दीघा विधानसभा सीट पर माले उम्मीदवार शशि यादव भाजपा उम्मीदवार संजीव चौरसिया को टक्कर देने में सफल होंगी?

Balendushekhar Mangalmurty

दीघा विधानसभा का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आये पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले दीघा विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 2010 में हुआ. उस समय भाजपा और जदयू का गठबंधन था. भाजपा का पारम्परिक गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में काफी खींचतान के बाद जदयू भाजपा से सीट अपने हिस्से में करने में सफल रही और फिर 2005 में मसौढ़ी से विधायक चुनी गयी पूनम देवी को 2010 के पहले विधानसभा चुनाव में जदयू उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया गया. उनके मुकाबले में लोजपा के सत्यानंद शर्मा, कांग्रेस के राजेश सिन्हा और भाजपा से विद्रोह करके आये उम्मीदवार हरेंद्र सिंह थे. क्षेत्र में कोई खास पहचान और लोकप्रियता नहीं होने के बावजूद नीतीश कुमार के काम पर वोटिंग और नीतीश कुमार की लोकप्रियता की लहर पर सवार पूनम देवी ने लोजपा के सत्यानंद शर्मा को बहुत बड़े मार्जिन से परास्त कर दिया.
पर 2014 में पूनम देवी के राजनीतिक करियर पर ग्रहण लगा जब उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते जदयू से निष्कासित कर दिया गया. उन्होंने फिर भाजपा का दामन थामा लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से उन्हें टिकट नहीं मिला. भाजपा ने संजीव चौरसिया को अपने उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया. उनका मुकाबला इस बार राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन के उम्मीदवार राजीव रंजन प्रसाद ( जदयू) से था. 2015 में भारतीय जनता पार्टी से संजीव चौरसिया ने जनता दल (यूनाइटेड) के राजीव रंजन प्रसाद को 24779 वोटों के मार्जिन से हराया था.

पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र जिसके अंतर्गत दीघा विधानसभा सीट आता है, पर भाजपा का दबदबा है. ऐसे में 2020 में एक बार फिर दीघा विधानसभा सीट पर चुनाव एकतरफा दिख रहा है. इस बार पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के सबसे बड़े विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार संजीव चौरसिया के मुकाबले महागठबंधन की तरफ से माले उम्मीदवार शशि यादव मैदान में हैं. इस बार भाजपा उम्मीदवार का मुकाबला राजद, कांग्रेस और माले की सम्मिलित ताकत से है, पिछली बार उनका मुकाबला राजद, कांग्रेस और जदयू की सम्मिलित ताकत से था.

शशि यादव की छवि एक ईमानदार, जुझारू, जमीन से जुडी राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ता की रही है. All India Progressive Women’s Association (AIPWA) की वे स्टेट सेक्रेटरी भी हैं. संजीव चौरसिया सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद चौरसिया के बेटे हैं. संजीव ने पिछली बार पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए, वो बिहार भाजपा के महासचिव भी हैं. कोरोना काल में संजीव चौरसिया काफी चर्चा में रहे हैं. दरअसल, मार्च के महीने में उन्होंने एक हवन करवाया था और दावा किया था कि हवन से कोरोना जैसी दुष्ट चीजें दूर होती हैं.

इस विधानसभा सीट पर यादव राजपूत, कोइरी, भूमिहार, ब्राह्मण, कुर्मी अहम भूमिका में हैं. दीघा विधानसभा में महिला वोटरों की संख्या भी अधिक है.

वर्ष 2015 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाता 433000 थे. दीघा विधानसभा सीट पर दूसरे चरण में 3 नवम्बर को मतदान होना है. इस बार देखना रोचक होगा कि क्या वोटर्स एक नए उम्मीदवार पर अपना भरोसा जताते हैं या फिर भाजपा का पारम्परिक वोट बैंक भाजपा के पक्ष में मज़बूती से एक बार फिर खड़ा होता है.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.