इमामगंज विधानसभा सीट: क्या जीतनराम मांझी फिर से विधानसभा में लौटेंगे?

Balendushekhar Mangalmurty

बिहार झारखंड बॉर्डर पर स्थित औरंगाबाद लोक सभा क्षेत्र में स्थित इमामगंज विधानसभा सीट एक बार दो दिग्गजों की टक्कर का गवाह बनने जा रहा है. बिहार के इस हॉट सीट पर पुरे बिहार की नज़र है. एक बार फिर हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजद उम्मीदवार उदय नारायण चौधरी आमने सामने हैं. बिहार झारखंड जब एक थे, तो यह विधानसभा क्षेत्र चतरा लोकसभा क्षेत्र में पड़ता था, प्रदेश के बंटवारे के बाद औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है.

2015 में अपनी नयी पार्टी हम के सिम्बल पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने जदयू नेता उदयनारायण चौधरी को मात दी, हालाँकि वे अपनी सीट मखदुमपुर राजद के एक साधारण कार्यकर्त्ता सूबेदार दास के हाथ गँवा बैठे. पूर्व विस अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी ने 1990 के बाद 2000, 2005 के फरवरी और 2005 के नवंबर के साथ ही 2010 में लगातार चार चुनाव में जीत दर्ज की थी.

इमामगंज विधानसभा में कुल वोटर हैं 2.86 लाख, जिसमें पुरुष वोटर- 1.48 लाख (51.94%) और महिला वोटर महिला वोटर- 1.37 लाख (48.05%) हैं.  ट्रांसजेंडर वोटर- 17 (0.003%) भी हैं यहाँ. इमामगंज को ‘कोइरी का नैहर’ कहा जाता है. क्षेत्र में 144 ऐसे गांव व टोले हैं, जहां कोईरी जाति के लोग रहते हैं. दूसरे नंबर पर मांझी जाति है. यादव और मुसलमान की आबादी तीसरे नंबर पर है.

अगर यहाँ के इतिहास की बात करें तो 1957 में सबसे पहले हुए चुनाव में रानीगंज के जमींदार अम्बिका प्रसाद सिंह ने कांग्रेस की नेत्री चंद्रावती देवी को शिकस्त दी. फिर 1962 में स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर उन्होंने कांग्रेस के उमीदवार जगलाल महतो को हराया. 1967 में यह सीट अऩुसुचित जाति के लिए आरक्षित की गई थी. 1967 के चुनाव में कांग्रेस के डी राम, 1969 के चुनाव में एसएसपी के ईश्वर दास, 1972 में कांग्रेस के अवधेश्वर राम जीते थे. 1980 और 1985 के चुनाव में कांग्रेस के श्रीचंद सिंह जीते. इसके बाद 1990 में जदयू के उदय नारायण चौधरी जीते. 1995 में रामस्वरूप पासवान जीते. इसके बाद 2000, 2005 और 2010 के चुनाव में उदय नारायण चौधरी जीते. 2015 के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जेडीयू के उदय नारायण चौधरी को पटखनी दे दी. हालाँकि जीतनराम राजनीति में काफी लम्बे समय से थे, पर 2015 के चुनाव में मुख्यमंत्री बनने के बाद जीतनराम मांझी का बढ़ा कद, और लम्बे समय से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के चलते उदय नारायण चौधरी के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी दोनों एक साथ काम कर रहे थे. जिसका फ़ायदा जीतनराम मांझी को मिला.

2015 के विधानसभा चुनाव से इस बार के चुनाव का राजनीतिक समीकरण बदला हुआ है. इस बार जीतनराम मांझी भाजपा और जदयू के साथ एनडीए का हिस्सा हैं, जबकि उदयनारायण चौधरी राजद, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के महागठबन्धन के उम्मीदवार हैं.

बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता उदय नारायण चौधरी नीतीश कुमार के बेहद करीबी नेता रहे और विधानसभा के अध्यक्ष ( 2005 -2015) बनने वाले पहले दलित नेता होने का श्रेय भी हासिल हुआ. पर नीतीश कुमार के राजद और कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के साथ हाथ मिला लेने के चलते विरोधस्वरूप उन्होंने जदयू छोड़ दिया और राजद में शामिल हो गए.

इमामगंज विधानसभा क्षेत्र आज भी विकास की बात जोह रहा है. सड़क,शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पीने का पानी आज भी बुनियादी समस्या हैं यहाँ. रह रह कर नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के मुठभेड़ से अशांति और भय का माहौल बना रहता है, जिससे विकास कार्य में बाधा आती है.

इस बार बदले हुए राजनीतिक समीकरण के बीच दोनों दिग्गज एक बार फिर चुनावी अखाड़े में आमने सामने हैं. पहले चरण में होने वाले मतदान के बाद वोटों की गिनती 10 नवम्बर को होगी, जिसमें दोनों दिग्गजों के भाग्य का फैसला होगा.

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