थोड़ी फंसी फंसी आवाज वाली और हल्के बांग्ला टोन वाली अभिनेत्री राखी

नवीन शर्मा
कभी-कभी फिल्म का ये रोमांटिक गीत शायर बने अमिताभ बच्चन ने जिस हिरोइन के लिए गाया था वो राखी हैं। यह गाना मुकेश ने गाया था। यश चोपड़ा की इस खूबसूरत प्रेम कहानी की नायिका के रूप में राखी जंची थीं। वे अमिताभ की प्रेमिका और शशि कपूर की पत्नी की भूमिका बहुत सहज ढंग से निभाती हैं।

राखी को हम हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में भले शामिल ना करें लेकिन उन्हें अच्छी अदाकारा में जरूर शामिल करना होगा। मैं बहुत छोटा था तब सिनेमा हॉल में राखी की पहली फिल्म तपस्या देखी थी। उस फिल्म में उन्होंने कैसा अभिनय किया था वो मुझे याद नहीं है। मुझे मुकद्दर का सिकंदर फिल्म में उनका अभिनय याद है। थोड़ी फंसी फंसी आवाज वाली और हल्के बांग्ला टोन वाली राखी की एक्टिंग अच्छी लगी थीं। उनका अभिनय सहज लगा था।

जीवन का सफर
राखी गुलज़ार #Rakhee_Gulzar का जन्म- 15 अगस्त, 1947, राणाघाट, पश्चिम बंगाल में हुआ था। इनके बचपन का नाम ‘राखी मजूमदार’ था।राखी के जन्म के कुछ देर पहले ही भारत में आजादी की घोषणा हुई थी। उनके पिता का बांग्लादेश में जूतों का व्यापार हुआ करता था, किन्तु आजादी के बाद उन्होंने अपने व्यापार को पश्चिम बंगाल में शुरू किया। राखी ने अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा राणाघाट के गर्ल्स स्कूल से की प्राप्त की थी। उनके एक बड़े भाई शिबरंजन मजूमदार भी हैं, जो बंगाली फ़िल्मों के निर्माता हैं।

पहला विवाह अजय बिश्वास से
कम उम्र में ही राखी ने 1963 में फ़िल्म निर्देशक अजय बिश्वास से विवाह किया। अजय बिश्वास एक जाने माने पत्रकार थे। राखी की यह शादी ज्यादा समय तक नहीं चली और उनका तलाक दो साल बाद 1965 में हो गया। इसके बाद इन्होंने 15 मई, 1973 में मशहूर गीतकार गुलज़ार से विवाह कर लिया। उनसे उन्हें एक बेटी मेघना गुलज़ार हुई। राखी और गुलजार की शादी भी कुछ वर्षों तक ही चल पाई। ये दोनों भी अलग हो गए।

गुलज़ार से विवाह और अलगाव
यह कहा जाता है कि राखी ने विवाह के कुछ समय बाद पति गुलज़ार को छोड़ दिया था, जिसकी वजह राखी का गुलज़ार को बिना बताए फ़िल्म ‘कभी-कभी’ (1976) में काम करना था। गुलज़ार नहीं चाहते थे कि राखी विवाह के बाद फ़िल्मों में काम करें। इस बात से नाराज़ होकर राखी ने गुलज़ार का घर हमेशा के लिये छोड़ दिया।
हालांकि इनके अलगाव के कारणों में आंधी फिल्म की शूटिंग के दौरान हुए विवाद को भी कारण माना जाता है। नशे में धुत्त संजीव कुमार से अभिनेत्री सुचित्रा सेन को होटल के कमरे में छोड़ने जाने को लेकर गुलजार और राखी में झगड़ा हुआ था। इसके बाद से ही राखी गुलजार को छोड़ कर चली गई थीं।
हालांकि दोनों ने अब तक एक-दूसरे से तलाक तो नहीं लिया, लेकिन अलग ज़रूर रहते हैं, उस समय उनकी बेटी मेघना की उम्र महज एक वर्ष थी।
एक इंटरव्यू में राखी कहती हैं कि वे और गुलज़ार इतने सहज हैं एक-दूसरे को लेकर जितने शादीशुदा दंपत्ति भी नहीं हैं जो साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा एक-दूसरे के लिए मौजूद हैं।
राखी ने कहा, “वो आज भी मुझे अपनी पत्नी की तरह ट्रीट करते हैं। अपने घर से मुझे फोन करते हैं और कहते हैं, मैंने चार दोस्तों को डिनर पर बुलाया है और घर पर कोई खाना नहीं है. तो जल्दी से कुछ झिंगा करी भेज दो. और मैं भेजती हूं। उनकी अन्य पसंदीदा चीज़ ख़ीर है और उन्हें मेरे हाथ की बहुत पसंद है.।
राखी ने याद किया है कि अलग होने के बाद भी दोनों किस तरह मिलते हैं।उन्होंने एक किस्सा बताया, “एक बार मेरे जन्मदिन पर मैं बोस्की (मेघना) के कमरे में कुछ कर रही थी कि अचानक देखती हूं गुलज़ार मेरे पीछे खड़े हैं। मैं चौंक गई,वो बोले, चलो चलो क्या कर रहे हो? कुछ खीर खिलाओ। बाद में मुझे पता चला कि बोस्की और उन्होंने गुप्त करार किया था कि मुझे सरप्राइज़ देंगे और मुझे खुश करेंगे।

शर्मीली से शुरू किया बॉलीवुड में अभिनय का सफर

1971 में फ़िल्म ‘शर्मीली’ में राखी को पहली बार बॉलीवुड में डबल रोल करने का मिला था। इस फ़िल्म में उन्होंने शशि कपूर और धर्मेन्द्र के साथ अभिनय किया था। 1971 में ही उनकी दो फ़िल्में ‘लाल पत्थर’ और ‘पारस’ आई, जिसमें राखी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इन दोनों फ़िल्मों को खूब सफलता मिली और इन फ़िल्मों के बाद से ही राखी बॉलीवुड की मशहूर अदाकारों में शुमार हो गयीं।

राखी उन चंद अभिनेत्रियों में शुमार हैं जिन्होंने अपने हीरो की प्रेमिका के रोल के अलावा मां का रोल भी बहुत संजीदगी से निभाया है। मुकद्दर का सिकंदर फिल्म में राखी अमिताभ की प्रेमिका के रोल में थीं। बरसात की एक रात फिल्म में अमिताभ की अंधी पत्नी का रोल भी किया था। इसके बाद वे शक्ति फिल्म में अमिताभ की मां का रोल भी अच्छे ढंग से निभाया था। राम लखन’, ‘बाजीगर’, ‘करण अर्जुन’, ‘खलनायक’ आदि फिल्मों में भी वे मां की भूमिका में अच्छी लगी हैं।
1970-1974 तक राखी बॉलीवुड में आशा पारेख के बाद दूसरी सबसे अधिक फ़ीस लेने वाली अभिनेत्री बनीं।  1975-1982 के दौर में अभिनेत्री परवीन बॉबी और रीना रॉय के समय में भी उन्होंनेअपनी लोकप्रियता बनाए रखी।

अन्य फ़िल्में ”, ‘बंधन कच्चे धागों का’, ‘हीरा पन्ना’, ‘बनारसी बाबू’,।
पुरस्कार व सम्मान

पद्मश्री’ (2003), ‘ ‘राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार’ (दो बार) तथा फ़िल्मफेयर अवॉर्ड’ (तीन बार) मिले हैं।


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