VizagGasTragedy ने दिला दी भोपाल गैसकांड की याद, शुक्र है हालत उतने बदतर नहीं हुए

रात अपने चरम पर थी, पूरी तरह सन्नाटे के आगोश में. वही कोई 2.30-3.0 बज रहा था. अचानक लोगों सोते हुए लोगों को बेचैनी महसूस हुई. दम घुट सा रहा था और फिर लोग सड़कों पर नालियों में बेहोश-बदहवास मिले. यह घटना आज देर रात आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में घटी. एक रसायनिक संयंत्र से हुए गैस रिसाव के कारण घरों में सोये लोग बदहवास हो गये. रिसाव का नतीजा सैड़कों ग्रामीणों, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं, को भुगतना पड़ा. उन्हें आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, जी मिचलाना और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने जैसी परेशानियां हुईं, साथ ही लोग बेहोश भी हुए.

बच्चे और बूढ़ों की हालत ज्यादा खराब है. हजारों लोगों को अस्पताल में भरती कराया गया है और अबतक 11 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है. विशाखापत्तनम के पास गोपालपत्तनम नामक जगह पर वेंकेटपुरम गांव में स्थित एलजी पॉलिमर्स लिमिटेड के संयंत्र से स्टाइरीन गैस का रिसाव हुआ जो लोगों के लिए दर्दनाक मौत की सौगात लेकर आया. जो लोग अस्पताल में हैं उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है. गैस रिसाव के बाद लोग सड़क किनारे और नालों के पास बेहोशी की हालत में पड़े मिले जिससे बड़ी औद्योगिक आपदा के अंदेशे को बढ़ा दिया. स्टाइरीन रसायन का इस्तेमाल सिंथेटिक रबड़ और रेजिन बनाने में किया जाता है. इसके असर जानवरों के साथ-साथ मवेशियों पर भी होता है. तड़के गैस का रिसाव तब हुआ जब संयंत्र के कुछ श्रमिक इकाई को फिर से खोलने की तैयारी कर रहे थे.

भोपाल गैस त्रासदी: जब एक ठंड भरी रात मौत का पैगाम लेकर आई

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय और एनडीएमए के अधिकारियों से स्थिति के संबंध में बात की है जो हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ मैं सभी की सुरक्षा और विशाखापत्तनम के लोगों की कुशलक्षेम की प्रार्थना करता हूं . ” घटना के संबंध में डीजीपी गौतम डी सवांग ने कहा कि रिसाव को रोक लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है. करीब 250 लोगों का शहर के अस्पतालों में इलाज चल रहा है. उनमें से 20 वेंटिलेटर पर हैं. मृतकों में आठ साल का एक बच्चा भी शामिल है. स्थिति इतनी भयावह थी कि प्रभावित लोगों को निकालने के लिए गए कई पुलिसकर्मी भी इससे प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा, प्रभावित गांव से भागने के दौरान दो लोग एक बोरवेल में गिर पड़े जिससे उनकी मौत हो गयी. यह स्थिति घटना की भयावहता को दर्शाती है. प्रभावित लोग ऑटो और दो पहिया गाड़ियों पर चिकित्सकीय सहायता के लिए दौड़े जबकि सरकारी कर्मियों ने जो भी संभव हुआ, वो प्राथमिक उपचार उन्हें देने की कोशिश की.

दुर्घटना क्यों और कैसे हुई?
ऐसे संयंत्रों में जहां से गैस का रिसाव संभव है वहां न्यूट्रलाइजर लगा होता है, लेकिन वह प्रभावी क्यों साबित नहीं हुआ, इसकी जांच की जाएगी. संयंत्र से स्टाइरीन गैस का रिसाव हुआ है, जो जहरीली गैस नहीं है और तभी घातक होती है जब अधिक मात्रा में सांस के साथ शरीर में चली जाये. यहां गौर करने वाली बात यह है कि आखिर कैसे इस गैस का रिसाव इतना हो गया कि लोगों की जान पर बन आयी. ”

इस घटना ने 1984 में हुए भोपाल गैस कांड की याद दिलायी. आज सुबह विशाखापट्टनम में जो दृश्य उभरा उसने रोंगटे खड़े कर दिये और लोग यह सोचने पर विवश हो गये कि क्या यह भोपाल गैस कांड की पुनरावृत्ति होगी. लेकिन खुशी की बात यह है कि समय रहते हालत पर काबू पा लिया गया है. भोपाल गैस कांड में यूनियन कार्बाइड के संयंत्र से गैस रिसाव हुआ था जिसमें 3,787 लोगों की मौत हो गयी थी और 574,366 लोग शारीरिक रूप से अक्षम हो गये थे. सबसे दुखद पक्ष इस घटना का यह था कि कंपनी के सीईओ सीईओ वारेन एंडरसन को छोड़ दिया गया. उम्मीद की जानी चाहिए कि विशाखापट्टनम में ऐसा कुछ नहीं होगा.


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