ऋषि कपूर:भावभीनी श्रद्धांजलि एक शानदार अभिनेता को ! आप हमेशा यादों में रहेंगे अपने बनकर !!

Ashok Singh

ऋषि कपूर हमारी पीढी के लिये हमेशा से विशेष रहे। जब हम बडे हो रहे थे अपने बडे भाइयों से देवानंद के उपर युवतियों के मर मिटने के किस्से सुनते रहे। फिर युवा ह्रदय पर आराधना फिल्म से राजेश खन्ना छा गये और लड़कियों के दिलो दिमाग में रच बस गये। देवानंद और राजेश खन्ना के बाद ऋषि कपूर ने ऐसा कब्जा जमाया कि फिर किसी और के लिये जगह ही नहीं बची। एक टिनएजर जिसके अभी दाढी मूंछ भी ठीक से नहीं आयी थी वह ऋषि कपूर से कनेक्ट कर रहा था। हम उनमे अपनी छवि देख रहे थे। लगा वह हमारी ही तरह तो हैं इनकी भी अभी दाढी मुछ हमारी तरह नहीं आयी है। सोलह वर्ष की डिम्पल हमारी स्कूल की दोस्तों जैसी लग रही थी। ऋषि कपूर के रोमांस में हम अपने आप को देख रहे थे। वास्तव में पहली बार महसूस हुआ था कि हमारी उम्र मुहब्बत करने की हो गयी है। उस समय कई लडके अपनी बॉबी के साथ घर से भाग गये थे।


ऋषि कपूर अपनी फिल्मों में पचास वर्ष की उम्र तक रोमांस करते रहे और हम भी पैंतालिस तक उस छवि से बाहर नहीं निकले।
स्कूल में “मैं शायर तो नहीं मगर ए हसीं” गाते गाते शायर भी हो गये।
रफुचक्कर में ऋषि कपूर नीतू सिंह के लिये जब गाते थे “तुमको मेरे दिल ने पुकारा है” तो ऐसा लगता था कि हम ही गाये जा रहे हैं। 1980 में रिलीज़ फिल्म “कर्ज” में उनका ये गाना “मेरी उमर के नौजवानो दिल न लगाना ए दिवानो” सुनते हुए ऐसा लगता था मानो वह हमहीं से बातें कर रहे हो। ऋषि कपूर की खास बात यह रही कि बेहद कम उम्र से उन्होंने फिल्मों में काम की शुरुआत की, ये एक बड़ी वजह रही कि हम स्कूली छात्रों के आइडल यही रहे।

राजेश खन्ना का स्टारडम जब छाया तब भी ऋषिकपूर के चाहने वालों और उनकी फिल्म देखनेवालों की कमी नहीं रही। अमिताम बच्चन की एंग्री यंग मैन की छवि के सामने सब पीछे छुट गये लेकिन टीनएजर लडके लड़कियां ऋषि कपूर के दीवाने रहे ।अपने से कम उम्र कमसिन हिरोइनों के साथ भी उनका रोमांस सहज दिखता था और हमें भी लगता था रोमांस करने की उम्र हमारी खत्म नहीं हुई। सलमान,आमिर खान,शाहरुख के साथ काम करने वाली अभिनेत्रियां ऋषिकपूर के साथ भी उतनी ही जमती थी। माधुरी दीक्षित हो या जूही चावला या मिनाक्षी शेषाद्री सबके साथ बेहतरीन जोडी।

ऋषि कपूर, “पटियाला हाउस” फिल्म (2011) में

फिर जब उन्होने अभिनय की दूसरी पारी शुरु की तबतक हममें भी परिपक्वता आ गयी थी और रोमांटिक फिल्मों से इतर गंभीर फिल्में जिनके किरदार कालजयी थे, पसंद आने लगे थे। दिवंगत इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मनोज बाजपेयी की फिल्में देखने की लत लग चुकी थी। लेकिन ऋषिकपूर अपने शानदार अभिनय के बल पर फिर दिल में वैसे ही विराजमान हो गये। 2012 में आयी फिल्म “अग्निपथ” में उनका विलेन का किरदार अचम्भित करनेवाला था। ऋषिकपूर और विलेन !! ऋषि कपूर अभिनय में इतना प्रयोग करेंगे, कभी सोचा नहीं था. ऐसा प्रयोग जो बेहद मकबूल हुआ. वे अब तक चले आ रहे रोमांटिक अभिनेता की छवि को तोड़ने में पूरी तरह सफल रहे. अपने आप को उन्होंने बदलते समय, बढ़ती उम्र के अनुरूप ढाला. मुल्क, पटियाला हाउस, कपूर एंड सन्स जैसी फिल्मों में अदाकारी देखते हुए मन में एक टीस भी उठी, काश पहले किसी निदेशक ने ऋषि कपूर में एक छूपे हुए बेहतरीन संजीदा अभिनेता को देखा होता। ऋषिकपूर एक ऐसा अभिनेता थे जो सदी के महानायक के बाद दूसरी पारी में छा गये।
उनकी सबसे बडी पूंजी रही कि उनके साथ बडे हुये हमलोग कभी उनसे अलग नही हुये।
भावभीनी श्रद्धांजलि एक शानदार अभिनेता को ! आप हमेशा यादों में रहेंगे अपने बनकर !!

Sri Ashok Singh is a businessman in Ranchi. 


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