क्रिकेट में sledging की शुरुआत कब से हुई?

Er S D Ojha

क्रिकेट में अपशब्द की शुरुआत कब हुई ? इसका कोई लेखा जोखा नहीं है । कहने वाले कहते हैं कि इसकी शुरुआत एडीलेड ओवल में शेफील्ड शील्ड प्रतियोगिता( 1964 -65 ) के दौरान हुई थी । अपशब्द को अंग्रेजी में स्लेजिंग कहते हैं । स्लेज एक खूबसूरत हथौड़ा होता है ,जिससे मारने की क्रिया को स्लेजिंग कहते हैं । जैसे किसी ने किसी को जूते से मारा , लेकिन जूते का रंग लाल था । इसे हम यूँ भी कह सकते हैं – मारा तो मारा , लेकिन लाल जूते से । लाल जूते से मारने से अपराध का गुरुत्व थोड़ा कम होता है क्या ?

कई लोग क्रिकेट में अपशब्द की शुरुआत साठ के दशक से मानते हैं । जब ग्राहम कालिंग बैटिंग के लिए आते थे तो विपक्षी टीम समवेत स्वर में गाना गाने लगती थी – when a man loves a woman . यह गीत पर्सी स्लेज का लिखा हुआ था । पर्सी स्लेज के नाम पर क्रिकेट में अपशब्द को स्लेजिंग कहा जाने लगा ।

स्लेजिंग विशेषतः खिलाड़ी के एकाग्रता को खत्म करने के लिए किया जाता है । किरन मोरे और जावेद मियादाद के बीच की हुई स्लेजिंग पूरे विश्व ने देखा था । किरन मोरे द्वारा की गयी स्लेजिंग से परेशान हो जावेद मियादाद मैदान में उछल कूद करने लगे थे । इससे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हुआ था । एक भारतीय बाॅलर से जावेद मियादाद ने उसके रुम का नम्बर पूछा था । बाॅलर ने जब पूछा कि रुम नम्बर क्यों चाहिए ? तो मियादाद ने कहा था – मैं तेरे रुम में अपना छक्का पहुँचाऊंगा ।

क्रिकेटर हरभजन पर 2007 -08 में सायमंड्स पर नस्लभेदी टिप्पणी करने का आरोप लगा था । उन पर तीन मैचों पर प्रतिबंध लगने वाला था । आरोप साबित नहीं हुआ । लिहाजा उन्हें मैच शुल्क में 50% कटौती कर बख्स दिया गया था ।

डब्लू जी ग्रेस क्रिकेट में शालीन स्लेजिंग के लिए जाने जाते थे । उनका अंदाज मजाकिया होता था । एक बार वे क्लीन बोल्ड हो गये , लेकिन उन्होंने स्टम्प से गिरी गिल्लियों को पुनः यथास्थान रखा और अम्पायर से कहा –

“हवा तेज है । तेज हवा के कारण गिल्लियां गिर गयीं थीं”

अम्पायर ने उन्हें आऊट करार दिया और उन पर तंज कसा था –

” हाँ , हवा तेज है । देखिए आराम से जाइएगा । पेवेलियन जाते जाते आपकी टोपी न गिर जाए ।”

विवियन रिचर्ड्स स्लेजिंग का मुहतोड़ जवाब देते थे । एक बार वे गेंद की दिशा व दशा नहीं समझ पा रहे थे । बार बार बीट हो जा रहे थे । ग्रेग थाॅमस ने तंज कसा था –

” आपकी परेशानी क्या है ? गेंद का रंग लाल है । वह आकार में गोल है । उसका वजन 5 औंस का है । इतने से तो आपको गेंद दिखनी शुरू हो जानी चाहिए ।”

और वास्तव में विव को गेंद नजर आने लगी । अगली गेंद पर विवियन रिचर्ड्स ने छक्का मार दिया । छक्का स्टेडियम पार कर पास बहती नदी में समा गया । अबकी बारी रिचर्ड्स की थी । उन्होंने थाॅमस से कहा था –

” आपको तो गेंद की पूरी जुगराफिया मालूम है । जाइए , जाकर नदी से निकाल कर लाइए ।”

कई बार दर्शक भी स्लेजिंग से पीछे नहीं हटते । हाल हीं में एक न्यूजीलैंड के दर्शक पर स्लेजिंग के लिए 2022 तक न्यूजीलैंड के किसी अंतर्राष्ट्रीय या घरेलू मैच देखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । दर्शक ने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर पर नस्लभेदी टिप्पणी की थी । ऐसे हीं एक भारतीय दर्शक ने एक पाकिस्तानी क्रिकेटर को “आलू की बोरी ” कहकर स्लेजिंग की थी । क्रिकेटर ने अपना आपा खो दिया था । वे दर्शक दीर्घा में बैट लेकर उस दर्शक को मारने पहुँच गये थे । बीच बचाव के बाद मामला शांत हुआ था ।

स्लेजिंग के अनेकों उदाहरण हैं । सबका जिक्र इस छोटे से लेख में सम्भव नहीं है । वैसे स्लेजिंग से खिलाड़ी के नैसर्गिक खेल में विघ्न पैदा होती है । वह अपना स्वभाविक खेल खेल नहीं पाता । स्लेजिंग पर पूर्णतया बैन लगा देना चाहिए । खिलाड़ी का खेल देखा जाना चाहिए । उसके रंग रुप खानदान पर नहीं जाना चाहिए । किसी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी बेहद शर्मनाक होती है । क्रिकेट भद्रजनों का खेल है । इसे भद्रजनों के बीच हीं रहने देना चाहिए ।


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.