बिहार चुनाव के मद्देनज़र पार्टियों की सोशल इंजीनियरिंग शुरू, रामा सिंह, जीतन राम मांझी, और कौन कौन ?

Staff report

कभी रामविलास पासवान के सबसे ख़ास रहे लोजपा के पूर्व बाबुबली सांसद रामा सिंह बिहार विधान सभा चुनाव से ठीक पहले राजद में शामिल हो गए हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रामा सिंह 29 जून को राजद ज्वाइन करेंगे. चर्चा है कि रामा सिंह के साथ सवर्ण समाज से कई अन्य नेता भी राजद में शामिल होंगे. रामा सिंह और रघुवंश प्रसाद सिंह के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है. वैशाली से लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान रामा सिंह ने रघुवंश प्रसाद सिंह को शिकस्त दी थी. तब रामा सिंह लोजपा से टिकट पर चुनाव लड़े थे .लेकिन 2019 के चुनाव के दौरान उनका पार्टी से संबंध ठीक नहीं रहा और पार्टी ने उनकी जगह वीणा देवी की टिकट दे दिया जिसके बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि वो जल्द ही लोजपा छोड़कर किसी अन्य पार्टी को ज्वाइन करेंगे. रामा सिंह तेजस्वी यादव की उस मुहिम का हिस्सा है जिसके तहत वो चुनाव से ठीक पहले बिहार के सवर्णों को लामबंद करने की कोशिश कर रहे हैं. तेजस्वी यादव आगामी चुनाव में माय समीकरण के लिमिटेशन से परिचित हैं और इसे विस्तार देना चाहते हैं. इसलिए तेजस्वी यादव राजपूत भूमिहार जातियों के नेताओं को अपनी टीम में शामिल करने में जुटे हुए हैं. इससे वे न केवल जदयू और भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहते हैं, बल्कि राज्य में सवर्ण जातियों को सन्देश देना चाहते हैं कि राजद उनके खिलाफ नहीं है. फिलहाल  इस घटनाक्रम से नाराज रघुवंश प्रसाद सिंह ने राजद से इस्तीफा दे दिए है. उनका इस्तीफा राजद के लिए बहुत बड़ा झटका बताया जा रहा है.

जीतनराम मांझी को लेकर भी सुगबुगाहट तेज है:
जानकारी मिल रही है कि हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी फिर से नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाने को तैयार हो गए हैं. जदयू से निकलने के बाद जीतन राम माझी ने अपनी राजनीतिक पार्टी हम बनाया. महागठबंधन में रहे, चुनाव लड़े, और 2015 विधान सभा चुनाव में महज एक सीट पर सफलता मिली. अपने बेटे को उन्होंने राजद के सहयोग से विधान परिषद पहुंचाया और अब फिर से जदयू में अपनी पार्टी हम का विलय करने को तैयार हैं.  बीते कुछ समय से महागठंधन में समन्वय समिति को लेकर चल रही रार की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की राजद से तकरार चल रही थी. जीतन राम मांझी ने बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश की खुलकर तारीफ कर और राजद को अल्टीमेटम देकर राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी थी. मांझी ने नीतीश की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अच्छा काम कर रहे हैं. वह संवेदनशील हैं लेकिन जमीन पर उनके निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है. पदाधिकारी सरकारी आदेशों का सही कार्यान्वयन नहीं कर रहे हैं. इसलिए वास्तविक नतीजा नहीं सामने आ रहा है.

इस पूरे खेल पर कांग्रेस की नजरें भी टिकी हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीत कुमार यादव कहते हैं कि ”चुनाव से पहले छोटे दलों के बीच भगदड़ मचती रहती है. सब अपना भविष्य देख रहे हैं. इस बार कांग्रेस बड़े स्तर पर बिहार में अपना रंग दिखाएगी और सत्ता पक्ष को चुनौती देगी. कांग्रेस का गठबंधन पहले से तय है और हम आपस में मिलकर बिहार में नई सरकार बनाने को तैयार हैं.’
बिहार की जनता की नज़र आने वाले दिनों में नेताओं के बड़े पैमाने पर दल बदली पर है.

 


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.