका मजाक उड़ाती है पुलिस: ” किसके साथ मस्ती की? लड़का था या लड़की? क्या ज़माना आ गया? देखने में तो healthy लगता है. एकदम नार्मल।

निखिल को सरकारी अस्पताल के एक गंदे से वार्ड में रखा गया है, सबसे अलग.
नाइजेल को अनु कहती है: निखिल HIV पॉजिटिव है. नाइजेल मेरा ख्याल है, तुम भी बम्बई जाकर अपना चेक अप करवा लो.
अनु याद कर रही है. सबसे बड़ा डर जो मुझे लग रहा था, वो था, Fear of losing the person I was closest to- My Little Brother.
जब मैं उसकी डायरी पढ़ती हूँ, I can feel the humiliation he went through and I feel very angry.

अनु, सैम (Gautam Kapoor) और नाइजेल निखिल से मिलने अस्पताल जाते हैं.
वहां अनु को एहसास होता है कि कपल को प्राइवेट मोमेंट्स की जरुरत है. I think you two need to talk. अनु और सैम कमरे से बाहर आ जाते हैं. फिल्म में कहीं भी निखिल और नाइजेल के बीच explicit सेक्सुअल सीन्स नहीं हैं, बल्कि डायलॉग्स, टेंडर मोमेंट्स के साथ उनके स्पेशल बॉन्डिंग को दिखाया गया है और दो सेम सेक्स कपल को नार्मल इंसान के रूप में दिखाना इस फिल्म का प्लस पॉइंट है.

नाइजेल याद कर रहा है: उसके आस पास के सभी लोगों को टेस्ट करवाना शहर हिस्टेरिकल हो रहा था. वे सोच रहे थे होमोसेक्सुअल डिजीज है ये. मेरे सारे टेस्ट्स क्लियर आये.
पिता का अपना पर्सपेक्टिव है. पिता ने नाइजेल को कभी पसंद नहीं किया: ” अब जब वो जिन्दा नहीं रहा, तो उस पर होमोसेक्सुअल होने का धब्बा क्यों? कितनी सारी girlfriends थीं उसकी, He was a perfectly normal boy.

लीना गोवा छोड़कर चली गयी. “गोवा में सब लोग मुझे घूर घूर कर देखते थे. You know, I was terrified till blood test report. You know I had kissed him. माता पिता भी गोवा छोड़कर बम्बई चले गए. अनु: “लोग हमें अवॉयड करने लगे. We became the tainted family !”

नाइजेल याद कर रहा है: गोवा के पब्लिक हेल्थ एक्ट के अनुसार, HIV पॉजिटिव व्यक्ति को सबसे अलग रखा जा सकता था, जैसे कि वो कोई क्रिमिनल हो !
निखिल के केस लड़ने के लिए एक लॉयर की तलाश की जाती है. लॉयर अंजलि अनु और नाइजेल को समझाती है, इस केस में बहुत पब्लिसिटी होगा, वांटेड और अनवांटेड दोनों। दोनों इसके लिए तैयार हैं.
वकील कहती है,हमें पब्लिक सिम्पथी भी चाहिए. यहाँ की मीडिया उसे pervert की तरह ट्रीट कर रही है इसलिए ये समझाना जरुरी है कि ये बीमारी किसी को भी हो सकती है.

फिल्म में निखिल और नाइजेल के आपसी संबंधों को भी याद किया जाता है, जिसमे प्रेम है, एक दूसरे का केयर है, ईर्ष्या भी है, जलन है, possessiveness है. नाइजेल याद कर रहा है, 1987 का गोवा था. मैं उसे अक्सर जेफ़्रीज़ में देखा करता था. पता नहीं क्यों मुझे लगता था वो लड़कियों के बीच है, पर उनके साथ नहीं है. फिर दोनों रिलेशनशिप में आ गए. हम दोनों के बीच कभी कभी टेंशन हुआ करता था especially लीना को लेकर. डर था कहीं वो सोशल प्रेशर में आकर…
नाइजेल को ब्रदर सिस्टर के बीच स्ट्रांग बॉन्डिंग से भी जेलस फील होता था. पर अनु को लगता है, कभी कभी लगता था, “कुछ बातें सिर्फ उन दोनों के बीच थी. उनमें मै भी शामिल नहीं थी.”

पब्लिक सिम्पथी के लिए प्रयास शुरू हुआ. वो एक चैंपियन स्वीमर है, कोई क्रिमिनल नहीं. कुछ अच्छे लोगों का सपोर्ट भी मिला, जैसे उसके स्कूल के प्रिंसिपल का. वहीँ hostile एलिमेंट्स भी थे, जिन्होंने नाइजेल और अनु दोनों को परेशान किया. निखिल डिप्रेस्ड है, मॉम, डैड एक बार भी मिलने नहीं आये.
फाइनली तीन महीने के बाद निखिल उस कारागार से बाहर निकल आता है, पर सिर्फ कारागार से, परेशानियों से नहीं. उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है.
बॉस कहते हैं, ” तुम्हारे साथ कोई काम नहीं करना चाहता है. सब डरते हैं तुमसे.”
निखिल जबाब देता है, ” सर, डरना तो मुझे चाहिए आपसे. आप या ऑफिस के किसी भी स्टाफ से मुझे कोई भी इन्फेक्शन हो सकता है, जिसकी वजह से मेरी जान जा सकती है.”

निखिल नाइजेल के घर में शिफ्ट हो गया है. अनु और सैम की शादी में अपने माँ बाप से भेंट होती है. माँ तो उसके पास आती भी है, पर पिता उसकी तरफ देखते भी नहीं हैं.
समय बीत रहा है. मिड 1992 में निखिल की हालत बिगड़ने लगी. अनु भी अपने पेरेंट्स के घर नहीं जा रही है. इस बीच निखिल मामा भी बन गया है. समय गुजर रहा है. एक दिन उससे मिलने पिता आते हैं.
निखिल : पिछले दो सालों से आपका इन्तजार कर रहा था.
निखिल भावुक हो रहा है. ” डैड, बचपन की तरह कह दीजिये, बुरा सपना है, बीत जाएगा.
पापा भी अपने अंदर एक खालीपन महसूस कर रहे हैं. “चलो घर चलते हैं. एक साथ न्यू ईयर मनाएंगे.”

निखिल इसके बाद ज्यादा दिन नहीं बच पाता।

फिल्म HIV, गे रिलेशनशिप और ब्रदर सिस्टर रिलेशनशिप को संजीदगी से समेटने में सफल हो पाती है:

फिल्म में तीन थीम हैं- HIV इन्फेक्शन के पश्चात् stigmatization, गे रिलेशनशिप और भाई बहन के बीच स्ट्रांग बॉन्डिंग. कई थीमों को समेटने में कई फ़िल्में बिखर जाती हैं, पर My Brother… Nikhil (2005) इस ट्रैप में फंसने से बच पायी है. ओनिर की ये सबसे जानी मानी फिल्म है. आगे भी कई फिल्मों में संजय सूरी ने ओनिर के साथ कोलैबोरेशन किया जिसमे I Am (2010) को कई अवार्ड्स भी मिले. संजय सूरी के बेस्ट परफॉर्मन्सेस में एक है. जूही चावला ने भी अपनी छवि से हटकर फिल्म की है और इस रोल में प्यारी लगी हैं. कुल मिलाकर फिल्म अपने चुने हुए थीम पर सन्देश देने में सफल होती है. फिल्म देखी जानी चाहिए.


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