विविध भारती ‘देश की सुरीली धड़कन’

नवीन शर्मा
“ये है विविध भारती”  ये प्यारी सी आवाज लंबे समय तक मेरी ही तरह करोड़ों देशवासियों के जीवन का अहम हिस्सा रही है। हिंदी फिल्मों के मधुर गीतों को देश के शहरों, कस्बों और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों संगीत प्रेमियों तक पहुंचाने में जिस एक माध्यम ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वो है आकाशवाणी की विविध भारती सेवा।

मेरा फिल्मी गीतों के प्रति प्रेम विविध भारती की वजह से ही पनपा और धीरे-धीरे बढ़ता ही रहा। हाई स्कूल और कॉलेज के दिनों में तो ये स्थिति थी कि पढ़ने भी बैठता था तो धीमी आवाज में रेडियो बजता रहता था। मां कई बार टोकती भी थीं कि तुम पढ़ रहे हो या गाना सुन रहे हो? मैं कहता गाना सुनते हुए पढ़ रहा हूँ। रेडियो बजाते हुए पढ़ाई करने का एक लाभ ये भी होता था कि अगल बगल से आने वाली आवाजें खलल नहीं डालती थीं।

3 अक्टूबर 1957 को हुई थी स्थापना

हमारा यह हमसफर 63 बरस का हो चुका है। विविध भारती की शुरुआत उस दौर में हुई जब देश में रेडियाे सीलोन (श्रीलंका की रेडियाे प्रसारण सेवा) का बोलबाला था।एक लेख में विविध भारती के उद्घोषक यूनुस खान लिखते हैं, ‘उस जमाने में भारत सरकार ने आकाशवाणी पर फिल्मी गाने-बजाने पर रोक लगा रखी थी।तब मान लिया गया था कि फिल्मी गाने सुनकर लोग बिगड़ जाते हैं। इसलिए केवल सुगम-संगीत पर आधारित गीत ही रेडियो पर बजाए जाते थे। लेकिन उसी दौर में रेडियो सीलोन नए फिल्मी गीतों के जरिए लोगों के बीच पैठ बना रहा था। कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए उसका सहारा ले रही थीं। यानी देश का पैसा बाहर जा रहा था। लिहाज़ा इसे रोकने के लिए सरकार के स्तर पर ऐसे रेडियो चैनल की ज़रूरत महसूस गई जो रेडियो सीलोन का मुकाबला कर सके।

कवि पंडित नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुई सेवा

इसकी ज़िम्मेदारी कवि पंडित नरेंद्र शर्मा को दी गई और उन्होंने ‘विविध भारती’ की परिकल्पना की। फिर केशव पांडे, गोपालदास, गिरिजा कुमार माथुर जैसी साहित्य और रेडियो प्रसारण की कद्दावर हस्तियों के साथ मिलकर इसकी नींव रखी. यह 3 अक्टूबर 1957 की तारीख़ थी। उस दिन विविध-भारती का आगाज शील कुमार शर्मा की आवाज में हुआ था। उन्होंने कहा था, ‘यह विविध-भारती है, आकाशवाणी का पंचरंगी कार्यक्रम’ पंचरंगी यानी पांच ललित कलाओं- गीत, संगीत, नृत्य, नाट्य और चित्र का समावेश। सबसे पहले ‘नाच रे मयूरा’ गाना विविध भारती पर बजा था। इसे पंडित नरेंद्र शर्मा ने ही लिखा था. अनिल विश्वास का संगीत था और मन्ना डे की आवाज़।

इसके बाद तो देश की इस सुरीली धड़कन ने ऐसे सुर (हिट कार्यक्रम) बुलंद किए कि रेडियो सीलोन का कोई नामलेवा तक नहीं रहा इनमें अमीन सायानी की आवाज में ‘बिनाका गीतमाला’ का तो कहना ही क्या. आज विविध भारती के वर्षगांठ पर नज़र डालते हैं उसकी सरगम के सात सुरों पर.

1. बिनाका गीतमाला
इसे विविध भारती का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम कहें तो ग़लत नहीं होगा। पहले यह रेडियो सीलोन पर आता था पर 1989 के बाद से विविध भारती पर आने लगा। इस कार्यक्रम की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके प्रस्तोता अमीन सायानी को आज भी लोग याद करते हैंह हिंदी फिल्मों के शीर्ष-10 गानों का काउंटडाउन होता था इसमें और सायानी अपनी लरज़दार आवाज़ में पूरा लुत्फ लेकर बताते थे कि कौन सा गाना कितने ‘पायदान’ की छलांग लगाकर कहां से कहां पहुंचा. हर बुधवार रात आठ से नौ बजे प्रसारित होता था और कहते हैं सुनने वालों के बीच इस पर शर्तें लगा करती थीं कि आज बिनाका गीतमाला में फलां गाना पहले नंबर पर होगा.

2. जयमाला

भारतीय रेडियो के इतिहास में शायद इकलौता कार्यक्रम जो फौजी भाइयों के लिए समर्पित था।समय- रोज़ शाम सात बजकर पांच मिनट। इस कार्यक्रम में फौजी भाइयों की फरमाइश पर न जाने कितनी मशहूर हस्तियों ने उनके लिए गाने बजाए. मसलन- प्राण, अमरीश पुरी, गुलज़ार, अमिताभ बच्चन, अमाेल पालेकर, एसडी बर्मन, आरडी बर्मन, मीना कुमारी और भी न जाने कितने नाम। इन्होंने न सिर्फ गाने बजाए बल्कि अपने मन की बात भी फौजी भाइयों के साथ साझा की। वैसे तो ये कार्यक्रम विशेष रूप से से फौजी भाइयों के लिए था पर आम श्रोता भी इसका भरपूर आनंद लिया करते थे।

3. छायागीत

यह कार्यक्रम रात 10 बजे प्रसारित होता है। कमल शर्मा जैसे नामचीन रेडियो प्रस्तोता इसे पेश करते थे। शायराना अंदाज़ में लोकप्रिय फिल्मी गीतों की महफिल सजती थी चांद की चांदनी में रूमानियत भरते हुए। कमल शर्मा की दिलकश आवाज और गीतों के बारे में उनकी गहरी समझ और लाजवाब पेशकश की वजह से यह कार्यक्रम मुझे सबसे ज्यादा पसंद आता था।

4. हवा-महल

कहानियों को नाट्य रूप में पेश किया करता हुआ कार्यक्रम। अक्सर हास्य-विनोद में लपटी हुई कहानियां. यह कार्यक्रम रात को आठ बजे आता है। इसमें अमरीश पुरी, ओम पुरी असरानी जैसे बड़े-बड़े कलाकारों ने भी काम किया है।

5. संगीत-सरिता
यह कार्यक्रम सुबह साढ़े-सात बजे प्रसारित होता है। संगीत की समग्रता में दिलचस्पी है तो यह कार्यक्रम एकदम मुफीद। शास्त्रीय संगीत के विभिन्न रागों की मूलभूत जानकारी के साथ ही उन पर आधारित फिल्मी गीत भी सुनवाए जाते हैं और वह भी संगीत के किसी अच्छे कलाकार के बारास्ते।

6. आज के फनकार

यह कार्यक्रम सुबह 9.30 बजे आता है। किसी एक मशहूर गायक, गीतकार, संगीतकार को केंद्र में रखकर उसकी रचनाएं, उसकी बातें पेश की जाती हैं। यह कार्यक्रम भी मेरे सबसे पसंदीदा कार्यक्रमों में शामिल है। इसके माध्यम से किसी एक कलाकार तथा उसके काम को अच्छे ढंग से समझने में मदद मिलती है।

7. सखी-सहेली
दोपहर बाद तीन बजे घर के कामों से फुर्सत होकर घरेलू महिलाएं दशकों से इस कार्यक्रम के साथ हमकदम हाे लेती हैं। इसकी प्रस्तोता ममता सिंह शुरू से ही इसके साथ जुड़ी हुई हैं जो आज घर-घर में पहचानी जाती हैं। इस कार्यक्रम में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते हुए उनकी पसंद के नगमे सुनवाए जाते हैं।

‘पिटारा’ भी, जिसमें काफी कुछ है

जैसा नाम वैसी ही कार्यक्रम । यह मस्ती, मनोरंजन और जानकारी का पूरा पैकेज है। इसमें रोज़ अलग-अलग कार्यक्रम पेश किए जाते हैं। कभी ‘हेल्लो फरमाइश’ (फोन कॉल के ज़रिए गानों की फरमाइश) तो कभी ‘सेल्‍युलाइड के सितारे’ (फिल्म कलाकारों से मुलाकात). कभी ‘सरगम के सितारे’ (संगीत के दुनिया के दिग्गजों से बातचीत) तो कभी सेहत से जुड़ा ‘सेहतनामा’.।

102.8 एफएम विविध भारती

बदलते वक़्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए विविध भारती ने भी अपना रूप भी बदला है। दूसरे तमाम एफएम चैनलों की तरह विविध भारती मोबाइल-इंटरनेट पर उपलब्ध है। 102.8 एफएम विविध भारती का आधुनिक चेहरा है। संभव है सुनने वालों की तादाद में कुछ कमी आई हो लेकिन उसके चाहने वालों की कमी नहीं हुई है। अहमियत कम नहीं हुई है। भारत रत्न लता मंगेशकर ने एक बार कहा था, ‘अगर विविध भारती न होता तो हम मंगेशकर बहनों (लता, आशा, उषा) की आवाज़ देश के कोने-कोने तक न पहुंचती.’ सच ही तो है. इसीलिए तो विविध भारती ‘देश की सुरीली धड़कन’ है जो हर दिल में धक-धक करती है।


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