डुमरांव विधानसभा सीट पर क्या ददन पहलवान जदयू उम्मीदवार की राह में रोड़े अटका पाएंगे?

Balendushekhar Mangalmurty

डुमरांव विधानसभा सीट इस बार चर्चा में हैं दबंग विधायक ददन यादव उर्फ़ ददन पहलवान के टिकट कट जाने के चलते. तीन बार इस सीट का प्रतिनिधि कर चुके ददन पहलवान का टिकट काटकर जदयू ने पार्टी प्रवक्ता और राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष अंजुम आरा को अपना उम्मीदवार बनाया है. ददन पहलवान के टिकट कटने के पीछे एक चर्चा ये है कि नीतीश कुमार के ऊपर जनवरी 2018 मेंसमीक्षा यात्रा पर निकले नीतीश कुमार पर ददन पहलवान के विधानसभा क्षेत्र में पत्थरबाजी हुई थी. इस घटना से नीतीश कुमार बेहद खफा थे.

कौन हैं ददन पहलवान? 

ददन यादव बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल के समहर गांव के रहने वाले हैं. किसी जमाने में कुश्ती का शौक रखने लंबी चौड़ी काया वाले ददन की छवि बिहार के शाहाबाद इलाके में बाहुबली के रूप में भी होती है. बक्सर जिला अंतर्गत डुमरांव विधानसभा क्षेत्र जद यू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह का भी इलाका माना जाता है. डुमरांव के इलाके में वोटरों की संख्या में राजपूतों के अलावा यादवों की भी काफी संख्या है. अपने पॉलिटिकल करियर में ददन लगभग सभी दलों में घुम चुके हैं.

ददन डुमरांव से दो बार निर्दलीय चुनाव लड़ कर जीत चुके हैं. ददन बिहार सरकार में 2000 में राबड़ी देवी सरकार में वाणिज्य राज्य मंत्री रह चुके हैं. ददन कभी निर्दलीय चुनाव लड़े, कभी बसपा, सपा, तो कभी जनता दल सेकुलर के साथ रहे.  वर्ष 1995 में ददन ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. वे दूसरे स्थान पर रहे. फिर 2000 में निर्दलीय लड़े और पहली बार विधानसभा पहुंचे. 2000-05 वाली सरकार के एक महत्वपूर्ण उलटफेर में ददन ने राजद की सरकार बचाई थी. लालू ने खुश हो कर राबड़ी देवी की सरकार में वित्त वाणिज्य कर राज्य मंत्री बनाया था. इसके बाद भी वह राजद में शामिल नहीं हुए और 2005 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे. 2004 में ददन ने बक्सर संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा, पर हार गए. वर्ष 2009 में फिर लोकसभा का चुनाव लड़ा और हार गए. इसके बाद राजनीति करियर को बचाने के लिए बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए और 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े पर हार गए.

2015 में ददन पहलवान ने जदयू का दामन थामा. बिहार के चुनावों में महागठबंधन के कोटे के तहत ये सीट जद यू के खाते में गई. पार्टी ने सियासी दाव खेला और बगैर किसी देर के ददन पहलवान को चुनावी अखाड़े में उतार दिया. सबसे मजे की बात यह रही कि कभी राजद की सरकार में मंत्री रह चुके इस नेता की जद यू की न सिर्फ जद यू में एंट्री हुई, बल्कि एंट्री के महज 48 घंटे के भीतर ही पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया. ददन पहलवान को हेलिकॉप्टर से चुनाव प्रचार करने का भी खास शौक है. ददन बतौर निर्दलीय प्रत्याशी भी अपने खर्च पर लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में अपने इलाके में हेलिकॉप्टर से चुनाव प्रचार कर चुके हैं. ददन के इस प्रचार की इलाके में आज भी चर्चा होती है.

डुमरांव विधानसभा सीट का इतिहास:

वर्तमान में डुमरांव, चौगाई, केसठ,नावानगर और नगर परिषद के वार्डों को मिलाकर डुमरांव विधान सभा का गठन किया गया है. इसमें कुल 36 पंचायत और नगर परिषद के कुल 26 वार्ड शामिल हैं. इस विधानसभा में वोटरों की संख्या 3 लाख 19 हजार के आसपास है. 1951 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में सरदार हरिहर सिंह निर्वाचित हुए. 1957, और 1962 में कांग्रेस से गंगा प्रसाद सिंह चुनाव में विजयी हुए थे. 1967 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फिर सरदार हरिहर प्रसाद सिंह निर्वाचित हुए. 1969 और 1972 के चुनाव में कांग्रेस ने सरदार हरिहर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया। 1977 के चुनाव में सीपीआई के रामाश्रय सिंह निर्वाचित हुए लेकिन, फिर 1980 के चुनाव में राजा राम आर्य फिर से कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए. 1981 के मध्यावधि चुनाव व 1983 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के विजय नारायण भारती विधायक चुने गए. 1985 में कांग्रेस के बसंत सिंह यहाँ से विजयी हुए. 1990 से प्रदेश की बदली जमीनी राजनीतिक धरातल पर जनता दल के एवं निर्दलीय प्रत्याशी इस सीट से विधानसभा में जाने लगे.

वर्ष 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में ददन यादव ने तब एडीए गठबंधन में शामिल रहे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के राम बिहारी सिंह को 30,339 वोटों से हराकर चुनाव जीता था. ददन यादव को कुल पड़े मतों में से 81,081 वोट मिले थे. जबकि राम बिहारी को 50,742 वोट हासिल हुआ था. तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय उम्मीदवार श्रीकांत सिंह के खाते में 14,656 वोट गए थे.

2020 के विधानसभा चुनाव में डुमरांव में पहले चरण में  28 अक्टूबर को वोटिंग होगी. 2011 की जनगणना के अनुसार, डुमरांव की कुल जनसंख्या 4,16,542 है. इसमें 87.13% ग्रामीण और 12.87% शहरी आबादी है. यहां की अनुसूचित जाति (एससी) 13.63 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) 1.25 फीसदी है.

पिछले दो बार से जदयू के खाते में डुमरांव सीट पर अंजुम आरा की दावेदारी आसान नहीं होने जा रही. डुमरांव से तीन बार विधायक रहे ददन यादव निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अंजुम आरा को कड़ी टक्कर देंगे. महागठबंधन से माले नेता अजीत कुमार सिंह, एलजेपी (LJP) से अखिलेश कुमार सिंह तथा जन अधिकार पार्टी से श्रीकांत यादव इस सीट से चुनावी ताल ठोक रहे हैं. इस बार शाहाबाद के प्रथम सांसद डुमरांव महाराज के नाती शिवांग ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है. इस सीट पर यादव, मुस्लिम, रविदास वोटर महत्वपूर्ण भूमिका में हैं. कुल वोटर 3.15 लाख हैं,जिनमें पुरुष वोटर- 1.68 लाख (53%) और महिला वोटरः 1.47 लाख (47%) हैं.

ऐसे में देखना रोचक होगा कि क्या नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ रही अंजुम आरा चुनावी वैतरणी पार कर सकेंगी या नहीं.

 


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