सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा पर किसका जलवा रहेगा- मुकेश सहनी (VIP) या फिर युसूफ सलाउद्दीन (RJD) का?

Balendushekhar Mangalmurty

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में सीटों के बंटवारे में सहरसा जिले में स्थित सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट भाजपा के हिस्से चली गयी है, जहाँ से विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी खड़े हैं. बताते चलें कि भाजपा ने अपने हिस्से की 121 सीटों में से 11 सीटें मुकेश सहनी की पार्टी VIP को दी, वहीँ जदयू ने अपने हिस्से की 122 सीटों में 7 सीटें जीतनराम मांझी की पार्टी HAM को दिया. इस बार इस सीट पर मुकेश सहनी का मुकाबला है राजद के उम्मीदवार युसूफ सलाउद्दीन से. पिछले चार चुनावों में जदयू के हिस्से में आयी जीत उस समय हार में बदल गयी, जब तत्कालीन विधायक दिनेश चंद्र यादव के लोकसभा सांसद बनने से खाली हुई सीट पर 2019 में हुए उपचुनाव में राजद प्रत्याशी ज़फर आलम ने जदयू प्रत्याशी अरुण कुमार को हरा दिया. इस चुनाव में जदयू प्रत्याशी अरुण यादव को 55927 और जफर आलम राजद 71435 मत मिले थे. यादव मतदाता बहुल सिमरी बख्तियार विधानसभा क्षेत्र में कुल वोटर 330161 हैं, जिनमें पुरुष वोटर्स की संख्या 171197 और महिला वोटर्स की संख्या 158957 है.

अगर इस सीट के इतिहास की बात करें तो खगड़िया के सांसद रह चुके चौधरी महबूब अली कैसर के पिता मो. सलाउद्दीन पांच बार ( 1967,1972, 1977, 1980, 1985 ) यहां से चुने गए. वहीं चौधरी महबूब अली कैसर ( 1995, 2000, 2009 उपचुनाव) ने भी कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में तीन बार जीत हासिल की है. मधेपुरा के जदयू सांसद दिनेशचंद्र यादव ( 1990, फरबरी 2005, अक्टूबर 2005, 2015) चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 2019 के उपचुनाव में राजद के ज़फर आलम चुने गए थे.

सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र अपने धार्मिक स्थलों के लिए देश दुनिया में प्रसिद्द है. प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां उग्रतारा स्थान, मटेश्वर धाम और कारु ख़िरहरी मंदिर यहां की पहचान है. महिषी गांव स्थित मां उग्रतारा के मंदिर में मत्था टेकने देश ही नहीं विदेश तक से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं सावन के महीने में जिले ही नहीं आसपास के क्षेत्रों के लाखों श्रद्धालु मुंगेर के छर्रापट्टी से जलभरकर सोमवार को बलवा हाट के मटेश्वर धाम में जलाभिषेक करते हैं.

अब देखना रोचक होगा क्या यादव बहुल विधानसभा सीट पर एनडीए उम्मीदवार मुकेश सहनी जदयू के उम्मीदवार दिनेश चंद्र यादव की सफलता पाने में सफल होते हैं या फिर राजद उम्मीदवार विधानसभा उपचुनाव का परिणाम दोहराने में सफल होते हैं.

गौरतलब है कि बिहार में अति पिछड़ी जातियों (ईबीसी) की आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा निशाद समुदाय का है, इसलिए इसे एक अहम वोट बैंक की तरह देखा जा रहा है, वहीं बिहार की 5 प्रतिशत आबादी मल्लाहों की है. सवाल भी उठ रहे हैं हमेशा की तरह. आखिर मुकेश सहनी के बड़े बड़े सम्मेलनों के पीछे किसकी आर्थिक ताकत है. कौन है जो मुकेश सहनी को प्रमोट कर रहा है.

दरभंगा के मूल निवासी:
मुकेश, बिहार में दरभंगा जिले के सुपौल बाजार के मूल निवासी हैं. 19 साल की उम्र में वे घर से भागकर मुंबई गए थे हालांकि, कुछ समय के लिए वे लौट आए पर उन्हें गांव रास न आया. वे फिर मुंबई चले गए. शुरुआत में उन्होंने एक कॉस्मेटिक स्टोर में सेल्समैन की नौकरी की. यहीं मुकेश के दिमाग में फिल्मों, सीरियल्स और शोज के सेट्स बनाने के बिजनेस का ख्याल आया. उनके लिए सबसे बड़ा मौका तब आया जब, नितिन देसाई ने उन्हें शाहरुख खान स्टारर ‘देवदास’ का सेट बनाने के लिए आमंत्रित किया. इस धंधे में शुरुआती सफलताएं मिलने के बाद उन्होंने ‘मुकेश सिनेवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी बनाई. इन्होंने इस सफल कारोबार से महज कुछ ही समय में खूब नाम और पैसा कमाया.

“सन ऑफ़ मल्लाह”
मुकेश साहनी, मल्लाह जाति के हैं. वे निषाद विकास संघ नाम के एक संगठन के मुखिया भी हैं. गौर हो कि बिहार में मछुआरों व नाविकों की जाति में आने वाले मल्लाह, साहनी, निषाद, बिंद जैसी अति पिछड़ी जातियों की आबादी करीब 5% है. बिहार में इस समय इनका कोई बड़ा नेता नहीं है. मुकेश ने फूलन देवी के नाम पर इन्हें बीजेपी और एनडीए के लिए बिहार में लामबंद किया था. उस समय साहनी के प्रचार वाले विज्ञापनों में फूलन देवी और मल्लाह जाति के ही एक शहीद जुब्बा साहनी की फोटो लगी देखी जा सकती थी. एनडीए के पोस्टर्स में मुकेश का परिचय देते हुए उनके नाम के साथ ‘सन ऑफ मल्लाह’ भी जरूर लिखा रहता था. बीजेपी को भरोसा था कि इनकी वजह से पार्टी और गठबंधन को मल्लाहों का 5 प्रतिशत वोट जरूर मिलेगा, हालाँकि 2015 के विधान सभा चुनाव में भाजपा को महागठबंधन के हाथों करारी हार मिली थी.

2015 के आम चुनाव में मुकेश सहनी ने एनडीए को अपना समर्थन दिया था, हालाँकि यूपी के चुनाव में वे एनडीए से दूरी बना चुके थे. ता दें कि मुकेश सहनी ने बिहार विधान सभा 2015 के चुनाव के दौरान निषाद विकास संघ के नाम से एक फोरम बनाया था, जिसके राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष वे खुद थे. तब उन्‍होंने एनडीए को समर्थन दिया था. लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के बाद एनडीए से भी दूरी बना ली. अब मुकेश सहनी विकासशील इंसान पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर 11 प्रत्याशियों के साथ खुद मैदान में हैं.

पहली बार होंगी ये चीजें

  • सभी पोलिंग बूथ ग्राउंड फ्लोर पर ही होंगे। इस बार एक बूथ पर एक हजार मतदाता होंगे।
  • वोटिंग का वक्‍त एक घंटे बढ़ा है। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट पड़ेंगे। आखिर वक्‍त में कोविड मरीजों को वोट डालने दिया जाएगा।
  • कोरोना से बचाव के लिए 6 लाख पीपीई किट, 46 लाख मास्क, 6 लाख फेस शील्‍ड, 23 लाख ग्लव्स, 47 लाख हैंड सैनिटाइजर का इंतजाम होगा।
  • घर-घर चुनाव प्रचार होगा मगर एक बार में पांच से ज्‍यादा कार्यकर्ता नहीं। ऑनलाइन नामांकन की सुविधा दी गई है, अगर निर्वाचन कार्यालय आते हैं तो केवल 2 वाहन लाने की अनुमति है। सार्वजनिक चुनाव सभाएं नहीं होंगी। केवल वर्चुअल तरीके से प्रचार हो सकता है।

 


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