कोरोना काल में अंदर, बाहर हर तरफ पसरा सन्नाटा… और भय: डॉ योगेंद्र की कलम से

Dr Yogendra

कॉलोनी की आंतरिक सडकों पर सन्नाटा पसरा है।कोई नहीं,सिवा चिडिया- चुनमुन के।हॉं, रोज की तरह फूल तोडने वाला लडका जरूर फूल तोड रहा है।
मन में सवाल आया- क्या करेगा फूल? गर्ल्स हॉस्टल में एक भी लडकी नहीं है।कॉलोनी का मंदिर भी बंद है।आगत- स्वागत के लिए माला या पुष्पगुच्छ बनता था,वह भी नहीं बन रहा है।कोई किसी का स्वागत क्या करेगा,जब चारों तरफ डर फैला हुआ है।
लेकिन चिडियॉं मस्त है।हर रोज की तरह चहक रही है।पेडों पर, कॉलोनी की चारदिवारी पर,मंदिर के मुंडेर पर,बिजली के तार पर और खाली सडक पर।
रात को सोने जा रहा था तो एक फोन आया- अमुक अमुक को कोरोना हो गया है।थोडी देर के लिए मैं डर गया।इच्छा हुई कि खुली हवा में सांस लेने छत पर चला जाऊं।किबाड खोल कर निकला भी।फिर मन को बहलाने लगा।बीमारी हुई है तो सामना करना है।उपाय क्या है? कई मित्रों के बारे में सुन कर अंदर हिला जरूर,मगर नियंत्रण कर लिया।
ठीक दस बजे मसहरी लगा कर हमलोग सो जाते हैं।पत्नी को अगर घरेलू काम होते हैं तो वह थोडी देर बाद सोने आती है ।दिन भर काम करते करते थकती तो जरूर होगी, लेकिन जाहिर नहीं करती।उस वक्त भी मैं कह दूं कि पानी चाहिए तो वह सहर्ष पानी ला देगी। उसने कभी ना नहीं किया है।पत्नी को लेकर बहुत से चुटकुले- किस्से कहते हैं,लेकिन मैं तो कृतज्ञ हूं अपनी पत्नी का।
चार- पॉंच दिनों से कॉलोनी की दीवारें और सडकें बोलती हैं।लेकिन लोग गहरे सन्नाटे में डूब गये हैं।
यह कॉलोनी बोलनेवाले वर्ग की है।कहिए कि बोलना इनका पेशा है।कक्षाओं में जायेंगे तो बोलना तो पडेगा,लेकिन मार्च के अंतिम दिनों से बोलना बंद है।
कितनी घुटन होती होगी!
क्या क्या सोच रहा होगा? प्रधानमंत्री ने जब थाली पीटने, बिजली ऑफ कर कैंडल जलाने के लिए कहा था तो दो- चार को छोडकर सबने प्रधानमंत्री के निर्देशों का पालन किया था।
यह कॉलोनी कोई सामान्य कॉलोनी नहीं है।मेरे क्वार्टर के उत्तर में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति, कुलपति और कुलसचिव का निवास है।शिक्षक के पचासों क्वार्टर, सैकडों पेड़ ,चार गर्ल्स हॉस्टल ,एक बडा- सा तालाब, एक शिव मंदिर और खुली हुई जगह,जहॉं कॉलोनी के अंदर- बाहर के लडके सामान्य दिनों में क्रिकेट खेलते रहते हैं।
कोरोना की खबर आयी थी तो कॉलोनी डर गयी थी।सुबह हवाखोरी करते हुए चेहरे पर मास्क लग गये थे। फिर धीरे धीरे मास्क उतर गये।कॉलोनी बोलने लगी कि सांस लेने में दिक्कत होती है।फिर रिपोर्ट आयी कि मास्क लगाने से देह में ऑक्सीजन लेबल घट जाता है।मास्क बेचारा घर में जहां तहां टंग गया।
तभी खबर आयी तबलीगी समाज की।कॉलोनी में इस पर जम कर चर्चा हुई।तबलीगी के बहाने मुसलमानों पर खूब ओछरा बोकरा गया।यह किस्सा कुछ ऐसे पेंट हुआ कि लगने लगा कि मुसलमानों ने जानबूझकर अपनी देह में कोरोना पैदा कर रहा है और हिन्दुओं के मुहल्लों में घुस कर फैला रहा है। इसके बाद सरकार को गिराने- बनाने, मंदिरों में आवाजाही, धार्मिक- अधार्मिक जमावडे की खबर आने लगी तो इस खबर पर ब्रेक लगी।
जबसे एक पदाधिकारी कोरोना से संक्रमित हुए हैं और साथ ही रात को छह अन्य कर्मचारियों की भी खबर तैर रही है, कॉलोनी स्तब्ध है।
आम, अशोक, अमलतास, गुलमोहर, बरगद, पीपल, नीम , जामुन , गुलर ,कनेर सहित सैकडों किस्म के पौधे संभव है, आपस में बात करें।सडकें जनशून्य रहेगी।लोग होकर भी नहीं होंगे।

इन तमाम एहसासों के बीच खबर आयी है कि भागलपुर में जिलाधिकारी के आदेश से 9 जुलाई से लॉक डाउन किया जायेगा.

*डॉ योगेंद्र भागलपुर स्थित तिलकामांझी यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्रोफ़ेसर हैं.


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