बिहार विधानसभा चुनाव 2020: नारी सशक्तिकरण अभी दूर की कौड़ी

Balendushekhar Mangalmurty

राजनीति सशक्तिकरण का बहुत प्रभावशाली मार्ग है, और बिहार जैसे सामंती समाज में राजनीति महिलाओं के राजनीति की मुख्य धारा में हिस्सा बनने से व्यापक परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है. बिहार में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिला, जिसका अनुकरण देश के अन्य राज्यों ने किया. पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी का स्वप्न जैसा ही लगता है. काफी महिलाएं इस बार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही हैं, पर अगर एक नज़र उनके प्रोफाइल पर डाल दिया जाए, तो महिला सशक्तिकरण दूर की कौड़ी लगता है. राजनीतिक तौर पर दबंग परिवारों की महिलाओं, या बाहुबलियों की बीबियां मैदान में नज़र आती हैं. साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाएं एक्का दुक्का हैं. वंशवाद पनप रहा है, प्रजातंत्र वंशवाद की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है, जहाँ सत्ता कुछेक परिवारों के बीच सिमटता जा रहा है. इसका बिहार के समाज पर व्यापक प्रभाव होगा, प्रजातंत्र राजतंत्र की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है.

भाजपा की अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध शूटर श्रेयसी सिंह बांका के कद्दावर नेता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की बेटी हैं, तो महुआ सीट पर जदयू उम्मीदवार आस्मां परवीन राजद नेता व अलकतरा घोटाला में आरोपित रहे इलियास हुसैन की बेटी हैं. सारण जिले के एकमा विस सीट से जदयू ने सीता देवी को अपना उम्मीदवार बनाया है. सीता देवी के पति मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह हैं. धूमल सिंह के खिलाफ कई मामले दर्ज रहे हैं. इस बार पार्टी ने उनकी जगह सीता देवी को उम्मीदवार बनाया है. राजद ने दुष्कर्म के एक मामले में जेल में बंद राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को उम्मीदवार बनाया है. इसी प्रकार जदयू ने स्व बिंदी यादव की पत्नी मनोरमा देवी को अतरी विस सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. मनोरमा देवी एमएलसी भी रह चुकी हैं. उनके पति बिंदी यादव का हाल ही में कोरोना के कारण निधन हो गया है. जबकि, बेटा राॅकी यादव आपराधिक मामले में चर्चित रहा है. राजद ने संदेश विस सीट से मौजूदा विधायक अरुण यादव की पत्नी किरण देवी को उम्मीदवार बनाया है. इसी प्रकार पूर्व सांसद लवली अानंद सहरसा से राजद की उम्मीदवार हैं. उनके पति आनंद मोहन गोपालगंज के पूर्व डीएम हत्याकांड में जेल में बंद हैं.

राजद ने पूर्व सांसद शाहबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को रघुनाथपुर की सीट पर उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया था. लेकिन, हिना शहाब ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया. अब राजद वहां किसी दूसरे उम्मीदवार की तलाश में है. इसी प्रकार राजद उम्मीदवार अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने निर्दलीय तौर पर पटना जिले की मोकामा सीट से नामांकन का पर्चा दाखिल किया था. लेकिन, उन्होंने नाम वापस ले लिया है. नीलम देवी लोस चुनाव-2019 में मुंगेर संसदीय सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार रही थीं. शाहपुर विस क्षेत्र से स्व विशेश्वर ओझा की विधवा भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं.

खगड़िया से मौजूदा विधायक पूनम देवी यादव भी जदयू की टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. उनके पति रणवीर यादव जेल में बंद हैं. पूर्णिया जिले की रूपौली सीट पर बीमा भारती उम्मीदवार हैं. धमदाहा की सीट पर लेसी सिंह जदयू की टिकट पर वोट मांग रही हैं. कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव भी गोविंद पुर विस सीट से चुनाव में उम्मीदवार हैं. समाज कल्याण विभाग की पूर्व मंत्री कुमारी मंजू वर्मा को चेरिया बरियारपुर से दोबारा उम्मीदवार बनाया है. मंजू वर्मा के पति मुज़फ्फरपुर बालिका गृह सेक्स काण्ड के प्रमुख आरोपियों में रहे हैं.

दुर्भाग्य है बिहार का, जहाँ बलात्कारियों की पत्नियों को दलों के सर्वेसर्वा टिकट दे देते हैं. स्वच्छ राजनीति, बिहार का विकास ऐसे में हवाई किला ही लगता है.

जनता दल यू ने पूर्व मंत्री कुमारी मंजू वर्मा समेत कुल 22 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने पहले और दूसरे चरण में सात महिलाओं को टिकट दिया है. कांग्रेस की पहली सूची ही सार्वजनिक हुई है, जिसमें एकमात्र हिसुआ से नीतू कुमार को प्रत्याशी घोषित किया है. भाकपा-माले ने दीघा से अपनी नेत्री शशि यादव को उम्मीदवार बनाया है. जबकि, राजद ने 17 महिलाओं को अब तक सिंबल बांटे हैं.


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