Covid-19 को हराने के लिए जरूरत है सोशल डिस्टेंसिंग के साथ एकजुटता की

by Marginalised Staff.

पूरा विश्व इस वक्त वैश्विक महामारी कोरोना की चपेट में है. लगभग एक लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हो गयी है और सात लाख से ज्यादा लोग इसकी गिरफ्त में हैं. अभी तक ना तो इस बीमारी की कोई दवा बनी है और ना ही कोई वैक्सीन. मंगल ग्रह पर आशियाना बनाने की चाह रखने वाला यह आधुनिक मानव समाज एक वायरस के आगे बेबस है.

भारत में इस बीमारी ने जनवरी माह में दस्तक दिया था. 30 जनवरी को केरल का एक व्यक्ति इस बीमारी से संक्रमित पाया गया था. दो-ढाई महीने में स्थिति ऐसी हो गयी है कि भारत में इस बीमारी के 7529 मरीज हैं और 249 लोगों की मौत हो चुकी है सरकारी आंकड़ों के अनुसार. हां एक बात यह अच्छी है कि भारत में 653 लोग इस बीमारी की गिरफ्त से निकलकर ठीक हो चुके हैं. भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता और स्वास्थ्य सुविधाओं में सीमित संसाधनों को देखते हुए पूरे देश में 24 मार्च की रात 12 बजे से लाॅकडाउन घोषित कर दिया है. 14 अप्रैल को लाॅक डाउन की अवधि समाप्त हो रही है लेकिन प्रधानमंत्री ने 11 तारीख को मुख्यमंत्रियों से सलाह की और यह तय माना जा रहा है कि लाॅकडाउन की अवधि 30 अप्रैल तक बढ़ा दी जायेगी. अरविंद केजरीवाल ने तो पीएम मोदी की लाॅकडाउन के लिए तारीफ भी कर दी. हालांकि अभी अधिकारिक घोषणा होना शेष है. इस बीमारी के चेन को तोड़ने का एकमात्र यही रास्ता है कि हम उसे जीवित शरीर मुहैया ना करायें. जीवित शरीर मिलते ही वह प्रसारित होने लगता है. ऐसे में लाॅकडाउन ही एकमात्र उपाय आज विश्व को दिख रहा है. इंडियन कौंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जो संकट की इस घड़ी में एक ओर जहां सुकून देती है, वहीं हमारे लिए खतरे की सूचना भी है. आईसीएमआर का कहना है कि भारत में कोरोना के विस्तार को लाॅकडाउन ने काफी हद तक रोक दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर लाॅकडाउन नहीं होता तो देश में 15 अप्रैल तक आठ लाख कोरोना के मरीज होते.स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस बात को माना है कि अगर लाॅकडाउन नहीं होता तो देश में मरीज लाखों में होते. इस रिपोर्ट में यह खबर सुकून तो देती है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में कोरोना कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज में पहुंच चुका है और इसे रोकने के लिए लाॅकडाउन बहुत जरूरी है.

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क्या है कम्युनिटी ट्रांसमिशन

कम्युनिटी ट्रांसमिशन का अर्थ है कि यह बीमारी सामुदायिक संपर्क की स्थिति में पहुंच गयी है. यानी कि अगर कोई संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कोई स्वस्थ व्यक्ति आता है तो वह कई लोगों को संक्रमित करता जाता है. मसलन एक संक्रमित व्यक्ति किसी चीज को छूकर चला जाता है और वहां दूसरा स्वस्थ व्यक्ति आता है, तो उस जगह से वह संक्रमित होता है फिर उससे दूसरा, तीसरा, चौथा और फिर संक्रमण का चेन बनता जाता है. दक्षिण कोरिया की एक महिला जिसे मरीज 31 नंबर कहा जाता है, उसने लगभग तीन हजार लोगों को संक्रमित किया है. वहीं रवास्थ्य मंत्रालय यह कहता है कि अभी देश में कोरोना लोकल ट्रांसमिशन के स्टेज में है, यानी स्टेज टू में है. अगर कम्युनिटी ट्रांसमिशन है भी तो वह काफी लिमिटेड है.

चूंकि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से हमारा देश अभी भी काफी पिछड़ा है, ऐसे में अगर यहां कोरोना का कम्युनिटी ट्रांसमिशन हुआ तो कहना ना होगा कि लाशों के ढेर लग जायेंगे और सरकार और समाज बेबस हो जायेगी. यही कारण है कि सरकार ने कई तरह की तैयारी की है और लाॅकडाउन को अपना हथियार बनाया है कोरोना के खिलाफ.

ऐसे वक्त में जब देश कठिन घड़ी में है पूरे देश को एकजुट होना चाहिए था. यह देश जहां की आबादी 130 करोड़ है, वह महामारी झेलने की स्थिति में कदापि नहीं है. ऐसे में एक दूसरी महामारी ने इस देश को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. बीमारी नयी नहीं बहुत पुरानी है, लेकिन इस बार इसका जो रूप दिख रहा है वो बहुत खतरनाक है. वह बीमारी है सांप्रदायिकता की आग.

नफरत की इस बीमारी को फैलाने में इस बार राजनीति के महारथियों की कोई भूमिका नहीं वे तो बस चुपचाप कोरोना की फसल काट रहे हैं, उसमें थोड़ा-थोड़ा खाद डाल रहे हैं, जो नंगी आंखों से दिख भी नहीं रहा. दरअसल इस नफरत की बीज पड़ी दिल्ली के तबलीगी जमात में. जहां दो हजार से ज्यादा कोरोना ने वो कर दिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. सरकार भी यह मान रही है कि तबलीगी जमात के कारण कोरोना के मामले 30 प्रतिशत ज्यादा बढ़े.

तबलीगी जमात ने बढ़ाई परेशानी

दिल्ली के तबलीगी जमात में जहां दो हजार से ज्यादा  लोग मरकज में शामिल हुए. मरकज यानी बैठक. इस मरकज में देश-विदेश से आये लोग शामिल हुए. इस मरकज की सूचना दिल्ली पुलिस को थी. लेकिन लापरवाही यह हुई कि सोशल डिस्टेंसिंग का नारा देने के बाद भी सरकार उसका यहां पालन नहीं करवा सकी. बड़ी मुश्किल से सरकार ने यह जगह खाली करवायी. तबतक तबलीगी जमात के कई सदस्य पूरे देश में फैल चुके थे और साथ ही फैल चुका था कोरोना का संक्रमण. देश में जितने मामले कोरोना संक्रमण के हैं उनमें से लगभग 40 प्रतिशत इससे जुड़ा है.

तबलीगी जमात के लोगों ने संक्रमित लोगों को अपने घरों में पनाह दी और उन्हें एक तरह से छुपाया. वहीं इस घटना के सामने आने के बाद भी मुसलमान बुद्धिजीवियों ने घटना की उस तरह से निंदा नहीं की, जैसे की उन्हें करनी चाहिए थी. सबने बचते हुए कलम चलाया. धर्म के प्रति कट्टरता अच्छी हो सकती है लेकिन बीमारी के प्रति कट्टरता लोगों के गले नहीं उतरी और एक तरह से दूसरे कौम के लोगों में यह संदेश गया कि तबलीगी जमात का आयोजन इरादतन था. मौलाना साद जैसे लोगों ने इस सोच का और बढ़ाया. उसपर तुर्रा यह रहा कि तबलीगी जमात के जो लोग आइसोलेशन में भेजे गये थे वे डाॅक्टरों , नर्सों और सफाईकर्मियों पर थूकने लगे. उनके सामने पैंट उतारने लगे और इतने से भी जब नहीं भरा तो शौच और पेशाब भी करने लगे. इन सारी खबरों ने लोगों में नफरत भरा. देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें आयीं कि सफाईकर्मियों को पीटा गया. ऐसी महामारी जिससे बचाव का एक ही उपाय है सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग उस दौर में सफाई कर्मियों के साथ दुर्व्यहार पाप है.

मुसलमानों का आरोप उनके कौम को बदनाम किया जा रहा

नफरत का जवाब भी नफरत से ही मिला है. मुसलमान इसे साजिश बता रहे हैं और कई लोगों का यहां तक कहना है कि सीएए और एनसीआर का विरोध करने की उन्हें सजा मिल रही है. इसलिए सरकार उनके घरों तक पहुंच गयी है और उन्हें बदनाम कर रही है. यानी कि राजनीतिक दलों की गोटी खुद ब खुद लाल हो रही है उन्हें कोई चाल नहीं चलना पड़ रहा है. नफरत का पेड़ जितना फले -फूलेगा राजनीति के सियासतदारों को फायदा मिलेगा. लेकिन आज जबकि हम यह जानते हैं कि कोरोना मानवता पर संकट है और इसके खात्में के लिए हमें साथ आना ही होगा, जरूरत इस बात की हम स्थिति की नजाकत को समझें.

कोरोना ने याद दिलायी स्पेनिश फ्लू की

अब से सौ साल पहले स्पेनिश फ्लू ने पूरे विश्व को अपने कब्जे में लिया था और करीब 50 मिलियन लोग मारे गये थे. कोरोना की स्थिति भी कुछ वैसी ही होती जा रही है. इस वायरस की शुरुआ चीन क वुहान प्रांत से हुई. चीन में तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत इस बीमारी से हुई. वहीं अमेरिका, इटली, फ्रांस और ईरान जैसे देशों में भी हजारों लोग इसके शिकार हो चुके है. अमेरिका और इटली में दस हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यह वायरस अभी काफी सक्रिय है और इसे रोकने का एक ही तरीका है कि अपने घर में रहें.

ये आलेख मार्जिनलिज़्ड.इन वेब पोर्टल की आधिकारिक राय नहीं है.


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