एक बार फिर राघोपुर विधानसभा से अपनी किस्मत आजमाएंगे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव

Balendushekhar Mangalmurty

जहाँ तेज प्रताप यादव महुआ विधान सभा से हसनपुर विधानसभा चले गए हैं, वहीँ बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव एक बार फिर राघोपुर सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगे. वैशाली जिले में स्थित राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में राघोपुर और बिदुपुर प्रखंड आते हैं. यादव बहुल राघोपुर विधानसभा क्षेत्र राजद का पारम्परिक गढ़ रहा है, जहाँ से तेजस्वी के माता पिता दोनों चुनाव जीत चुके हैं. तेजस्वी ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत यहीं से की थी, जब उन्होंने 2015 में भाजपा प्रत्याशी सतीश कुमार को हराया था. इसके बाद वे बिहार के उप मुख्यमंत्री बने थे.

2017 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया और भाजपा के साथ चले गए. उसके बाद तेजस्वी ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी संभाली. सत्ता गंवाने के बाद विधानसभा में नीतीश कुमार के खिलाफ तेजस्वी के जोरदार भाषण ने उन्हें एक मजबूत नेता के तौर पर बिहार में पहचान दिलाई. वे शासन के विभिन्न मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरते रहे. कई अवसर पर बिहार की राजनीति के चाणक्य और अनुभवी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के प्रहार के आगे असहज नज़र आये. फिलहाल ये पहला विधानसभा चुनाव है, जब लालू यादव जेल में हैं, और राजद के अनुभवी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह का भी साथ नहीं है, ऐसे में तेजस्वी की राह आसान नहीं है. महागठबंधन के वे मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं, हालाँकि उन्हें राजद को साथ लेकर चलने में रह रहकर दिक्कत आती रही है, पर पिछले तीन सालों में, बतौर नेता प्रतिपक्ष उन्हें राजनीतिक समझ गहरी हुई है और लगातार संघर्ष से वे निखरे हैं, हालाँकि उनमें लालू यादव की तरह करिश्माई भाषण देने की कला नहीं है, और वे अपने पिता की तरह जनता से जुड़ नहीं पाते, पर उनका संघर्ष उनके काम आ रहा है.

राघोपुर सीट 90 की दशक से लालू परिवार का गढ़ रहा है. राघोपुर विधानसभा पहली बार 1995 में तब चर्चा में आया जब यहां से तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव इस सीट से चुनाव लड़े. 1980 से 1995 तक इस सीट से विधायक रहे भोला राय ने ये सीट लालू यादव के लिए छोड़ दी थी. 1995-2000 में यहां लालू यादव खुद जीते और 2005 में राबड़ी देवी भी यहीं से विधायक बनीं लेकिन 2010 में वो इसी सीट से जेडीयू के उम्मीदवार सतीश कुमार से हार गईं. हालांकि 2015 में तेजश्वी ने यहां से जीत हासिल कर फिर से आरजेडी का परचम लहरा दिया.

2015 में तेजश्वी ने अपने निकटम प्रतिद्वंदी बीजेपी के सतीश कुमार को 91236 वोटों हराया था. सतीश कुमार जदयू से भाजपा में चले गए थे, जब ये सीट राजद के खाते में डाल दी गयी. बीजेपी-जेडीयू के बीच तालमेल में यह सीट भाजपा के खाते में गई है. एक बार फिर सतीश कुमार और तेजस्वी आमने सामने हैं.  इस बार राजनीतिक परिस्थिति बदली हुई है, पर तेजस्वी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हैं.
आज तेजस्वी यादव ने वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के अनुमंडल कार्यालय में नामांकन दाखिल किया. इस अवसर पर पार्टी अध्यक्ष जगदानंद सिंह समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता उपस्थित थे. तेजस्वी यादव ने कहा कि मैंने सौगंध ली है कि बिहार के हित में सदा कार्य करता रहूँगा। हर बिहारवासी को जब तक उनका हर अधिकार नहीं दिला देता, चैन से बैठने वाला नहीं हूँ। इस सौगंध को पूरा करने के क्रम में आज नामांकन करने जा रहा हूँ। परिवर्तन के इस शंखनाद में आपके स्नेह, समर्थन और आशीर्वाद का आकांक्षी हूँ.

बताते चलें तेजस्वी ने 2009 में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी. वे आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम का हिस्सा रह चुके हैं. तेजस्वी की पढ़ाई को लेकर विरोधी उनपर तंज कसते रहते है. वो महज 9वीं तक पढ़े हैं लेकिन परिवार से राजनीति का ककहरा पढ़े तेजस्वी एक मंझे राजनीतिज्ञ की तरह उभरे हैं.

राघोपुर सीट में दूसरे फेज में 3 नवम्बर को वोटिंग होनी है. देखना है इस बार ऊंट किस करवट बैठता है !!


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