जासूसी उपन्यासों की लेखिका Laurali Rose Wright

Saba Khan

कामयाबी! यश! ये दोनों लफ्ज़ अपने आप में कितने खूबसूरत हैं? छोटे से और एहसास भर से मन के किसी कोने को कितना गुदगुदा सा जाते हैं. इंसानी जिंदगी की मुकम्मल तारीख़ के कुछ पन्नों को पलटकर देखें, तो बारहा ऐसे वाकयात नजर आते हैं कि इन दो चीज़ों के पीछे बाज लोगों ने कितनी जाँमारी और जद्दोजहद की है. और कभी कभार दोनों ने ही अपना एक अजब सा सर्द गर्म मिज़ाज दिखलाया है और जिसने मुतवातर कोशिशें की, मशक्कत की. उन्हें नसीब ना हुई और जिसे इन दोनों ने खुद ब खुद आगे बढ़कर चुन लिया उन्हें बगैर किसी ख़ास मशक्कत के हासिल हुईं गोया उनका प्रारब्ध, उनकी नियति ही यश प्राप्त करने के लिए था. खासतौर पर अदबी दुनिया ऐसे किस्सों से भरी पड़ी है जहाँ किसी लेखक ने कोई रचना इस कदर डूबकर की कि जैसे उसका एक-एक लफ्ज़ तराशकर लिखा हो, मगर अंजाम हौलनाक रहा. वो बुरी तरह नकार दी गयी. न केवल आलोचकों द्वारा बल्कि पाठकों द्वारा भी. लेखक भी एक कलाकार ही है और वह अपनी कृति, अपनी रचना को कड़ी मशक्कत के जरिये ही जन्म देता है. फिर चाहे उस रचना पर दावा या यूँ कहिये ठप्पा हो किसी भी विधा का.

जासूसी, रहस्य और अपराध कथाओं के लेखन में भी अक्सर ऐसा हुआ है कि लेखक ने क्या सोचकर क्या लिखा, किसी ख़ास किरदार को अपना मानसपुत्र समझकर बड़े चाव, बड़े लगाव, बड़ी शिद्दत, बड़ी नफासत से लिखा और यश का भागीदार उसे किसी और किरदार ने बनाया. यहाँ तक कि उसने पूरे लेखन के दर्मियाँ रचे गए समस्त किरदारों पर अपनी बरतरी हासिल कर ली. बहरहाल बात इसी कामयाबी और यशप्राप्ति की हो रही थी तो आज 5 जून को एक ऐसी लेखिका का जन्मदिन है जिसने अपने लेखन की शुरुआत मुख्यधारा के विशुद्ध गंभीर साहित्य से की जो उन्हें पहचान दिलाने में तो सफल रहा, मगर नियति की मेहरबानी ऐसी रही कि जब वह अपने चौथे उपन्यास की रचना करने बैठीं, तो एक अजीबोगरीब प्लाट का सोच बैठीं, जहाँ उन्होंने पाया कि उनका एक किरदार, एक उम्रदराज़ व्यक्ति, कुछ विशेष परिस्थितियों में अनपेक्षित रूप से हत्यारा बन जाता है. अब चूँकि बात एक कातिल की थी, तो उस अफ़साने में पुलिस का दखल बनना भी लाजिमी था, तो उन्होंने बतौर पुलिस ऑफिसर, अफ़साने के केंद्रीय किरदार के तौर पर कार्ल एल्बर्ग नाम के एक किरदार को डाला और लिखना शुरू कर दिया. उस अफ़साने ने ऐसी किस्सागोई की शक्ल अख्तियार की, जिसने उक्त लेखिका के लेखन की दिशा ही बदलकर रख दी. उसका लेखन अपराध एवं रहस्य कथा लेखन की ओर मुड़ गया. 1985 में प्रकाश्नोपरान्त उस उपन्यास और उस किरदार को आलोचकों और पाठकों द्वारा ना केवल हाथों हाथ लिया गया, बल्कि उस उपन्यास ने उन्हें ‘मिस्ट्री राइटर्स ऑफ़ अमेरिका’ द्वारा ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ रहस्य कथा उपन्यास’ श्रेणी में प्रतिष्ठित ‘एडगर एलन पो एवार्ड’ का भी सम्मान दिलवाया. उक्त कार्ल एल्बर्ग नाम के किरदार ने रहस्य कथाओं के संसार में विश्व प्रसिद्ध विशेष किरदारों की सूची में बड़े पुरजोर तरीके से अपनी हाजिरी दर्ज कराई और कुछ किरदारों पर न केवल बरतरी हासिल की, बल्कि कुछ के तो बराबरी में ही आकर खड़ा हो गया. फलस्वरूप जिस लेखिका ने लेखन का क, ख, ग ही विशुद्ध साहित्य से सीखा था, उसे यश, मान, प्रतिष्ठा बतौर रहस्य कथा लेखिका ही मिला. (इस बात पर ‘अफ़सोस’ शब्द की दावेदारी कितनी बनती है, विमर्श का मुद्दा है!)

ये लेखिका थीं ‘एल० आर० राईट’ जिनका पूरा नाम लौराली रोज राईट (Laurali Rose Wright) था और जन्म का नाम बनी एपलबी (Bunny Appleby) था. उन्होंने लेखन एल० आर० राईट के नाम से किया और व्यक्तिगत जीवन में ‘बनी’ ही बनी रहीं. उनका जन्म 5 जून 1939 को कनाडा के सस्कतून शहर में हुआ था. उनकी आरंभिक शिक्षा भी वहीं पर हुई. जब वे 16 साल की थीं तो उनके पिता सिडनी एपलबी का स्थानान्तरण, पश्चिम जर्मनी के हेमर नामक शहर में कैनेडियन आर्मी बेस स्कूल में अध्यापन हेतु हो गया और वे परिवार के साथ वहाँ आ गयीं. वहीं से उन्होंने 1956 में हाईस्कूल किया. लेकिन जर्मनी में भी उनका ठहरना अधिक समय तक न हो सका, क्योंकि 53 वर्ष की उम्र में उनके पिता का अकस्मात् दिल के दौरे से निधन हो गया, जिसके कारण उनकी माँ और परिवार कनाडा वापस चला गया. वैनकूवर में कुछ वक़्त रहने के बाद वे कैलिफ़ोर्निया चली गयीं. 1961 में लौराली वापस वैनकूवर आयीं, जहाँ वे एक टूरिंग थियेटर कंपनी से जुड़ गयीं. वहीं उनका परिचय साथी कलाकार और अभिनेता जॉन राईट से हुआ. इस परिचय ने अपना नाम, अपनी पहचान बदली और ‘परिचय’ से बदलकर ‘संबंध’ कर लिया और 6 जनवरी 1962 को अपने होने को बाकायदा मुहरबंद भी कर लिया. इस दिन वे विवाह बंधन में बंध गयीं. अगले कुछ वर्षों तक वे लोग कैलिफ़ोर्निया, वैनकूवर इत्यादि शहरों में रहे और अंत में कैलगरी में लौराली ने ‘कैलगरी एलबर्टन’ और ‘कैलगरी हेरल्ड’ में बतौर पत्रकार काम किया. आगे चलकर वे हेरल्ड की सहायक नगर संपादक के तौर पर भी नियुक्त हुईं. जीवन यापन के मुद्दे पर की गई इन मशक्कतों ने अरसे से मन के भीतर कुछ लिखने की इच्छा को भीतर और भीतर कहीं गहरे में दफना दिया था.

मगर हालात के मद्देनज़र इंसान कुछ वक़्त के लिए भले ही अपने शौक़, अपने ख़्वाबों से समझौता कर ले, लेकिन समय की चाल, परिस्थितियों की करवट और जीवन में निश्चिंतता का भाव अगर जरा भी फुर्सत के पल मुहैया करा दें, तो ज्यादातर लोगों में दबे हुए वे शौक़, वो ख्वाब अपनी मौजूदगी का एहसास जरूर कराते हैं. लौराली भी इससे अछूती न रहीं. वे लिखना चाहती थीं और वो वक़्त तब आया जब जॉन राईट को एक्सेस टेलीविज़न में नौकरी मिल गयी. लौराली को अपनी पत्रकारिता की नौकरी से इस्तीफ़ा देकर मुकम्मल तौर पर अपने ख्वाबों को तहरीर देने का मौका मिल गया और उन्होंने ‘नेबर (Neighbour) नाम का एक साहित्यिक उपन्यास लिखा जिसने ‘सर्च फॉर अ न्यू एलबर्टा नॉवेलिस्ट’ नामक प्रतियोगिता भी जीती और 1979 में प्रकाशित हुआ. उनके अगले दो उपन्यास ‘द फेवरिट (The Favourite)’ तथा ‘अमंग फ्रेंड्स (Among Friends)’ क्रमशः 1982 और 1984 में प्रकाशित हुए, जिससे उन्हें बतौर लेखक पहचान तो मिली, लेकिन वो यश वो कामयाबी न मिल सकी जो 1985 में आये उनके चौथे उपन्यास ‘द सस्पेक्ट (The Suspect) ने दिलाई. यही वह उपन्यास था जिसके बारे में मैंने इसी लेख में ऊपर जिक्र किया था कि किस तरह उस उपन्यास ने उन्हें एक साहित्यकार से रहस्य कथा लेखिका में बदल दिया था.

इस उपन्यास की सफलता ने उन्हें जो मकबूलियत दिलाई उस से प्रभावित होकर उन्होंने अगले ही साल 1986 में कार्ल एलबर्ग को केंद्र में रखते हुए उसके अगले कारनामे के तौर पर ‘स्लीप वाइल आई सिंग (Sleep While I Sing)’ लिखा. इस उपन्यास ने उन्हें इस विधा में अच्छी तरह स्थापित कर दिया. हालाँकि ‘मोह के धागे’ इतनी आसानी से न टूटे थे, सो इसी दौरान 1988 में उन्होंने एक और मुख्यधारा का विशुद्ध साहित्यिक उपन्यास लिखा –‘लव इन द टेम्परेट जोन (Love in The Temperate Zone), मगर उसकी कहीं कोई पूछ न हुई. नतीजतन वो फिर रहस्य कथा की तरफ मुड़ी और सात एल्बर्ग मिस्ट्रीज और लिखीं. जिसने दिनों दिन उनकी शोहरत और कद में इज़ाफा ही किया. इस किरदार को उन्होंने 1997 में पुलिस सेवा से रिटायर करवा दिया और उसके स्थान पर सार्जेंट एडविना हेंडरसन को लायीं जिसे लेकर उन्होंने सन 2000 में ‘किडनैप (Kidnap) एवं 2001 में ‘मीनेस (Menace)’ नामक उपन्यास लिखा. मगर एल्बर्ग जैसा जादू एडविना न पैदा कर पायीं.

लौराली के रहस्य कथा उपन्यास न केवल कनाडा, बल्कि अमेरिका, ग्रेट ब्रिटेन, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नार्वे, स्पेन और स्वीडन से भी प्रकाशित हुए . उनके उपन्यास न केवल आज भी दुनिया में पढ़े और पसंद किये जाते हैं, बल्कि कई पर आज भी फिल्मों और सीरियल का निर्माण जारी है.

उनके इस लेखन को समय-समय पर यथोचित सम्मान भी मिला. ‘द सस्पेक्ट’ के लिए मिले ‘एडगर एलन पो एवार्ड’ के साथ ही वो इस पुरस्कार को हासिल करने वाली कनाडा की पहली और अभी तक की एकलौती रहस्य कथा लेखिका बनीं. इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ उपन्यास के लिए दो बार ‘आर्थर इलिस अवार्ड’ उनके उपन्यासों ‘अ चिल रेन इन जेनुअरी (A Chill Rain In January)’ तथा ‘मदर लव (Mother Love) के लिए दिया गया. Mother Love को ‘कनाडियन ऑथर्स’ एसोसिएशन लिट्रेरी प्राइज फॉर फिक्शन’ का भी पुरस्कार प्राप्त हुआ जिसे इस विधा में प्राप्त करने वाली वो प्रथम लेखिका हैं. वे न ‘केवल क्राइम राइटर्स ऑफ़ कनाडा’,बल्कि ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ क्राइम राइटर्स के साथ-साथ प्रतिष्ठित ‘मिस्ट्री राइटर्स ऑफ़ अमेरिका’ की भी सदस्या थीं.

1995 में उन्हें पता लगा कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है और उसी साल उनका जॉन राईट से तलाक भी हो गया. उनकी सर्जरी हुई, मगर 1997 में बीमारी ने फिर सिर उठाया और उन्हें फिर से कैंसर हो गया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी थी और अगले तीन सालों में उन्होंने तीन उपन्यास लिखे थे. 25 दिसम्बर 2000 को उन्होंने जॉन राईट से दुबारा विवाह किया. लेकिन इसके बाद बहुत जल्द ही वो कैंसर से अपनी जंग हार गयीं और 25 फ़रवरी 2001 को उनका देहांत हो गया.

उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में ‘द सस्पेक्ट (The Suspect)’, ‘अ चिल रेन इन जेनुअरी (A Chill Rain In January)’, ‘मदर लव (Mother Love)’, ‘एक्ट्स ऑफ़ मर्डर (Acts of Murder)’ आदि प्रमुख हैं.


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