हंसी हंसी पनवा खियवले बेइमनवा…भोजपुरी फिल्मों का गीत संगीत कभी मीठा और सलिल हुआ करता था

Er S D Ojha
पहली भोजपुरी फिल्म ” गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो ” 1962में रिलीज हुई थी , लेकिन भोजपुरी गीतों का इतिहास बाॅलीवुड में बहुत पुराना है । महबूब खान की तकदीर (1943) में पूर्वी के बेताज बादशाह महेंदर मिसिर की लिखी एक ठुमरी शामिल की गयी थी । ठुमरी के बोल थे – बाबू दरोगा जी कवने कसूर पर धई लिहनी सईंया मोर “। यह ठुमरी जद्दन बाई की अनुशंसा पर शामिल की गयी थी । ठुमरी चली तो भोजपुरी गीत भी हिंदी फिल्मों में गाहे ब गाहे ठुमकने लगे ।
1948 में दिलीप कुमार और कामिनी कौशल की फिल्म “नदिया के पार ” आई थी । यह फिल्म हिंदी में थी , पर इसके सारे गीत भोजपुरी में थे । उस जमाने के भोजपुरी के धुरंधर गीतकार थे मोती बी ए । फिल्म नदिया के पार के कुछेक गाने मोती बी ए ने भी लिखे थे , जिनमें से दो गीत तो बहुत हीं कर्ण प्रिय बने थे –
1) कठवा के नइया बनवले मल्हवा
2) मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार
मोती बीए के अतिरिक्त शैलेंद्र, मजरुह सुल्तानपुरी और अंजान ने भी भोजपुरी फिल्मों के लिए गीत रचे थे । लता मंगेशकर, आशा भोंसले, रफी, महेंद्र कपूर, तलत महमूद और किशोर कुमार ने भी उनके गीतों को स्वर प्रदान किया था । नदिया के पार के बाद हिंदी फिल्मों में एकाध बार भोजपुरी गीत रखने का चलन बढ़ गया था , पर किसी ने भोजपुरी में फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं दिखाई ।
भोजपुरी फिल्म बनाने की अगर किसी ने हिम्मत दिखाई तो वह थे नजीर हुसैन । नजीर हुसैन से डा राजेंद्र प्रसाद ने भोजपुरी में फिल्म बनाने को कहा था । नजीर हुसैन ने पटकथा 1950 में हीं तैयार कर ली थी , पर आर्थिक दिक्कतों व अन्यान्य कारणों से फिल्म जाकर बनी 1962 में । फिल्म का नाम रखा था ” गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो ” । फिल्म सुपर डुपर हिट रही थी । 1963 में डा राजेंद्र प्रसाद का देहावसान हो गया था । शुक्र था कि उनके जीते जी हीं यह फिल्म रिलीज हो गयी थी । डा राजेंद्र प्रसाद चैन से मरे होंगे । उनकी इच्छा पूरी हो गयी थी ।
यहाँ प्रस्तुत है कुछ भोजपुरी फिल्म और उनके प्रसिद्ध गीत-
1) गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो ( 1962 )
क) काहें बसुरिया बजवले,,,
ख ) सोनवा के पिंजरा में बंद भइली चिरई,,,,
2 ) बिदेसिया ( 1963 )
हंसी हंसी पनवा खियवले बेइमनवा,,,,
3 ) लागी नाहीं छूटे राम ( 1963 )
जा जा रे सुगना जा रे कहि दे सजनवा से ,,,,
4 ) नइहर छूटल जाई (1964)
नइहर छूटल जाई बाबुल,,,
5) हमार संसार ( 1967)
लजिया के बतिया कहलो ना जाला,,,
1967 के बाद से भोजपुरी में फिल्मों का अकाल पड़ गया । प्रोड्यूसर दर्शक न मिलने का रोना रोने लगे । मुझे बात जमी नहीं थी , क्योंकि ऊपर वर्णित सारी फिल्में हिट हुईं थीं । बहुत दिनों के बाद 1977 में दंगल फिल्म आई थी । उस दौर में मैं गोरखपुर में था । गोरखपुर के जुबली सिनेमा हाल में यह फिल्म सिल्वर जुबली हिट हुई थी । इसका एक गाना ” फूलवा के वेणी से जूड़ा सजाय के ” मुझे आज भी याद है । इसके बाद 1979 में बलम परदेसिया आई । यह फिल्म भी हिट हुई । इसका एक गाना ” गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा,,,,” बहुत हीं लोकप्रिय हुआ था ।
1980 के बाद से भोजपुरी फिल्मों की बाढ़ सी आ गयी थी । कितनी फिल्मों का जमावड़ा हुआ ? कितने गीत गाए गये ? इनका लेखा जोखा मेरे पास नहीं है । हाँ, 2005 में मनोज तिवारी की एक फिल्म आई थी, जिसने अब तक के सारे रिकार्ड ध्वस्त कर दिए थे । फिल्म का नाम था ” ससुरा बड़ा पइसा वाला ” । इस फिल्म ने 15 -20 करोड़ का कारोबार किया था । लेकिन इस फिल्म के बाद से भोजपुरी फिल्मों में द्विअर्थी संवाद और अश्लील गीतों का बड़ी बेशर्मी से समावेश कर लिया गया । इस फिल्म में मनोज तिवारी ने गाया था – लड़की हिय हाई बोल्टेज वाली “। गोया, लड़की लड़की न होकर करंट मारने वाली मशीन हो गयी । उसी तरह से निरहुआ की फिल्म 2014 में आई थी – निरहुआ हिंदुस्तानी । इस फिल्म ने ससुरा बड़ा पइसा वाला को काफी पीछे छोड़ दिया । फिल्म ब्लाॅक बस्टर हिट हुई थी । लेकिन निरहुआ ने भी बकलोली कर दी । उसने भी एक अश्लील गीत गा दिया था – ओठललिया चीखे द ,,,।
जब से भोजपुरी फिल्मों में गुड्डु रंगीला, मनोज तिवारी, निरहुआ, पवन सिंह और खेसारी लाल यादव सरीखे महानुभावों का आगमन हुआ है तब से भोजपुरी फिल्मों से मेलोडी गायब हो गयी है । इसमें अश्लील गीतों की भरमार हो गयी है । कभी सुप्रसिद्ध भाषाविद् सुनीति कुमार चटर्जी ने भोजपुरी को सुमधुर भाषा का तमगा दिया था । उनका कहना था कि मुंह में रसगुल्ला लेकर होठों को गोल कर जो भी बोलेगे वह या तो भोजपुरी होगी या बांगला । आज इसी भोजपुरी भाषा के चांद जैसे चेहरे पर अश्लील गीतों का बदनुमा दाग लग गया है ।
अंत में फिल्म देसवा ( 2011) के एक सुंदर गीत से आपको रूबरु करवाता हूँ जो यू ट्यूब पर मौजूद है । इसे गाया है सोनू निगम ने । इस गीत को सुनकर आपको क्वार के घाम में ठंडी बयार की अनुभूति होगी । फिलहाल इस गीत का केवल पहला स्टैंजा हीं लिख रहा हूँ-
भोरे सबेरे मन बेदर्दी बुझि गईल ई बात बा
आंखी में परदा दिल में भरम बा
सुतल पनियों में आग बा
काहें चनरमा में दाग बा
काहें चनरमा में दाग बा

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