विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी का गढ़ सरायरंजन विधानसभा सीट जहाँ पिछली बार नोटा तीसरे स्थान पर रहा था…

Balendushekhar Mangalmurty 

पिछले दो बार से विजेता जदयू के कद्दावर नेता विजय कुमार चौधरी क्या तीसरी बार भी विधानसभा पहुंचेंगे या राजद 2005 के बाद वापसी करेगा, ये सवाल सिर्फ सरायरंजन की जनता के मन में नहीं है, बल्कि इस वीआईपी सीट पर पूरे बिहार की नज़र है. सरायरंजन विधानसभा में पहले चरण में चुनाव है, जबकि वोटों की गिनती 10 नवम्बर को होगी.

2015 विधानसभा चुनाव में सरायगंज विधानसभा सीट से जदयू के विजय कुमार चौधरी 81055 वोट हासिल करके विजयी घोषित हुए थे. उस समय सरायगंज विधानसभा सीट पर दूसरे नंबर पर भारतीय जनता पार्टी के साफ़ छवि के युवा, शिक्षित नेता रंजीत निर्गुणी रहे थे जिन्हें 47011 वोट मिले. चौंकाने वाली बात ये रही कि इस विधानसभा क्षेत्र से तीसरे नंबर पर नोटा रहा. चौथे नंबर पर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के ललन कुमार ईश्वर रहे.

इस बार विजय चौधरी का सीधा मुकाबला राजद के प्रत्याशी अरविंद सहनी से है जिन्होंने 1992 में ही जनता दल से अपना राजनीतिक पारी की शुरुआत किया था

बिहार के समस्तीपुर जिले में 2008 की परिसीमन के बाद सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र का ढांचा बदल गया है. इसके तहत मोरवा प्रखंड को हटा कर विद्यापतिनगर प्रखंड को जोड़ दिया गया था. इसमें सरायरंजन की 23 और विद्यापतिनगर की 14 पंचायतों को मिलाकर सरायरंजन विधानसभा का गठन किया गया. सवर्ण बहुल इस विधानसभा में कुल मतदाता की संख्या 2 लाख 17 हजार 2 सौ 25 है जिसमें पुरुष मतदाता की संख्या 1 लाख 16 हजार 12 है और महिला मतदाता की संख्या 1 लाख 1 हजार 2 सौ 13 है.

1982 में पिता के देहांत के बाद बैंक की नौकरी छोड़कर बाय इलेक्शन से बिहार विधानसभा पहुंचने वाले विजय चौधरी की इलाके में साफ़ सुथरी छवि है. सरायरंजन के ननरघोघी में मेडिकल कॉलज व इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना कराने में अहम भूमिका से उनकी अलग साख बनी है. 2010 में विधायक बनने पर विजय कुमार चौधरी ने जल संसाधन मंत्री के रूप में काम किया जबकि 2015 के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद बिहार विधानसभा के अध्यक्ष के पद पर विराजमान हुए।

नीतीश कुमार के नज़दीकी माने जाने वाले विजय चौधरी को नीतीश कुमार ने फरवरी 2010 में बिहार में पार्टी की कमान सौपी थी. इनके अध्यक्ष के कार्यकाल में जदयू ने 2010 के चुनाव में शानदार बहुमत हासिल किया था. . नीतीश कुमार की सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे. विजय चौधरी जीतनराम मांझी की सरकार में 13 फरवरी 2015 को विजय कुमार चौधरी को जदयू विधायक दल का नेता भी चुना गया था.

अक्टूबर 2005 के चुनावों में राजद के रामचंद्र सिंह निषाद ने जदयू के विजय चौधरी को मात दी थी. इससे पहले, फरवरी 2005 के चुनावों में लोक जनशक्ति पार्टी के चंद्रकांत चौधरी को मात देकर राजद के रामचंद्र सिंह निषाद विधानसभा पहुंचे थे. 2000 के विधानसभा चुनावों में राजद के राश्रय सहनी ने चंद्रकांत चौधरी को मात दी थी. 1995 के चुनावों में रामश्रय सहनी सरायरंजन सीट पर राजद को जीत दिलाने में कामयाब रहे थे.

पिछला इतिहास देखें तो पता चलता है कि जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े राम बिलास मिश्रा ने  नंदू झा को मात दी थी. 1985 में कांग्रेस के रामाश्रय ईश्वर ने बीजेपी के यशोदानंद को हराया था. इससे पहले, 1980 के चुनावों में राम बिलास मिश्रा जनता दल के टिकट पर कांग्रेस (आई) के सूरज चौधरी को मात दी थी जबकि 1977 में जनता पार्टी के यशोदा नंदन सिंह ने कांग्रेस के रमाकांत झा को पराजित किया था.

इस विधानसभा क्षेत्र में 1967 से अबतक समाजवादी पृष्ठभूमि के राजनेता ही चुनावी पताका लहराते आ रहे हैं

ग्रामीण विधानसभा सरायरंजन के लोग तंबाकू की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. मछली पालन का भी काम होता है. विद्यापतिनगर में विद्यापतिधाम प्रसिद्ध धाम है. सावन के समय जल चढाने काफी बड़ी संख्या में शिव भक्त आते हैं. पर अभी इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से ठीक से विकसित नहीं किया जा सकता है. पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए प्रयास को नाकाफी कहा जा सकता है. एनएच 103 पर स्थित वरुणा पुल को आज तक नहीं बनवाया जा सका. यह काफी बड़ा चुनावी मुद्दा है. जलसंसाधन विभाग से एक आईबी, हाईमास्क लाईट, जलमीनार का निर्माण कराया. साथ ही मुख्यालय में स्वास्थ्य विभाग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया है. सरायरंजन के लोग की सबसे बड़ी मांग वरुणा पुल बनाने की है. जिसकी वजह से क्षेत्र का विकास रुका हुआ है.

देखना है सरायरंजन की जनता इस बार किस पर अपना दांव खेलती है. मुख्य मुकाबला विजय चौधरी और राजद के अरविन्द सहनी के बीच है, हालाँकि और भी प्रत्याशी मैदान में हैं.


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