तेज प्रताप यादव ने क्यों महुआ को छोड़कर हसनपुर से चुनाव लड़ने का मन बनाया?

बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति

तेज प्रताप यादव एक बार फिर चर्चा में हैं. पर कोई ताजा घरेलु विवाद या कोई राजनीतिक बयान इसकी वजह नहीं है, बल्कि अपनी सीट महुआ विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर हसनपुर से नॉमिनेशन दाखिल करने की वजह से. बिहार में कुछ ऐसे नेता रहे हैं, जिनकी पहचान किसी ख़ास विधानसभा या लोकसभा सीट से रही है. दिग्गज नेता जैसे जगजीवन राम, रामबिलास पासवान ने अपने क्षेत्र को पोषित किया, नतीजा कोई भी गठबंधन आये, कोई भी सरकार आये, उनके क्षेत्र ने उन्हें लोकसभा, विधानसभा में भेजना जारी रखा. पर तेज प्रताप इस परंपरा में नहीं आते. बदली राजनीतिक बयार में उन्होंने अपने लिए दूसरा, अपेक्षाकृत सुरक्षित सीट तलाशना बेहतर समझा.

हाजीपुर लोक सभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले महुआ विधानसभा सीट में महुआ और चेहरा कला ब्लॉक आते हैं.
यादव और मुस्लिम बहुल महुआ विधान सभा क्षेत्र में दसई चौधरी कद्दावर नेता रहे हैं. 1980 में जनता पार्टी, फिर 1985 में लोकदल और 1990 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए दसई चौधरी 2000 में राजद के टिकट पर भी विधायक रह चुके हैं. 2005 में यह सीट राजद के शिवचंद राम को गयी. 2010 में यह सीट राजद के हाथ से फिसल कर जदयू के पाले में चली गयी, लेकिन विधायक यादव ही रहे, रविंद्र राय यादव. 2015 में तेज प्रताप यादव यहाँ से विधायक बने. राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन के चलते महुआ विधानसभा सीट तेज प्रताप यादव के लिए अभेद्य किला बन गया.

लेकिन 2020 में स्थिति बदली हुई है. इस बार राजद और जदयू अलग अलग खेमे में हैं. इस बार महागठबंधन में कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ राजद खड़ा है, तो जदयू भाजपा के साथ जुगलबंदी कर रहा है. जदयू ने राजद के पारम्परिक वोट में सेंध लगाने के लिए राजद के पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन की बेटी आस्मा परवीन को अपना प्रत्याशी बनाया है. माना जा रहा है राजद के पारम्परिक वोट बैंक माय ( मुस्लिम और यादव) में सेंध लगाने के जदयू के प्रयास में जिसमे भाजपा का अपना वोट बैंक भी साथ है, ने तेज प्रताप यादव के मन में संशय पैदा कर दिया है. आस्मा पेशे से डॉक्टर हैं और कई वर्षों से राजद में सक्रिय थीं। किंतु बाद में उन्होंने जदयू का दामन थाम लिया.

तेज प्रताप यादव के लिए इससे पहले फतुहा सीट की भी बात चल रही थी. पर नामांकन के साथ सारी संभावनाओं, आशंकाओं पर विराम लग गया है. अब वे हसनपुर से राजद के उम्मीदवार हैं. समस्तीपुर लोक सभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाली हसनपुर विधानसभा सीट यादव बाहुल्य सीट मानी जाती है. साथ ही यहां पर कुशवाहा वोटर्स की संख्या काफी अच्छी है. अगर हसनपुर सीट का इतिहास देखा जाए तो तो इस सीट पर 1967 के बाद से हमेशा यादव समाज का ही झंडा बुलंद रहा है. 2010 में परिसीमन के बाद इस सीट पर लगातार दो बार से जदयू का कब्जा है. इस सीट से जदयू के राजकुमार राय दो बार जीते हैं, राज कुमार राय भी यादव जाति से ही आते हैं. हसनपुर में बिहार विधानसभा के दूसरे चरण में मतदान तीन नवंबर को होना है.

हसनपुर सीट पर वोटरों की कुल संख्या 2 लाख 40 हजार 948 है. इसमें यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है. यही कारण है कि तेज प्रताप यादव अपने लिए इसे सुरक्षित सीट मान रहे हैं और यहां से किस्मत अजमा रहे हैं. तेज प्रताप का मुकाबल जेडीयू प्रत्याशी राजकुमार राय से है, जो 2010 से ही यहां से विधायक हैं.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.