बाहुबलियों के गढ़ मोकामा विधानसभा में अनंत सिंह की विजय यात्रा क्या इस बार भी जारी रहेगी ?

Balendushekhar Mangalmurty

पटना जिला में स्थित मोकामा लेकिन मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में पड़ने वाले मोकामा विधानसभा सीट पर अनंत सिंह का राज है. सत्ता के साथ हों, या सत्ता के खिलाफ, उनकी जीत पर उम्मीदों पर पिछले चार चुनावों में पानी नहीं फिरा. 2005 फरबरी, फिर अक्टूबर २००५, २०१० और फिर २०१५ में वे लगातार जीत हासिल करके विधानसभा पहुँचते रहे हैं. वे किसी भी राजनीतिक दल से बंधे नहीं हैं, दल उनके पीछे समर्थन के लिए आता है. यही वजह है कि 2015 में लालू यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस की सम्मिलित ताकत लग जाने के बाद भी उन्होंने जदयू या कहें महागठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार, उन्ही के इलाके के बाशिंदे नीरज कुमार को बुरी तरह हराया. 2015 में अनंत सिंह को यहां पर 54 हजार से अधिक वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के नीरज कुमार रहे थे जिन्हें सिर्फ 35 हजार वोट मिल पाए थे. इस बार नीरज कुमार चुनाव लड़ने का हौसला नहीं जुटा पाए.

अनंत सिंह के खिलाफ लालू यादव के द्वारा मोर्चा खोलने के बावजूद आज तेजस्वी यादव अनंत सिंह को अपने पाले में ले आये. नामांकन भरने के समय नामांकन ख़ारिज हो जाने के डर से उन्होंने अपनी पत्नी को भी इस सीट से पर्चा भरवाया था, पर अब स्थिति स्पष्ट हो चुकी है. मैदान में वे बतौर राजद उम्मीदवार हैं और उनका मुकाबला जदयू के राजीव लोचन नारायण सिंह से है. नामांकन होने के बाद नीतीश कुमार के खिलाफ अपनी अदावत जाहिर करते हुए उन्होंने घोषणा की कि तेजस्वी सीएम बनेंगे और नीतीश जेल जाएंगे. पर नीतीश कुमार और अनंत सिंह में हमेशा से अदावत हो, ऐसा नहीं था. साल 2005 से लेकर 2010 तक अनंत सिंह ने जदयू के टिकट पर तीन चुनाव जीते. और जीतन राम मांझी के विधानसभा के फ्लोर पर विश्वास मत हासिल करने के प्रयास को धत्ता बनाने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभायी थी जब उन्होंने नीतीश कुमार के विधायकों को बाड़े में बंद रखा था. और जीतनराम मांझी की 1 अन्ने मार्ग में डिनर पार्टी असफल हो गयी थी. साल 2015 में नीतीश से अनबन के बाद निर्दलीय चुनाव जीते.

1951 में गठित मोकामा विधानसभा सीट मोकामा विधान सभा इलाका भूमिहार और यादव बहुल क्षेत्र है. इनके अलावा यहां धानुक, कोयरी, कुर्मी और मुस्लिम वोटरों की भी अच्छी तादाद है. दोनों उम्मीदवार -अनंत सिंह और राजीव लोचन सिंह- भूमिहार जाति से आते हैं. 2015 चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब ढाई लाख वोटर हैं जिनमें से 1.30 लाख पुरुष और 1 लाख के करीब महिला वोटर हैं.मोकामा के आसपास का क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण है. एक तरफ गंगा नदी और दूसरी तरफ किउल नदी और बीच में टाल का इलाका, जहां दूर-दूर तक खेत ही खेत नजर आता है. साल के चार महीने पानी ही पानी रहने वाले इस इलाके में दलहन की खूब पैदावार होती है. यह इलाका दाल का कटोरा कहलाता है.
एक अनुमान के मुताबिक इलाके में 40 से 50 फीसदी वोटर भूमिहार जाति के हैं. दूसरे नंबर पर यादवों का वोट बैंक है. राजद से उम्मीदवार होने की वजह से माना जा रहा है कि अनंत सिंह को भूमिहार के साथ-साथ यादवों और मुसलमानों का भी वोट मिलेगा.

मोकामा की राजनीति में धनबल का बोलबाला रहा है. यहां पिछले तीन दशक से यानी 30 वर्षों से बाहुबली ही विधायक चुने जाते रहे हैं. साल 1990 में अनंत सिंह के भाई दिलीप कुमार सिंह जनता दल के टिकट पर चुने गए थे. 1995 में भी दिलीप सिंह ने ही बाजी मारी लेकिन साल 2000 में दूसरे बाहुबली सूरजभान सिंह यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए और विधानसभा पहुंचे. इन दोनों परिवारों के बीच अदावत का इतिहास भी पुराना रहा है. 2005 से अनंत सिंह की जीत का जो सिलसिला शुरु हुआ, वो अनवरत जारी है. उसे न उनका आपराधिक रिकॉर्ड तोड़ सका है, न लालू नीतीश का सम्मिलित बल.
इस बार भी मामला अनंत सिंह बनाम अन्य का मामला लग रहा है. लेकिन अंतिम परिणाम आने तक कुछ स्पष्ट कहा नहीं जा सकता. फिलहाल बिहार की जनता को इस हॉट सीट पर रिजल्ट का इन्तजार है.


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