एक क्रिकेट सीरीज जिसने दो देशों के राजनयिक रिश्ते बिगाड़ दिए थे

बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति 

आईये आज क्रिकेट के एक ब्लैक चैप्टर “bodyline series” के बारे में बातें करते हैं. 1930 के दशक के शुरुआत से ब्रेडमैन एक बेहद शानदार क्रिकेटर के रूप में उभरे. उन दिनों ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज  टेस्ट सीरीज आयोजित हुआ करते थे. एशेज श्रृंखला क्रिकेट के इतिहास में सबसे पुरानी टेस्ट सीरीज है.  1932-33 में डगलस जार्डिन के नेतृत्व  में इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आई. डगलस जार्डिन अपनी सोच में एकदम खांटी अँगरेज़ थे और इंग्लैंड के लिए जीत को वे एक मिशन के तौर पर लेते थे. उस अँगरेज़ टीम में एक भारतीय भी थे: पटौदी के पिता सीनियर पटौदी, जिन्होंने  पहले मैच में शतक भी बनाया था.  


जार्डिन को जीतने के लिए रन मशीन ब्रैडमैन पर कण्ट्रोल करना था. तभी वे जीत की उम्मीद रख सकते थे.  इसके लिए उन्होंने जो तरीका इस्तेमाल किया, वो Bodyline कहलाया. जार्डिन ने इसके लिए अपने तेज गेंदबाज़ Harold Larwood का इस्तेमाल किया. Larwood एक बेहद तेज गेंदबाज़ थे और उन दिनों आज की तरह प्रोटेक्टिव गियर भी इस्तेमाल नहीं होते थे.


जार्डिन ने अपने तेज गेंदबाज़ के लिए फील्ड सेटिंग किया जिसमे ऑफसाइड में सिर्फ एक खिलाड़ी.एक बॉलर, एक विकेट कीपर को छोड़कर बाकी आठ खिलाड़ी लेग साइड में रखे गये. राउंड द विकेट से बोलिंग पुरे series में की गयी. ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाजों के देह को निशाना लगाते हुए बीमर फेके गए. विकेट को छोड़ कर बल्लेबाज बैटिंग कर रहे थे. लेकिन हेरोल्ड larwood को कहा गया कि बोलिंग ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाजों के देह पर करें. 

 


नतीजा कई ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाज घायल हुए. इंग्लैंड पांच मैचों की श्रृंखला को 4-1 से जीत गया. जार्डिन का मिशन पूरा हुआ.
पर इस bodyline टैक्टिस के खिलाफ खुद कई अँगरेज़ खिलाड़ी थे. पहले मैच में शतक लगाने वाले सीनियर पटौदी ने जब लेगसाइड में फील्डिंग करने से इनकार कर दिया, तो उन्हें पुरे series से बाहर कर दिया गया. 


इस तरह के खेल को देखते हुए ऑस्ट्रलियाई कैप्टेन ने टिपण्णी की: “There are two teams out there; and only one is playing cricket.” ( दो टीम हैं, पर एक ही टीम क्रिकेट खेल रही है !!)
bodyline series से दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में तल्खी आ गयी. हेरोल्ड Larwood का करियर ख़त्म हो गया.


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