रुपौली विधानसभा सीट: गंगौता जाति के दो उम्मीदवार भिड़े हैं, बीमा भारती (जदयू) और सीपीआई के विकास चंद्र मंडल

Balendushekhar Mangalmurty

रुपौली विधानसभा पर बीमा भारती का कुछ ऐसा ही होल्ड हो चला है, जैसा मोकामा विधानसभा सीट पर अनंत सिंह का. इस तरह का होल्ड बिहार की बेहद कम सीटों पर देखने को मिलता है. पूर्णिया का इतिहास संघर्ष का इतिहास रहा है. जमीन के असमान वितरण के इतिहास के चलते जहाँ एक तरफ राजपूतों और यादवों के बीच वर्चस्व की लम्बी लड़ाई चली है, वहीँ भूमिहीनों की आवाज कम्युनिस्ट उठाते रहे हैं. कम्युनिस्ट नेता अजीत सरकार की ह्त्या के आरोप में लम्बे समय तक जेल में रहे पप्पू यादव अब अपनी छवि को सुधारने में लगे हुए हैं. वहीँ आनंद मोहन (मुजफ्फरपुर डी एम जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में ) जेल की सलाखों के पीछे जीवन काट रहे हैं. इस संघर्ष के एक सिरे पर महादलित समुदाय है तो इस समुदाय को पीसने में नया उठा अति पिछड़ा वर्ग भी है. वर्तमान विधायक बीमा भारती के पति अवधेश मंडल इसी अति पिछड़े गंगौता समाज से आते हैं.

यहां जदयू ने मौजूदा विधायक बीमा भारती को दोबारा मैदान में उतारा है तो वहीं CPI ने विकास चंद्र मंडल को टिकट दिया है. इस सीट पर अंतिम चरण में. पूर्णिया जिले में पड़ने वाले रुपौली विधानसभा सीट में रुपौली, भवानीपुर और बरहरा कोठी प्रखंड आते हैं. इस सीट पर अंतिम चरण में 7 नवंबर को मतदान होना है.

इस क्षेत्र एक भूमि संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों की झलक यहाँ के विधायकों में मिलती है. 1990 में निर्दलीय उम्मीदवार सरजुग मंडल ने जीत हासिल की थी, 1995 में CPI के बाल किशोर मंडल ने समाजवादी पार्टी के रामचंद्र दास को हराया था. वर्ष 2000 में निर्दलीय विधायक के तौर पर उन्होंने राजनीतिक सफर शुरू किया था. फरबरी 2005 में लोजपा के सिम्बल पर शंकर सिंह ने जीत हासिल की. शंकर सिंह नॉर्थ बिहार लिबरेशन आर्मी नामक संगठन के अध्यक्ष रह चुके हैं. पर अक्टूबर 2005 से बीमा भारती की जीत का सिलसिला चल निकला, जो अभी तक जारी है. बीमा भारती के पीछे उनके पति अवधेश मंडल हैं,जो भ‌वानीपुर प्रखंड प्रमुख रह चुके हैं.
1951 में गठित रुपौली विधानसभा कुल 42 पंचायतों का क्षेत्र है. यहां कुल 3 लाख 4 हजार 412 मतदाता हैं. इसमें 1 लाख 57 हजार, 871 पुरुष हैं. जबकि 1 लाख 46 हजार 541 महिला मतदाता शामिल हैं. रूपौली को क्रांतिकारियों की धरती कहा जाता है.जंग-ए-आजादी की लड़ाई के दौरान टीकापट्टी पूर्णिया प्रमंडल में होने वाले आंदोलनों का केंद्र बिंदु रहा. उस दौरान यहां महात्मा गांधी व डॉ. राजेंद्र प्रसाद समेत कई नामी शख्सियत भी पहुंचे थे.

2015 में जदयू से बिमा भारती ने भारतीय जनता पार्टी के प्रेम प्रकाश मंडल को 9672 वोटों के मार्जिन से हराया था. यह राज्य की पिछड़ा-अति पिछड़ा कल्याण मंत्री भी रह चुकी हैं. जाति समीकरण की बात की जाए तो इस विधानसभा सीट पर अति पिछड़ों की संख्या अधिक है. राजपूत और यादवों की संख्या उसके बाद आती है. ऐसे में अल्पसंख्यक किस ओर जाते हैं, यह देखना अहम होगा. 2 जून 2014 बिहार में सोमवार को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान शपथ ग्रहण समारोह में जीतन राम मांझी सरकार को उस वक्त भारी किरकिरी झेलनी पड़ी जब मंत्री बनने जा रहीं जेडीयू विधायक बीमा भारती सही ढंग से शपथ पत्र भी नहीं पढ़ पाईं थीं.
बीमा भारती के पति अवधेश मंडल पर रुपौली में महादलित समुदाय को आवंटित कई एकड़ जमीन हथियाने का आरोप लगा है. बीमा भारती के खिलाफ शारीरिक हिंसा के आरोप में भी घिरे अवधेश मंडल. बीमा भारती ने अपनी हैसियत का इस्तेमाल करके अवधेश मंडल को जेल से भागने में मदद की. जेल से ही वे रंगदारी, फिरौती, जमीन कब्ज़े के मामले में संलग्न रहे. जीतनराम मांझी सरकार को समर्थन देने के लिए विनय बिहारी और सुमित सिंह के द्वारा धमकाने के खिलाफ सचिवालय थाने में शिकायत दर्ज की थी. पति के साथ अनबन होने के बाद पीए संतोष मंडल की मदद से राजनीतिक करियर संवार रही बीमा भारती ने आरोप लगाया था कि उनके पति ने ही पीए की हत्या कराई है. अवधेश मंडल बीमा भारती दो बार मंत्री भी बनी हैं। पहली बार 2010 में मंत्री बनी थीं। कैबिनेट विस्तार होने के बाद फिर से वह मंत्री बनीं.

सड़क, बिजली एवं चिकित्सा जैसी मूलभूत चीजें यहाँ कमजोर अवस्था में हैं. पर जाति वोटरों के निर्णय पर हर बार भारी पड़ जाता है. इस विधानसभा सीट पर सबसे अधिक संख्या मुस्लिम वोटरों की है. अन्य जातियां जैसे राजपूत, गंगौता मंडल, कोइरी, कुर्मी, रविदास, पासवान और यादव भी यहां निर्णायक साबित होती हैं.

इस बार जदयू के टिकट पर बीमा भारती का मुकाबला सीपीआई के विकास चंद्र मंडल के साथ है. दोनों गंगौता समाज से आते हैं. ऐसे में देखना रोचक होगा कि भाजपा और जदयू के वोट बैंक के साथ बीमा भारती एक बार फिर मतदाताओं को लुभाने में सफल होते हैं या फिर राजद, कांग्रेस और सीपीआई के कोर वोटर्स की मदद से गंगौता समाज से ही आने वाले विकास चंद्र मंडल एक बार फिर 1995 का इतिहास दोहराते हैं, जब सीपीआई के ही बाल किशोर मंडल जीते थे.


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