पंकज उधास जिन्होंने ग़ज़ल को ड्राइंग रूम से निकालकर पान की दुकानों तक पहुंचा दिया

नवीन शर्मा पंकज उधास का नाम लेते ही उनकी ग़ज़ल चिट्ठी आई है वतन से चिट्ठी आई है याद आती

Read more