बिहार विधान सभा चुनाव कब हो, इस पर राजनीतिक दलों में उहापोह की स्थिति

Balendushekhar Mangalmurty

बिहार विधानसभा चुनाव में अगर कोई अड़चन नहीं आयी, तो नियमानुसार नवम्बर में चुनाव होंगे. पर दिन प्रतिदिन कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में पार्टियों के साथ साथ कार्यकर्ताओं और आम जनता के मन में दुविधा उत्पन्न हो रही है क्या बिहार विधान सभा के चुनाव समय पर हो पाएंगे? अगर नहीं हो पाए तो बिहार में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करनी होगी, ऐसे में बदली हुई परिस्थितियों में किस दल को ज्यादा फायदा होगा, और कौन दल नुकसान में होगा.

एनडीए के गठबंधनों की बात करें तो सबसे पहले अमित शाह ने वर्चुअल रैली करके चुनाव की तैयारियों का आगाज़ कर दिया. उस समय इस रैली का काफी विरोध हुआ. इसके लिए एल ई डी स्क्रीन लगाए गए थे, उस पर हुए खर्चों का पर सवाल उठाये गए थे. पर बाद में अन्य पार्टियों ने इसकी जरुरत समझी. और फिर जदयू ने वर्चुअल मीटिंग्स को गंभीरता से लेते हुए अपने अलग अलग प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के साथ आगामी चुनाव की तैयारियों और रणनीतियों पर चर्चा शुरू कर दिया है. जदयू के वरिष्ठ नेता आर सी पी सिंह हर रोज अलग अलग प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर रहे हैं.

बताते चलें कि पिछले विधान सभा चुनाव में कुल वोटर्स की संख्या 6,68,26,658 थी, जिसमे पुरुष वोटर्स की संख्या 3,56,46,870, महिला वोटर्स की संख्या 3,11,77,619 और थर्ड जेंडर के वोटर्स की संख्या 2,169 थी. सारे 62,779 इलेक्शन बूथों पर बिहार पुलिस के सिपाहियों की तैनाती नहीं की गयी, बल्कि इन तमाम बूथों पर अर्ध सैनिक बल के जवानों की तैनाती की गयी. चुनाव आयोग ने कुल पांच फेज में चुनाव संपन्न करवाया. कुल 56. 91 % वोटर्स ने वोट डाले. इस चुनाव में सबसे अधिक राजद को 80 सीट हासिल हुआ, जदयू को 71, भाजपा को 53, कांग्रेस को 27 सीट हासिल हुए. वहीँ लोजपा को 2, रालोसपा को २, हम को १ और सीपीआई ( एम् एल) को ३ सीट हासिल हुए.

इस बार चुनाव से पहले अलग अलग दलों के अलग अलग सुर जनता के सामने आ रहे हैं. लोजपा ने एनडीए के सहयोगी दलों पर दबाब बनाने के लिए अपना राग पकड़ लिया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सभी 243 सीटों पर काम करने को कहा है. इसके पहले प्रदेश संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष राजू तिवारी ने 94 विधानसभा की बूथ लिस्ट सौंपी. उन्होंने दावा किया कि पार्टी पूरी तरीके से इन 94 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। वे शीघ्र ही शेष बचे 149 सीटों की बूथ लिस्ट जमा करेंगे. केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि लोजपा पर अब मेरा वश नहीं चलता है. पार्टी अपने अध्यक्ष चिराग पासवान और पार्लियामेंट्री बोर्ड के अनुसार चलती है. पासवान ने साफ कहा कि पार्टी के सारे पैसले अध्यक्ष के रूप में चिराग ही लेते हैं. मैं उनके सभी निर्णय के साथ हूं. रामविलास पासवान ने अपने बयान से एनडीए घटक दलों को संदेश दे दिया है कि बिहार विधानसभा में सीटों के बंटवारे को लेकर जो भी निर्णय लिया जाना है, वह चिराग पासवान ही लेंगे.

बिहार में महागठबंधन के घटक दलों के बीच मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रही खींचतान के बीच कांग्रेस ने कहा कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले इसे स्पष्ट कर दिया जाएगा. विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव राजद की ओर से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार हैं, लेकिन महागठबंधन का चेहरा कौन होगा इसकी घोषणा उचित समय पर कर दी जाएगी. गोहिल ने महागठबंधन के घटक दलों के बीच किसी तरह के मतभेद से इनकार किया और कहा कि महागठबंधन का एकमात्र लक्ष्य नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को इस चुनाव में उखाड़ फेंकना है. इस लक्ष्य को लेकर महागठबंधन के सभी घटक दल एकजुट हैं. कांग्रेस महागठबंधन में शामिल घटक दल के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत काम करेगा.

कांग्रेस का कहना है कि चुनाव सही समय पर हो और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया जाए. कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मतदाताओं को किसी प्रकार की कोई क्षति न हो इसका भी ध्यान रखा जाए. चुनाव आयोग को इन सभी चीजों का आकलन करना ही होगा. वहीँ तेजस्वी यादव का स्वर ज्यादा उग्र है. तेजस्वी यादव ने कहा कि हम बिहार में फेक चुनाव नहीं होने देंगे. राजद परंपरागत प्रचार के बिना चुनाव में नहीं जाएगा. वे 10 सर्कुलर रोड में जिलाध्यक्षों और विधायकों-विधान पार्षदों को संबोधित करते हुए कहा- हमारे नेता लालू प्रसाद अक्टूबर तक जेल से बाहर होंगे, ऐसी पूरी उम्मीद है।
भाजपा बिहार प्रभारी सह राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव ने सभी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से कहा कि राज्य के सभी बूथों पर निरंतर जनसंपर्क चलाएं. साथ ही लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ें और इनकी जानकारी भी दें. जरूरतमंद लोगों को हर संभव मदद करें. परंतु इसमें सोशल डिस्टैंसिंग, मास्क समेत कोरोना को लेकर जारी तमाम दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करें. उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के किये गये ऐतिहासिक कार्यों और फैसलों को जन-जन तक बताएं.

बिहार में चुनाव कब हो, इस पर भी राजनीतिक दलों की अपनी राय है.

बिहार में चुनाव कब हो, इस पर भी राजनीतिक दलों की अपनी राय है. भाजपा ने यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि यह देखना चुनाव आयोग का काम है . एक तरह से भाजपा ने गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दिया है . जदयू चुनाव समय पर करवाने के पक्ष में है. इसकी वजह स्पष्ट है. अगर बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया, तो प्रशासन पर नीतीश कुमार की पकड़ ख़त्म हो जाएगी और भाजपा की केंद्र सरकार की पकड़ स्पष्ट तौर पर मजबूत हो जायेगी. और ये स्थिति भाजपा के पक्ष में जायेगी. नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस स्थिति को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेंगे और अधिक से अधिक सीट अपने हिस्से करना चाहेंगे. जदयू ऐसी स्थिति से बचना चाहेगी.

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के हालात चुनाव कराने लायक नहीं हैं. बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार यानी 7 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार चुनाव की तैयारी में जुटी है, लेकिन लाशों के ढेर पर चुनाव कराना ठीक नहीं है. राजद के पास भी अपनी वजहें हैं. कोरोना काल में राजद वर्चुअल रैली नहीं कर सकता. पार्टी के पास संसाधनों की कमी है और इसके परम्परिक वोटर्स ऑनलाइन दुनिया से जुड़े नहीं हैं. साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्तीफे से उतपन्न स्थिति और इसका असर इसके राजपूत वोटर्स पर क्या पड़ेगा, इसका आंकलन करने में भी पार्टी को समय चाहिए. ऐसे में राजद के फायदे में ये बात जाएगी अगर चुनाव फिलहाल टल जाए.
अब लोजपा भी वर्तमान परिस्थिति में चुनाव पर असहमत नजर आ रही है. चिराग पासवान का कहना है कि कोरोना के कारण आम आदमी के साथ साथ केंद्र व बिहार सरकार का आर्थिक बजट भी प्रभावित हुआ है. ऐसे में चुनाव से प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. संसदीय बोर्ड के सभी सदस्यों ने इस विषय पर चिंता जताई है. चुनाव आयोग को भी इस विषय पर सोच कर निर्णय लेना चाहिए. कहीं ऐसा ना हो कि चुनाव के कारण एक बड़ी आबादी को ख़तरे में झोंक दिया जाए. इस महामारी के बीच चुनाव होने पर पोलिंग पर्सेंटेज भी काफ़ी नीचे रह सकता है, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.

वहीँ हम प्रवक्ता दानिश रिजवान ने बताया कि उनकी पार्टी चुनाव कराने के लिए पक्ष में है. निर्वाचन आयोग जब चाहे तब चुनाव करा सकता है. उनके कार्यकर्ता चुनाव के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए और बूथों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के साथ ही मेडिकल टीम की व्यवस्था होनी चाहिए.

ऐसे में ये देखना रोचक होगा कि चुनाव आयोग बिहार विधान सभा कब करवाने का निर्णय लेता है. चुनाव के समय से दोनों गठबंधनों के घटक दलों के बार्गेनिंग पावर पर असर पड़ेगा, जिसका अच्छा ख़ासा असर चुनाव परिणाम पर भी देखने को मिलेगा.

 


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