बछवारा विधानसभा सीट जहाँ भाजपा का आजतक खाता नहीं खुला है …

Balendushekhar Mangalmurty

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में यानि 3 नवम्बर को बछवारा विधानसभा सीट पर मतदान होना है. कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली और पारम्परिक तौर पर कांग्रेस और सीपीआई के बीच मुकाबले के लिए जानी जाने  वाली सीट इस बार रामदेव राय के देहांत के बाद महागठबंधन में सीट शेयरिंग में सीपीआई को चली गयी है. मुख्य मुकाबला सीपीआई उम्मीदवार अभिषेक राय और भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र मेहता के बीच है, वहीँ दिवंगत विधायक स्वर्गीय रामदेव राय के पुत्र शिव प्रकाश गरीब दास ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.

बेगूसराय जिले में स्थित बछवारा विधानसभा सीट बिहार के उन रेयर सीटों में है, जहाँ 1952 से आज तक भाजपा का खाता नहीं खुला है. 2008 के परिसीमन के बाद बछवारा, मंसूरचक और भगवानपुर प्रखंड से बने बछवाड़ा विधानसभा सीट पर पारम्परिक तौर पर मुकाबला कांग्रेस और सीपीआई के बीच होता आया है. रामदेव राय कांग्रेस के और बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं.
29 वर्ष की उम्र में वे सबसे पहले कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा पहुंचे. उसके बाद 1977 और 1980 के चुनाव में भी लगातार जीत हासिल की. उनका राजनीतिक कद बढ़ा और वे शिक्षा मंत्री भी बने. 1984 के लोकसभा चुनाव में दिग्गज समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर को हराकर राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनायी. 1985 के चुनाव में सीपीआई के अयोध्या प्रसाद महतो ने उन्हें पराजित कर दिया. इसके बाद लगातार 2000 तक कांग्रेस इस सीट पर हारती रही। 2005 में रामदेव राय ने राजद के प्रत्याशी को हराकर फिर से विधानसभा में प्रवेश किया. 2010 में सीपीआई के अवधेश राय से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2015 में राजद- जदयू और कांग्रेस का महागठबन्धन बना और महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर रामदेव राय लड़े और उन्होंने कांग्रेस-राजद-जदयू साथ मिलकर चुनाव लड़े. इस सीट पर कांग्रेस के रामदेव राय को जीत मिली. 73983 वोट हासिल करके वे विजयी घोषित हुए थे. बछवारा विधानसभा सीट पर दूसरे नंबर पर लोक जनशक्ति पार्टी के अरविंद कुमार सिंह रहे थे जिन्हें 37052 वोट मिले. इस विधानसभा क्षेत्र से तीसरे नंबर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के अवधेश कुमार रॉय और चौथे नंबर पर निर्दलीय के सुभाष कुमार ईश्वर रहे थे.
कुछ दिन पूर्व विधायक रामदेव राय का निधन हो गया जिसके बाद चर्चा उनके पुत्र को टिकट को लेकर थी. दिवंगत विधायक के पुत्र शिव प्रकाश गरीब दास इस सीट से कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे, लेकिन उन्हें यहां से टिकट नहीं दिया गया. इस बात से नाराज शिव प्रकाश गरीब दास ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर कर दी है.
बछवारा विधानसभा कांग्रेसियों का गढ़ माना जाता है. हालांकि यहां सीपीआई भी मजबूत स्थिति में है और कई बार सीपीआई यहां से चुनाव जीती है‌. 2005 में भी कांग्रेस के द्वारा रामदेव राय को टिकट नहीं दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2010 के चुनाव में सीपीआई के अवधेश राय ने यहां से चुनाव जीता.

फिलहाल बछवारा विधानसभा सीट पर दिलचस्प हो चला है. जहाँ भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्र मेहता हैं वहीँ सीपीआई के उम्मीदवार अभिषेक राय हैं. और स्वर्गीय रामदेव राय के बेटे शिव प्रकाश गरीब दास ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतर कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.

1952 में इस सीट पर कांग्रेस के मिट्ठन चौधरी ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 1957 के चुनाव में कांग्रेस को प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता वैद्यनाथ प्रसाद सिंह उर्फ रामबहादुर शर्मा से हार का सामना करना पड़ा. 1962 में फिर कांग्रेस की ग्रीस कुमारी जीतीं. फिर 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के वैद्यनाथ प्रसाद सिंह चुनाव जीते. इसके बाद 1969 के उपचुनाव में कांग्रेस के भुवनेश्वर राय ने जीत हासिल की.

बछवारा विधानसभा सीट पर राय जी बनाम भाई जी की लड़ाई रोचक रही है. इस क्षेत्र के दो कद्दावर नेता कांग्रेस के रामदेव राय जनता के बीच राय जी के नाम से और सीपीआई के अवधेश राय भाई जी के नाम से लोकप्रिय रहे हैं. 1990 के बाद इस सीट पर मुख्य मुकाबला इन्हीं दो नेताओं के बीच रहा है. कभी भाई जी भारी रहे तो कभी राय जी. अब रामदेव राय के बेटे इस सीट पर प्रतिनिधित्व का दावा कर रहे हैं. रामदेव राय के पुत्र के निर्दलीय चुनाव लड़ने पर महागठबंधन को नुकसान हो सकता है.

2010 में हुए विधानसभा चुनाव में सीपीआई उम्मीदवार अवधेश कुमार राय ने निर्दलीय उम्मीदवार अरविंद कुमार सिंह को पराजित किया था. इस चुनाव में लोजपा उम्मीदवार मीना कुमारी तीसरे स्थान पर रही थीं.
इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को एक बार जीत मिली है. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनावों में राजद के उत्तम कुमार यादव विधानसभा सदस्य चुने गए थे.

जनगणना 2011 के मुताबिक बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 449001 है जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात 17.31 और 0.02 फीसदी है. 2019 की मतगणना सूची के मुताबिक यहां 288572 मतदाता हैं.
कांग्रेस के गढ़ कहे जाने वाले बछवाड़ा विधानसभा सीट पर जहाँ कांग्रेस और सीपीआई की पारम्परिक प्रतिस्पर्धा रही है, क्या भाजपा इस बार अपना खाता खोल पायेगी, ये सवाल बिहार की जनता के मन में है.


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