मखदुमपुर विधानसभा सीट पर क्या इस बार जीतनराम मांझी के दामाद जीत का परचम लहरा पाएंगे?

Balendushekhar Mangalmurty

मखदुमपुर विधानसभा सीट पर इस बार बिहार के मतदाताओं और राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र है. कारण, पिछली बार पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इस सीट पर राजद के उम्मीदवार सूबेदार दास के हाथों भीषण पराजय का सामना कर चुके हैं. एक जमीनी कार्यकर्ता जिन्हे राजद सुप्रीमो लालू यादव ने महागठबंधन ( जदयू, राजद और कांग्रेस ) के उम्मीदवार के तौर पर राजद का सिम्बल दिया था ने काफी बड़े अंतर से दिग्गज नेता जीतनराम मांझी को हराया था. 2015 में तब इमामगंज से जदयू के दिग्गज नेता उदय नारायण चौधरी को पराजित करके विधानसभा पहुंचे थे. इस बार मखदुमपुर सीट पर जीतनराम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. पेशे से इंजीनियर देवेंद्र मांझी ने कुछ समय एनजीओ सेक्टर में भी काम किया और फिर अपने स्वसुर जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके पीएस रह चुके हैं.
गया जिले के इस आरक्षित सीट पर यादव, भूमिहार और कोइरी मतदाताओं का दबदबा रहता है. अभी तक 1995 विधानसभा चुनाव में यहां सबसे अधिक 77.46 प्रतिशत वोट डाले गए थे. यहाँ कुल वोटरों की संख्या 2.38 लाख हैं जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1.25लाख (52.65%) और महिला वोटर्स की संख्या 1.16लाख (47.34%) है.

पटना जिले से सटे जहानाबाद जिले के इस वीआईपी सीट में समस्यायों की कमी नहीं है. कृषि प्रधान मखदुमपुर विधान सभा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है. इस विधान सभा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली नदी यमुना में बरसात में पानी आता है लेकिन पानी को रोकने के लिए कोई चेक डैम का निर्माण नहीं कराया गया है. उदेरास्थान में बराज का काम चल रहा है लेकिन बराज का पानी फिलवक्त इस इलाके में नहीं पहुंच रहा है. छतियाना में पावर सब स्टेशन की घोषणा की गई थी। लेकिन यह कार्य भी शुरू नहीं हुआ है. बराबर पहाड़ी के इलाके में लोगों को सूखे से जूझना पड़ता है. गर्मी के दिनों में पेयजल संकट एक गंभीर संकट है. इस इलाके में नवोदय विद्यालय का निर्माण कराया गया है लेकिन विद्यालय नए भवन में शिफ्ट नहीं हुआ है. बराबर पहाड़ियों का ऐतिहासिक महत्व है पर इसके विकास के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, और फिर बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बराबर को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी, पर इस घोषणा को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है.

मखदुमपुर विधानसभा सीट का इतिहास रोचक है. 1952 में मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ था. 1967 से 1972 तक यह आरक्षित सीट रहा. वर्ष 2009 के परिसीमन के बाद मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र में भौगोलिक एवं सामाजिक बदलाव हुए हैं. पहले विधानसभा क्षेत्र में मखदुमपुर प्रखंड के अलावा रतनी प्रखंड की नौ पंचायतें थीं. परिसीमन के बाद रतनी की नौ पंचायतें जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में आ गईं. इसके बदले काको की आठ पंचायतों को मखदुमपुर विधानसभा से जोड़ा गया. 2010 से पुन: मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र आरक्षित सीट बना. वर्तमान समय में मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र में मखदुमपुर प्रखंड की 22, मखदुमपुर नगर पंचायत की 22 के अलावा काको प्रखंड के दक्षिणी भाग की आठ पंचायत शामिल हैं.

सबसे पहले 1952 में इस सीट से सोशलिस्ट पार्टी के रामेश्वर यादव चुने गए फिर 1957 के चुनाव में कांग्रेस के मिथिलेश्वर प्रसाद सिंह विजेता हुए. 1962 में कांग्रेस के सुखदेव प्रसाद वर्मा, 1967 में एसएसपी के लोहड़ी राम, 1969 में कांग्रेस के महावीर चौधरी, 1972 में कांग्रेस के रामस्वरूप राम, 1977 में जनता पार्टी के रामजतन सिन्हा, और 1980 से 2005 तक रामाश्रय प्रसाद सिंह ( कांग्रेस/लोजपा) विधायक रहे.

2010 में जीतन राम मांझी जदयू के उम्मीदवर के तौर पर चुने गए, जिन्हे 2015 के चुनाव में राजद के उम्मीदवार सूबेदार दास ने हराया.

पहले फेज में होने वाले चुनाव में इस बार मखदुमपुर सीट पर हम पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर देवेंद्र मांझी खड़े हैं, जिनका मुख्य मुकाबला राजद प्रत्याशी सतीश दास से होना है. इस बार राजद ने सूबेदार दास को मौका नहीं दिया है. इस बार का समीकरण बदला हुआ है. जहाँ हम पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर देवेंद्र मांझी भाजपा और जदयू के वोटरों का समर्थन मिलने की उम्मीद रखते हैं, वहीँ सतीश दास राजद के कोर वोटरों के साथ साथ कांग्रेस और वामपंथी पार्टयों के कोर वोटरों के समर्थन के सहारे नैया पार लगने की उम्मीद लगाए हुए हैं.

तीन फेज में संपन्न होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती 10 नवम्बर को शुरू होगी.

 


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.