बॉलीवुड के अनजाने तथ्य: जब किशोर कुमार ने राजकपूर के लिए पार्श्व गायन किया

Ashok Singh

बॉलीवुड में पार्श्व गायन की शुरुआत टेक्नोलॉजी के सुधार के साथ हुई. भारत की पहली फिल्म “राजा हरिश्चंद्र” (1913) मूक फिल्म थी. जाहिर है इसमें गाने के लिए कोई स्कोप नहीं था. उस समय फिल्मों के दृश्य को समझाने के लिए लोग हुआ करते थे जो दर्शकों को फिल्म के दृश्य की बारे में बताया करते थे. फिर ‘आलमआरा’ (1931) के साथ आवाज के साथ फ़िल्में बनने लगीं. ‘दे दे खुदा के नाम पर’ हिंदी सिनेमा का पहला गाना था, जिसे W M Khan ने गाया था. उस दौर में जब अभिनेता और अभिनेत्री अपने गाने खुद ही गाया करते थे तो ऐसे अभिनेताओं और अभिनेत्रियों का स्वर्ण युग आया जिनकी आवाज सुरीली थी. इस दौर के सुपर स्टार थे के एल सहगल, नूरजहां, खुर्शीद, सुरैया. 40 के दशक के अंतिम वर्षों से साउंड रिकॉर्डिंग की तकनीक में सुधार होने के चलते पार्श्व गायन का सिलसिला चल पड़ा और फिर के एल सहगल के देहांत के बाद तलत, मन्ना डे, रफ़ी, किशोर, लता, मुकेश, गीता दत्त, आशा भोंसले आदि गायक उभरे, जिन्होंने शुरूआती दौर में अभिनय के क्षेत्र में हाथ आजमाने के बाद अपने आप को पार्श्व गायन के क्षेत्र में बतौर विशेषज्ञ स्थापित कर लिया. और फिर ये गायक खास अभिनेताओं की आवाज बनकर उभरे. ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार के लिए पहले तलत महमूद और फिर बाद में रफ़ी, वहीँ देव आनंद के लिए पहले हेमंत कुमार, फिर रफ़ी और अंत में किशोर; तो राज कपूर की आवाज बने मुकेश. हालाँकि सुर ताल के लिहाज से कठिन गानों को राजकपूर के लिए मन्ना डे ने भी अपनी आवाज दी.

आम दर्शकों और श्रोताओं के मन में राजकपूर की आवाज के रूप में मुकेश जमे हुए हैं. ये लगभग अनजाना तथ्य है कि उन्ही राजकपूर के लिए किशोर कुमार ने भी अपनी आवाज दी है.
1950 में ‘प्यार’ नाम की राजकपूर की एक फिल्म बनी थी विडियो नहीं मिल रही है। यहां तक उसके मशहूर गानों की भी विडियो नहीं मिल रही है।
इस फिल्म में संगीतकार सचिनदेव बर्मन थे और गीतकार राजेंद्रकृष्ण। इसमें पांच गाने किशोर कुमार ने गाये थे। उनके साथ युगलबंदी गीता दत्त और शमशाद बेगम ने की थी। किशोर दा अपने छैल छबिले अंदाज के लिये मशहूर रहे और यहीं से किशोर दा और राज साहब की दोस्ती परवान चढी। राज साहब किशोर दा को हमेशा छैला बाबू ही कहते थे।

इस फिल्म का गाना जो मैंने सुना है
१) कच्ची पक्की सड़कों पे मेरी टमटम
चली जाये चली जाये छम छम
२) एक हम और दूसरे तुम तीसरा कोई नहीं
युं कहो हम एक है दूसरा कोई नहीं

विमल राय ने एक फिल्म बनायी थी ‘नौकरी’ (1954). इस  फिल्म में किशोर कुमार मुख्य किरदार में है। संगीतकार सलिल चौधरी थे। इफ्तिख़ार किशोर दा के बेहद करीबी मित्र थे और वास्तव में वह गायक ही बनने आये थे। जब किशोर दा को पता चला की उनके साथ और दो कलाकारों पर भी एक गाना फिल्माया जायेगा तो वह सलिल दा से जाकर मिले और कहा, इफ्तिख़ार भी गायक ही बनने आया था। आप हमें धुन बता दिजिये, मैं इफ्तिख़ार को धुन सीखा कर रियाज करा दुंगा। यदि आपको पसंद नहीं आयेगी तो फिर किसी और से पार्श्वगायन करा लेंगे। सलिल दा तैयार हो गये। इफ्तिख़ार की गायकी पसंद आ गयी. और फिर फिल्म में इफ्तिखार का गाया गाना रह गया. वो गाना था, ” एक छोटी सी नौकरी का तलबगार हूँ मैं”


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