Cinema/12 Years A Slave/मुझे जीवन वापस चाहिए

Avishraant Avishraant

आजादी जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है। बल्कि यह जीवन का पर्याय है। इसलिए यदि इसे छीन लिया जाए तो जीवन त्रासदी में बदल जाता है। ’12 Years A Slave’ फिल्म देखते हुए इसे समझा और महसूस किया जा सकता है। सोलोमन नार्थअप एक आजाद अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक हैं जो न्यूयार्क में अपने परिवार के साथ रहते हैं और खुबसूरत वायलिन बजाते हैं। अमेरिका के उत्तरी राज्यों ने 1804 में ही नियम बनाकर दास प्रथा खत्म कर दी थी लेकिन दक्षिणी राज्यों में यह अमानवीय प्रथा बदस्तूर जारी थी। वहाँ खेतों में काम करने के लिए मुख्य रूप से अफ्रीका से काले लोगों को गुलाम बनाकर लाया गया था। लेकिन कभी-कभी उत्तरी राज्यों में रहने वाले आजाद नीग्रो भी दलालों द्वारा पकड़ लिये जाते थे और उन्हे दक्षिणी राज्यों को स्मगल कर दिया जाता था। वहां उनकी जिंदगी पशुओं से भी बदतर होती थी।

सोलोमन भी 1841 में ब्राउन और हैम्मिलटन के झांसे में आकर वाशिंगटन डी सी पहुँचते है ट्रैप कर लिये जाते हैं । उनकी पुरानी पहचान मिटा दी जाती है और गुलामों का विक्रेता बर्क उसे नया नाम देता है-‘प्लैट’। पुरानी पहचान बताने की कोशिश करने पर प्लैट की बेरहमी से पिटाई की जाती है, उसे भूखा और नंगा रखा जाता है अंततः वह टूट जाते है। उसका एक साथी कहता है-‘अगर जिंदा रहना है तो कम बोलो।’ प्लैट खामोश हो जाता लेकिन उसकी आँखे उसके दर्द को बयान करती हैं। गुलाम स्त्री-पुरुष और बच्चों की बिक्री का दृश्य किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाला है। नग्न खड़े गुलाम और हाट-बाजार में बिकने आये पशुओं में कोई अंतर नहीं है। यह कितना हृदयविदारक है कि अलग-अलग मालिकों के हाथों बिके और हमेशा-हमेशा के लिए जुदा होते स्त्री-पुरुष और बच्चों की रुलाई को छिपाने के लिए सोलोमन को वायलिन बजानी पड़ती है, जबकि वह खुद भी रो रहा है।

विलियम फोर्ड अन्य गुलामों के साथ प्लैट को खरीद लेते है। वह और अलाइजा लुईसियाना प्रान्त पहुँच जाते थे। अपने बच्चों से बिछड़ चुकी अलाइजा उन्हें याद कर फूट-फूट कर रोती है। मि. फोर्ड दयालु और धर्मनिष्ठ मालिक हैं। वह अपने गोरे मित्रों के बीच परमेश्वर की करुणा का पाठ करते हैं और ठीक उसी समय बैकग्राउंड में अलाइजा के रोने की आवाज उनके पाखंड को उजागर कर देती है। मालिकों के चरित्र की समझ प्लैट की अपेक्षा अलाइजा को कहीं ज्यादा है। वह प्लैट से कहती है कि मि. फोर्ड की नजरों में वह सिर्फ एक गुलाम है। उससे ज्यादा उसकी कोई अहमियत नहीं क्योंकि सोलोमन की वास्तविकता जानते हुए भी आखिरकार उन्होंने उसे खरीद ही लिया और गुलाम बनाकर रखा है। प्लैट को लगता है कि वह अपने हुनर और बुद्धिमत्ता से एक दिन फोर्ड को प्रभावित कर लेगा जो उसे एक दिन दासता से मुक्त कर देगें ।

पर वह दिन कभी नहीं आता। एक गोरे कारपेंटर से प्लैट के झगड़े के बाद विलियम फोर्ड उसे एक क्रूर बागान मालिक मैरी ऐप्स को बेच देते हैं। विदा के समय फोर्ड उसे एक वायलिन देते हैं। वहाँ वह कपास के खेतों में जानवरों की तरह खटता है। वहीं एक स्त्री गुलाम पैट्सी से उसकी मुलाकात होती है। वह सभी गुलामों में सबसे कर्मठ महिला है लेकिन ऐप्स उसका यौन शोषण करता है। ऐप्स की पत्नी पैट्सी से जलती है। एक दिन पड़ोसी बागान मालिक के यहाँ से साबुन लाने के जुर्म में ऐप्स उसे उसे नंगा कर कोड़े लगाने का हुक्म देता है। प्लैट उसे बेरहमी से कोड़े नहीं लगाता जिससे नाराज ऐप्स उसे धक्का देकर गिरा देता है और स्वयं उसे बेहोश होने तक जमकर पीटता है। वह कहता है-

“जो गुलाम अपने मालिक का काम नहीं करेगा, वह अपनी कब्र खोदेगा।”

ऐप्स की कपास की फसल खराब हो जाती है। उसे लगता है कि उसके गुलाम उसे बद्दुआ देते रहते हैं। वह उन्हें एक सीजन के लिए अपने पड़ोसी बागान मालिक टर्नर को लीज पर दे देता है। वहाँ उन्हें गन्ने के खेतों में काम करना पड़ता है। एक पड़ोस की पार्टी में टर्नर प्लैट को वायलिन बजाने की अनुमति देता है। ये उसकी जिंदगी के कुछ अच्छे पल हैं लेकिन लीज की अवधि खत्म हो जाती है और उन्हें वापस ऐप्स के पास जाना पड़ता है। एक बार फिर इनके दमन और शोषण का सिलसिला शुरु होता है। गुलाम कपास चुनते हुए गीत गाते हैं और ऐप्स हवा में हंटर चटकाता है।

प्लैट अपने साथियों से कहता है-

” गुलामी बहुत बुरी चीज है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।”

इस बीच वहाँ एक कनाडियन मजदूर काम करने आता है। मौका देखकर प्लैट उसे अपनी वास्तविकता बता देता है और उसे अपने घर एक चिट्ठी लिख देने का अनुरोध करता है। कुछ ही दिन बाद जब वे एक खेत में बीज बो रहे होते है, एक पुलिस आफीसर दो गवाहों के साथ आता है और पूछताछ के बाद प्लैट को छुड़ा लेता है। प्लैट सबसे विदा लेता है विशेषकर पैट्सी से जिसने कभी उसे मौत दैने की गुहार लगाई थी।

वापस न्यूयार्क पहुँचकर सोलोमन चैन से नहीं बैठते। उन्होंने ब्राउन, हैम्मिलटन ( अपहरणकर्ता) और बर्क( गुलाम बेचने वाला दलाल) के खिलाफ केस दायर किये। हालांकि वह केस जीत नहीं पाये। 1853 में सोलोमन नार्थअप ने अपने दास जीवन के अनुभवों को लिपिबद्ध करते हुए “Twelve Years a Slave” नाम से किताब लिखी जिससे उत्तरी अमेरिकी समाज आन्दोलित हुआ। दास प्रथा के खात्में को लेकर सोलोमन नार्थअप ने आंदोलन चलाये और आगे चलकर एक बड़ी लड़ाई के बाद यह अमानवीय प्रथा पूरे अमेरिका में अवैध घोषित की जा सकी।

सोलोमन की इसी किताब को आधार बनाकर 2013 में स्टीव मैक्वीन ने एक फिल्म बनाई। च्वेटेल एज्योफर ने सोलोमन को पर्दे पर जीवन्त कर दिया। उनके चेहरे पर दर्द और विवशता के भाव इतने गहरे उभरे हैं कि देखने वाले मर्माहत हो जायें। उनकी आंखे उनके अभिनय का बेजोड़ हिस्सा हैं। अपने एक गुलाम साथी की मृत्यु पर शोकगीत गाते सोलोमन के चेहरे पर करुणा और आक्रोश के भाव हों या पैट्सी पर हंटर चलाने की विवशता एज्योफर हर कोण में अद्वितीय रहे हैं। फिल्म के दृश्यों में प्रामाणिकता लाने के लिए उन्हें वास्तविक लोकेशनों-फेलीसीटी, बोकेज, डेस्ट्रेहैन और मैग्नोलिया में सूट किया गया। इसलिए यह फिल्म अभिनय और दृश्य-विधान दोनों ही दृष्टियों से सफल है।

इस फिल्म ने सफलता की कीर्तिमान रचे। फिल्म को तीन श्रेणियों –सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री (पैट्सी की भूमिका में न्योंग’ओ को) और सर्वश्रेष्ठ रूपान्तरित पटकथा लेखन (रिड्ली को) में अकादमी अवार्ड से नवाजा गया। सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीतने वाले मैक्वीन तो यह पुरस्कार पाने वाले पहले अश्वेत निर्माता-निर्देशक बने। गोल्डन ग्लोब सहित कई अन्य पुरस्कार भी इस फिल्म को मिले।

यह फिल्म मुक्ति की आकांक्षा के लिए हमेशा याद रखी जायेगी।


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