पटना एम्स Covid 19 का डेडिकेटेड अस्पताल बना; वैक्सीन का ट्रायल शुरू होगा; 9 हॉस्पिटल के आधे बेड कोरोना संक्रमित के लिए

Staff Report 

पटना एम्स को कोविड-19 के इलाज के लिए डेडीकेटेड अस्पताल के रूप में चिह्नित किया गया है। बिहार स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव कौशल किशोर ने बताया कि कोरोना पॉजिटिवों के इलाज के लेकर पटना एम्स के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट द्वारा स्वास्थ्य विभाग को यह प्रस्ताव दिया गया था। इसे देखते हुए विभाग ने एम्स को कोरोना पॉजिटिवों के इलाज के लिए डेडीकेटेड अस्पताल के रूप में घोषित कर दिया है।
बिहार स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोविड-19 के इलाज के लिए डेडीकेटेड अस्पताल के रूप चिह्नित होने के बाद पटना एम्स में भर्ती सामान्य मरीजों की संख्या में कमी लाने के लिए एम्स प्रशासन अपने स्तर से कार्रवाई करेगा। ताकि यहां कोरोना संक्रमित ज्यादा से ज्यादा मरीजों को भर्ती किया जा सके। आईसीएमआर ने कोरोना वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए देश के जिन 12 संस्थानों को चुना है, उसमें पटना एम्स भी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार एम्स में करीब 50 स्वस्थ लोगों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा। आईसीएमआर और भारत बायोटेक की साझेदारी से तैयार इस वैक्सीन का जानवरों पर परीक्षण अबतक पूरी तरह से सफल रहा है।

पटना एम्स के निदेशक डाॅ. पीके सिंह ने बताया कि वैक्सीन ट्रायल की लॉजिस्टिक तैयारी अंतिम चरण में है। इसलिए सोमवार को वैक्सीन का ट्रायल होगा, वहीं एम्स के अधीक्षक डाॅ. सीएम सिंह ने बताया कि उम्मीद है शनिवार को वैक्सीन ट्रायल के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। वैक्सीन ट्रायल कई दिनों तक चलेगा। मालूम हो, देश के शीर्ष संस्थानों में 13 जुलाई से कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू होगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में कोविड-19 के सैंपल की टेस्टिंग हर हाल में बढ़ाई जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को हिदायत दी कि हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। डेडिकेटेड कोविड अस्पताल, कोविड हेल्थ सेंटर और कोविड केयर सेंटर में बेड के साथ-साथ आइसोलेशन बेड की संख्या भी तत्काल बढ़ाई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आइसोलेशन वार्ड में संभावित संक्रमितों की संख्या के अनुपात में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। कोविड-19 संक्रमण से बिहार का रिकवरी रेट 71.54 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 62.42 प्रतिशत है। इस प्रकार राष्ट्रीय औसत से हमारा रिकवरी रेट 9 प्रतिशत से अधिक है। लिहाजा लोगों को कोरोना संक्रमण से डरने की जरूरत नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ हर व्यक्ति मास्क का जरूर प्रयोग करें। किसी भी परिस्थिति में बिना मास्क के बाहर नहीं निकलें।
साथ ही कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने राज्य सभी नौ सरकारी मेडिकल काॅलेज हॉस्पिटल के आधे बेड कोरोना संक्रमित के लिए आइसोलेशन वार्ड के रूप में विकसित करने निर्णय लिया है। किस मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में किन जिले के मरीजों का इलाज होगा इसका भी निर्धारण कर दिया गया है। इस तरह राज्य के कोरोना डेडिकेटेड तीन मेडिकल हॉस्पिटल के 2344 बेड के अतिरिक्त, करीब 2650 और बेड कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे।

किस मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में किन जिले के मरीजों का इलाज

मेडिकल कॉलेज अस्पताल संबद्ध जिले
पीएमसीएच- पटना, सारण, सीवान व गोपालगंज
एनएमसीएच -भोजपुर, बक्सर, वैशाली, रोहतास व कैमूर
डीएमसीएच -दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर,सुपौल व बेगूसराय
जेएलएनएमसीएच- भागलपुर, बांका, मुंगेर, खगड़िया,जमई व लखीसराय
एसकेएमसीएच- सीमामढ़ी, मुजफ्फरपुर व शिवहर
एएनएमसीएच- गया, औरंगाबाद, जहानाबाद व अरवल
वीएमआई- नालंदा,नवादा व शेखपुरा
जीएमसीएच- पूर्वी चंपारण व पश्चिम चंपारण
जेकेठीएमसीएच- सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार,किशनगंज


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