बॉबी हत्याकांड जिसकी जद में बिहार के कई शीर्ष राजनेता आये थे, पर सीबीआई जिसकी गुत्थी सुलझा न सकी

Balendushekhar Mangalmurty

उसका असली नाम था श्वेता निशा त्रिवेदी. लोग उसे बॉबी के नाम से पुकारते थे. बाॅबी बिहार विधान परिषद की सभापति और कांग्रेस नेता राजेश्वरी सरोज दास की गोद ली हुई बेटी थी. हत्या सभापति के पटना स्थित सरकारी आवास में ही हुई. मामले को छुपाने के लिए हड़बड़ी में लाश को कब्र खोदकर दफना दिया गया. जल्दीबाजी में दो डाक्टरों से निधन के कारणों से संबंधित जाली सर्टिफिकेट ले लिये गये. एक डाक्टर ने लिखा कि आंतरिक रक्त स्त्राव से बाॅबी की मौत हुई. दूसरे ने लिखा कि अचानक हृदय गति रुक जाने से मृत्यु हुई. इस रहस्यमय हत्या के बारे में ‘आज’ और ‘प्रदीप’ अखबार में खबरें छपने के बाद तत्कालीन एसएसपी किशोर कुणाल ने कब्र से लाश निकलवायी. शव का फिर से पोस्टमार्टम हुआ. विसरा में मेलेथियन जहर पाया गया.

सभापति के आवास में रहने वाले दो युवकों को पकड़कर पुलिस ने जल्दी ही पूरे केस का खुलासा कर दिया. खुद राजेश्वरी सरोज दास ने 28 मई 1983 को अदालत में दिए गए अपने बयान में कहा कि बाॅबी को कब और किसने जहर दिया था.

विधान परिषद की सभापति और कांग्रेस नेता राजेश्वरी सरोज दास

हत्याकांड तथा बाॅबी से जुड़े अन्य तरह के अपराधों के तहत प्रत्यक्ष और परोक्ष ढंग से छोटे-बड़े कांग्रेस के कई नेता शामिल पाये गये थे. जिससे तब की सत्ता और राजनीति में भूचाल आ गया. उन नेताओं की गिरफ्तारी होने ही वाली थी कि करीब सौ कांग्रेस विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र का घेराव कर के उनसे कहा कि, ‘आप जल्द केस को सीबीआई को सौंपिए नहीं तो आपकी सरकार गिरा दी जाएगी.’

राज्य सरकार ने 25 मई 1983 को इस केस की जांच का भार सीबीआई को सौंप दिया. सीबीआई पर भी हाई लेवल दबाव पड़ा और आखिर में केस रफा-दफा हो गया. सत्ताधारी नेताओं को बचाने की हड़बड़ी में सीबीआई ने बेसिर पैर की कहानी गढ़कर कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट के तौर पर लगा दी. हत्या को आत्महत्या का रूप दे दिया गया.

उससे पहले इस केस के अनुसंधान के सिलसिले में सीबीआई की टीम ने कभी पटना पुलिस से संपर्क नहीं किया. सीबीआई ने अपने आॅफिस में बैठे-बैठे ही फाइनल रिपोर्ट तैयार कर दी. सीबीआई ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में लिखा कि बाॅबी ने सेंसिबल टेबलेट खाकर आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके प्रेमी ने उसे धोखा दिया था. सीबीआई ने यह भी लिखा कि अस्पताल के रास्ते में बाॅबी को दस्त हो रहा था.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या विसरा जांच रिपोर्ट में कहीं भी सेंसिबल टेबलेट का नामोनिशान नहीं मिला था बल्कि मेलेथियन का अंश पाया गया. सीबीआई ने कहा कि पटना फारेंसिक लेबोरेटरी में रखे किसी अन्य के विसरा का मेलेथियन बाॅबी के वेसरा में मिल गया होगा.

दूसरी ओर पटना फोरेंसिक लेबोरेट्री के अफसर ने लिख कर दिया कि सीबीआई को हमारे यहां से किसी ने ऐसी कोई बात नहीं कही. यहां ऐसी लापरवाही नहीं बरती जाती कि एक-दूसरे का विसरा आपस में मिल जाए.

सीबीआई ने पत्र को आधार बनाया

बाॅबी की आत्महत्या की कहानी को सही साबित करने के लिए सीबीआई ने एक ऐसे पत्र को आधार बनाया जिसका अस्तित्व ही नहीं था.

सीबीआई के अनुसार बाॅबी ने 6 मई 1983 की रात में अपने प्रेमी रतन जगवानी के नाम यह पत्र लिखा कि, ‘मैंने आत्महत्या के लिए जहर खा लिया है. सीबीआई के अनुसार रतन बाॅबी से शादी करने के लिए तैयार नहीं था. बाॅबी ने यह पत्र निर्भय को इसलिए दिया कि वह इसे जगवानी को दे दे. निर्भय ने दूसरे दिन यह कथित पत्र रतन को दे दिया, जिसे पढ़ने के बाद रतन ने निर्भय को वापस लौटा दिया.


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