बिहार विधानसभा चुनाव 2020: एक सीट जिस पर सबकी रहेगी नज़र

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जिस हॉट सीट पर सबकी नज़र है वो है बांकीपुर विधानसभा सीट. भाजपा का गढ़ माने जाने वाले इस सीट पर पिछले तीन चुनावों से नितिन नवीन जीतते आ रहे हैं. इनसे पहले इस सीट से इनके पिता नवीन कुमार सिन्हा विधायक थे. इस सीट पर पूर्व भाजपा नेत्री सुषमा साहू ने नामांकन दाखिल करने का इरादा जाहिर करके भाजपा खेमे में हलचल मचा दी थी, पर शपथपत्र दाखिल नहीं करने के चलते सुषमा साहू का नामांकन खारिज हो जाने से नितिन नवीन की साँस में सांस आयी होगी. कायस्थ और वैश्य समुदाय की बहुलता वाले इस सीट पर अगर कायस्थ नितिन नवीन के मुकाबले में राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य और भाजपा की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी सुषमा साहू से उम्मीद की जा रही थी कि वैश्य समुदाय का अच्छा ख़ासा वोट लेकर वो भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के वोट बैंक में सेंध लगाएंगी. पर फिलहाल उनके नामांकन पत्र के खारिज हो जाने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं प्लुरलस पार्टी की अध्यक्ष पुष्पम प्रिया चौधरी. लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से शिक्षित पुष्पम प्रिया जदयू के एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी हैं. पिता विनोद चौधरी इस बार खुद निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. अखबारों में विज्ञापन के जरिये बिहार की राजनीति में खुद को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करके हलचल मचाने वाली पुष्पम प्रिया को फिलहाल बतौर निर्दलीय उम्मीदवार दर्ज किया गया है. डीएम कुमार रवि का कहना है कि नामांकन के समय पार्टी का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन नही दिख रहा है. मामला तकनीकी है, स्क्रूटनी में ऐसे मामलों को लेकर जांच की व्यवस्था है, जो की जा रही है. उन्होंने अपने लिए तीन चुनाव चिन्ह शतरंज बोर्ड, लूडो या कैरम बोर्ड मांगा है. पुरे बिहार का दौरा करते हुए सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए बिहार के विकास सम्बन्धी मुद्दे पर उन्होंने लालू यादव और नीतीश कुमार पर लगातार हमला किया है. दिल्ली के आम आदमी पार्टी की तर्ज पर चुनावी दंगल में उतरने वाली पुष्पम प्रिया से उम्मीद की जा रही थी कि वे पटना के शहरी विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी पेश करेंगी क्योंकि बिहार की जाति समीकरणों से सनी राजनीति में वे शहरी मतदाताओं पर यकीं कर सकती थीं, खासकर जब उन्होंने संगठन के स्तर पर काम नहीं किया है. पुष्पम प्रिया के पास कुल चल संपत्ति 15 लाख 92 हजार 487 रुपए की है तो वहीं अचल संपत्ति के नाम पर शून्य है.

त्रिकोण के तीसरे कोण हैं बिहारी बाबू शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा के सुपुत्र लव सिन्हा. पिता भाजपा के टिकट पर पटना साहिब लोक सभा के सांसद रह चुके हैं, और उन्हें यहाँ के कायस्थों का समर्थन मिलता रहा है, जो पिछले लोकसभा चुनाव में उनका साथ छोड़ता नज़र आया, जब वे मोदी लहर के खिलाफ भाजपा छोड़कर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े. उन्हें जिस उम्मीदवार के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा, वे रविशंकर प्रसाद भी कायस्थ समुदाय के ही हैं. फिलहाल राजनीति में अनुभवहीन लव सिन्हा के समर्थन में पिता तो वोट जुटाएंगे ही, बहन सोनाक्षी सिन्हा भी प्रचार करेंगी.

कायस्थ और वैश्य समुदाय की बहुलता वाले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग सवा तीन लाख वोटर हैं, जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1. 70 लाख और महिला वोटर की संख्या डेढ़ लाख के आसपास है.

बांकीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के नितिन नबीन, भारतीय लोकतांत्रिक पार्टी के संजीव कुमार, न्यू भारत मिशन के चक्रवर्ती अशोक प्रियदर्शी, भारतीय मोमिन फ्रंट के विकास कुमार रॉय, जनाधिकार लोकतांत्रिक पार्टी के इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी, निर्दलीय उम्मीदवार मनीष बारियार, राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी के रॉकी चौहान, राष्ट्रीय जन संभावना पार्टी के दुखन पासवान समेत कुल 10 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है. पर मुख्य मुकाबला तीन उम्मीदवारों के बीच है.

फिलहाल बांकीपुर विधानसभा सीट इस चुनाव में सबसे हॉट सीट हो चला है. पुरे बिहार की नज़र इस सीट पर टिकी है.


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