कमला की मौत (1989): बासु चटर्जी की फिल्म

Balendushekhar Mangalmurty

1989 में निर्देशक बासु चटर्जी ने नेशनल फिल्म्स डेवलपमेंट कॉर्पोरशन (NFDC) के आर्थिक सहयोग से फिल्म बनायी थी, “कमला की मौत”. फिल्म की शूटिंग गिरगांव के गोपाल भवन में हुई थी.

फिल्म की कहानी:

बम्बई के चॉल में रहने वाली लोअर मिडिल क्लास फॅमिली की लड़की कमला (Kavita Thakur) आत्महत्या कर लेती है. पुरे चॉल में चर्चा शुरू हो जाती है. कमला का भाष्कर नामक युवक के साथ प्रेम सम्बन्ध था. भाष्कर ने उससे शादी करने से इंकार कर दिया. भाष्कर के बच्चे की माँ बनने वाली थी कमला. शर्म और स्ट्रेस में कमला कुछ बेहतर न सोच सकी और उसने बिल्डिंग से कूद कर जान दे दी. कमला की मौत चर्चा का विषय बन गयी है. लोग कमला की मौत पर रस भरी टिप्पणी कर रहे हैं, और साथ में वो अपनी ज़िन्दगी के पन्ने उलटने पलटने लगे हैं.
चॉल में सुधाकर जी ( Pankaj Kapoor) का परिवार भी है. कमला ने आत्महत्या का रास्ता क्यों चुना? उसने आत्महत्या के लिए और कोई तरीका क्यों नहीं अपनाया? तमाम सवाल चर्चा के घेरे में हैं.

सुधाकर जी की छोटी बेटी चारु (Mrinal Deo) अपने कॉलेज के सहपाठी दीपक (Ashutosh Gowariker) से प्रेम करती है. बड़ी बेटी गीता ( Roopa Ganguly) दो सालों से अजीत ( Irfan Khan)के साथ सम्बन्ध में है. पर माँ को इनके प्रेम सम्बन्ध के बारे में कुछ पता नहीं है. दोनों रात में कमरे में लेटी हुई हैं. और बातें कर रही हैं. चारु को गीता प्रेम में ज्यादा आगे बढ़ने से सचेत करती है, ” मेलजोल बढ़ाया और ख़तरा !”
चारु गीता के अवचेतन मन में पैठे डर को कुरेद देती है, “दीदी, मान लो. अजीत से तुम प्रेग्नेंट हो जाओ और अजीत छोड़ कर चला जाए तो तुम क्या करोगी? कमला की तरह ख़ुदकुशी? गीता परेशां है. उसे नींद नहीं आ रही है. वो अपना भय अपनी छोटी बहन से शेयर कर रही है.

उधर सुधाकर जी की पत्नी निर्मला (Ashalata) भी अपने अतीत के गलियारे से गुजरने लगी है. “कमला की तरह एक दिन मैंने भी आत्महत्या की थी, लेकिन कमला के विपरीत मैं बच गयी. निर्मला अपने किशोर वय में अपने ट्यूशन टीचर से प्रेम कर बैठी थी. पढ़ने के बजाय वो मास्टर जी को प्रेम पत्र लिखने लगी और उनसे शादी के सपने सजोने लगी. पर शादी शुदा मास्टर जी ने भोली भाली निर्मला की भावनाओं का फायदा नहीं उठाया और उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगाने की सलाह दी. जब बात हद से आगे बढ़ने लगी तो मास्टरजी (Devendra Khandelwal)ने उसे कड़ी डांट लगाई. प्रेम में तिरस्कार पाकर निर्मला ने नदी में कूद कर जान देने की कोशिश की, पर मास्टरजी ने उसे बचा लिया. निर्मला की माँ से सारी बात बताकर उन्होंने यथाशीघ्र निर्मला की शादी तय कर देने की सलाह दी. परिवार की लाज बचाने के लिए आनन फानन में निर्मला की शादी कर दी जाती है. उस बात को अब 23 साल गुजर चुके हैं. निर्मला को इस बात का सुकून है कि दोनों बेटियों पर उसके अतीत का साया नहीं पड़ा और दोनों बेटियां अपने पिता पर गयी हैं.

पर सुधाकर जी का भी अतीत है. अपने बेड पर लेटे लेटे अपने अतीत के गलियारों में पहुँच गए हैं जब सुधाकर युवा हुआ करते थे. सुधाकर अंजू ( Supriya Pathak) से प्रेम करते हैं और अंजू प्रेग्नेंट हो जाती है. सुधाकर से अंजू विवाह कर लेने को कहती है पर सुधाकर आर्थिक तंगी का हवाला देकर उसे गर्भपात के लिए राजी कर लेते हैं. डॉक्टर के पास फर्जी नाम बताते डॉक्टर 200 रूपये फीस मांगता है. पर सुधाकर के पास सिर्फ 100 रूपये हैं. ऐसे में वे अंजू की सोने की चूड़ी बेच डालते हैं. ऑपरेशन के बाद अंजू बहुत तकलीफ में है. टैक्सी करके अंजू और सुधाकर जा रहे हैं. अंजू कह रही है: “सुधाकर तुम घर चलो न. मेरी माँ से कह दो तुम मुझसे शादी करना चाहते हो.” सुधाकर उससे कुछ दिनों में आने की बात कहके फिलहाल बात टालते हैं. अंजू एक समझदार युवती है. वो सुधाकर को समझाती है, ” हमें अपने संबंधों को कोई रूप देना होगा और हम कोई गलत काम तो कर नहीं रहे. इस बार मिलने नहीं आये तो मैं जहर खा लुंगी.” पर सुधाकर वहां से फरार हो जाते हैं, मंजू को तमाम परेशानियां अकेले झेलने के लिए छोड़कर.

वहां से भागकर सुधाकर एक जगह सुपरवाइजर की नौकरी में लग जाते हैं. वहां काम करने लोगों में एक सुन्दर युवती है, चमेली (Jaya Mathur). चमेली से उनके शारीरिक सम्बन्ध बन जाते हैं. चमेली का एक मंगेतर है, मंगरु. पर चमेली को मंगरु में कोई दिलचस्पी नहीं. वो सुधाकर से विवाह करना चाहती है. एक दिन चमेली के पिता और मंगरु अपने लोगों के साथ दोनों को रंगे हाथ धर लेते हैं. चमेली के पिता जबरदस्ती सुधाकर से कबूल करवाते हैं कि वे चमेली से शादी करेंगे. ये सुनकर मंगरु भड़क जाता है. उसे बड़ी मुश्किल से लोग कण्ट्रोल करते हैं. मंगरु के उग्र व्यवहार को देखकर सुधाकर सकते में आ जाते हैं. और रातों रात वहां से फरार हो लेते हैं.

वहां से फरार होकर फिर एक नयी नौकरी में सुधाकर जाते हैं. वहां इनकी दोस्ती अपने सहकर्मी प्रकाश (Akhil Mishra) से होती है. प्रकाश अक्सरहां काम के सिलसिले में बिजनस टूर पर जाता रहता है. प्रकाश के व्यस्त शिड्यूल से उसकी पत्नी रश्मि (Dimple Arora) उपेक्षित महसूस करती है. प्रकाश की अक्सरहां की गैरहाज़िरी में रश्मि और सुधाकर एक दूसरे के करीब आ जाते हैं और उनके बीच शारीरिक सम्बन्ध बन जाते हैं. एक रात जब सुधाकर और रश्मि साथ में बेड में होते हैं, तभी प्रकाश चला आता है. प्रकाश ने दोनों को रंगे हाथो पकड़ लिया है. एक बार फिर सुधाकर वहां से भागते हैं.

नयी जगह पर सुधाकर फिर से काम में लग गए हैं. यहाँ पर उनके पास पंडितजी एक रिश्ता लेकर आते हैं. कुछ तो दोस्तों के कहने पर और कुछ अपनी भी इच्छा से सुधाकर इस रिश्ते के लिए हाँ कर देते हैं. उनकी शादी निर्मला से हो जाती है.

शादी के करीब दस साल बाद अचानक एक दिन वे मंदिर की सीढ़ियों पर अंजू से टकरा जाते हैं. अंजू के साथ उसका पति, बेटी और सास हैं. सुधाकर के साथ भी उनकी पत्नी और दोनों बेटियां हैं. अंजू अपनी शादी से खुश दिख रही है और और वो सुधाकर से बिना किसी क्षोभ या शिकायत से मिलती है.

सुधाकर फिर से वर्तमान में लौट आते हैं. वे खुश हैं और मनाते हैं कि उनकी बेटियों पर उनके कायर और चरित्रहीन व्यक्तित्व की छाया भी न पड़े और दोनों बेटियां अपनी माँ पर जाएँ. सुधाकर सोचते हैं, अगर कमला ने आत्महत्या नहीं की होती, तो शायद वो एक सुखमय जीवन पा सकती थी, अंजू की तरह. उसका अपना घर होता, दो तीन बच्चों की माँ होती और फिर एक दिन अपना सुहाग लिए संसार से चली जाती. फिर सुधाकर, उनकी पत्नी निर्मला और दोनों बेटियां चैन की नींद सो जाते हैं. कमला की मौत सुधाकर परिवार के लिए एक चटपटी खबर बन कर रह जाती है. कमला को नैतिकता के चश्मे से देखने वाला सुधाकर परिवार और साथ में चॉल के निम्न मध्यम वर्गीय परिवार अपने गिरेबान में झाँकने को तैयार नहीं. और अपने भय को अपने अवचेतन मन में समेट कर रखे हुए है.  निर्मला सोचती है, ” कई बातें जिंदगी भर छुपा कर रखनी पड़ती हैं. शायद इसी में सबकी भलाई है.”
बासु चटर्जी की फिल्म को बेस्ट स्क्रीनप्ले के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला. फिल्म बेहद छोटे बजट में बनायी गयी है. फिल्म में पंकज कपूर का अभिनय सर्वश्रेष्ठ है और साथ ही सलिल चौधरी ( Salil Chowdhary) का बैकग्राउंड म्यूजिक अपनी ओर ध्यान खींचता है.

 


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