दिनारा विधानसभा सीट पर इस बार जयकुमार सिंह की राह कितनी मुश्किल, कितनी आसान होगी?

Balendushekhar Mangalmurty 

कहने की जरुरत नहीं, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बक्सर लोकसभा क्षेत्र में स्थित दिनारा विधानसभा बिहार की सबसे हॉट सीटों में से एक है. रोहतास जिले में स्थित दिनारा विधानसभा सीट पर 2015 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के जय कुमार सिंह ने जीत हासिल की थी. उन्होंने रोमांचक मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र प्रसाद सिंह को 2,691 मतों के अंतर से हराया था. जय कुमार सिंह को चुनाव में 43% वोट मिले जबकि राजेंद्र प्रसाद सिंह को 41.2% वोट हासिल हुए. लेकिन इस बार जेडीयू और बीजेपी एक हो गए हैं और चुनौती राजद से है.

दिनारा के मौजूदा विधायक जय कुमार सिंह 2009 में हुए परिसीमन से पहले बिक्रमगंज से चुनाव जीते थे। लेकिन, जब परिसीमन में बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र और विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया तो जय कुमार सिंह दिनारा से भाग्य आजमाने चले गए.
2005 में पहली बार बिक्रमगंज विधानसभा से विजयी होकर विधानसभा पहुंचे थे. लेकिन, 2009 के परिसीमन के बाद बिक्रमगंज विधानसभा का अस्तित्व समाप्त हो गया व बिक्रमगंज विधानसभा के दावथ व सुर्यपुरा प्रखंड को दिनारा में शामिल कर दिया गया था, जिसके बाद जयकुमार सिंह ने दिनारा का रूख किया था.

दरसअल 2009 के परिसीमन में बदल गया भूगोल. वर्ष 2009 के पूर्व दिनारा विधानसभा क्षेत्र बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था पर 2009 में इसका भूगोल बदल गया। पूर्व में जहां इस विधानसभा में दिनारा के साथ कोचस-करगहर प्रखंड भी शामिल थे, वहीं परिसीमन ये दोनों प्रखंड इस सीट का हिस्सा नहीं रहे. वहीं सूर्यपुरा और दावथ प्रखंड को इसमें शामिल कर लिया गया। दिनारा के 22, सूर्यपूरा की पांच व दावथ कीनौ पंचायत दिनारा विस क्षेत्र में शामिल किये गये। अहम बात यह रही कि इस विस क्षेत्र को बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र (अब काराकाट) से हटा कर बक्सर लोकसभा सीट में शामिल कर दिया गया।

दिनारा विधानसभा सीट पर यादव और रविदास की सबसे अहम भूमिका में है। वहीं, मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण आबादी भी इस इलाके में अच्छी- खासी है। कुल वोटर्स की संख्या 2.98 लाख है जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1.56 लाख (52.39%) और महिला वोटर्स की संख्या 1.40 लाख (47.22%) है.

2015 में जनता दल (यूनाइटेड) से जय कुमार सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र प्रसाद सिंह को 2691 वोटों के मार्जिन से हराया था. उस समय राजेंद्र सिंह झायखंड भाजपा के संगठन महामंत्री थे. राजेंद्र सिंह के नमांकन में झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित उनके पुरा मंत्री मंडल ही उतर आया था. 2015 में चुनाव हारने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता सह प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह पिछले पांच वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय हैं. इस बार सीटों के बंटवारे में जदयू और भाजपा के बीच इस सीट को लेकर मामला फंसा था. भाजपा अपने उम्मीदवार राजेंद्र सिंह के लिए इस सीट पर दावा कर रही थी तो जदयू इसे अपने सिटींग एमएलए के चलते इस अपना अधिकार मान रही थी. जय कुमार सिंह जदयू के प्रभावशाली नेता हैं और नीतीश कुमार के करीबी हैं. उन्होंने सहकारिता मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय, बिज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग संभाले हैं.

इस विधानसभा क्षेत्र से लोगों की उम्मीदों की बात करें तो वोटरों की इच्छा है कि कम से कम एक अंगीभूत कॉलेज की स्थापना हो, महिला कॉलेज खुले, किसानी के लिए विख्यात क्षेत्र में किसानों को समय से खाद-बीज व उत्पादों का उचित मूल्य मिले और भलुनीधाम को पर्यटक स्थल घोषित किया जाए, जिससे यहां रोजगार बढ़े

दिनारा विधानसभा सीट से लोजपा के उम्मीदवार राजेंद्र सिंह पिछले 37 साल से भारतीय जनता पार्टी में थे. पार्टी के वरिष्ठ नेता थे. राज्य में पार्टी के उपाध्यक्ष भी थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे. इसके अलावा झारखंड भाजपा के संगठन मंत्री रह चुके हैं. 2015 के चुनाव में इस बात की भी चर्चा थी कि अगर राज्य में बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाती है तो राजेंद्र सिंह मुख्यमंत्री पद के मुख्य उम्मीदवार होंगे लेकिन, वो खुद दिनारा से अपना चुनाव हार गए. 2020 के विधानसभा चुनाव में जब ये सीट जदयू के खाते में चली गई तो राजेंद्र सिंह ने लोजपा का दामन थामा और चुनाव में कूद गए. इसी वजह से रोहतास जिले का ये विधानसभा सीट ‘हॉट सीट’ में शुमार हो गई है. भाजपा के कोर वोटर्स के मन में ये भाव है कि राजेंद्र सिंह गम्भीर व्यक्ति हैं. उनकी छवि अच्छी है. उन्होंने दिनारा में बीजेपी का संगठन बनाया है तो ऐसे में कार्यकर्ता उनके साथ नहीं रहेगा तो कहां रहेगा?”

इलाके में राजेंद्र सिंह की लगातार उपस्थिति और लोगों के बीच अच्छी छवि और भाजपा के वोटर्स के मन में ये बात कि राजेंद्र सिंह ही हमारे नेता हैं, चाहे किसी भी पार्टी से खड़े हों, जदयू के लिए सर दर्द पैदा कर रहा है. एनडीए के आधिकारिक उम्मीदवार को अगर भाजपा का वोट ट्रांसफर नहीं होता है, और महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में राजद उम्मीदवार विजय मंडल सशक्त चुनौती पेश करते हैं, तो दिनारा विधानसभा सीट पर इस बार अप्रत्याशित परिणाम भी आ सकते हैं.


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