शेल कम्पनियों ( मुखौटा कम्पनियों) पर सरकार लगाएगी लगाम; जानिए क्या हैं मुखौटा कम्पनियाँ?

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने मुखौटा कंपनियों की अगली खेप का पंजीकरण रद्द करना शुरू कर दिया है. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2.25 लाख कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया था. इनमें से 70,000 का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है और अन्य 1 लाख कंपनियों का पंजीकरण जल्दी ही रद्द कर दिया जाएगा. इससे पहले सरकार ने पहली सूची में शामिल 3 लाख संदिग्ध मुखौटा कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया था. इन कंपनियों का नाम कंपनी रजिस्ट्रार की सूची से हटा दिया गया था, उनके बैंक खाते जब्त कर लिए गए थे और मंत्रालय ने उनके लेनदेन की जांच शुरू कर दी थी. इसके अलावा मंत्रालय गायब हो चुकी कंपनियों की भी तलाश कर रहा है.
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम लापता कंपनियों के निदेशकों को खोजने की कोशिश में लगे हैं. अभी मंत्रालय ऐसी 70 कंपनियों के बारे में खोजबीन कर रहा है. हम कई वर्षों से ऐसी कंपनियों की तलाश कर रहे हैं जो स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्घ है लेकिन उनका कोई अतापता नहीं है. जहां तक ऐसी बाकी कंपनियों का सवाल है तो हम उनके कार्यालयों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनके निदेशकों को खोजा जा सके.’ 1996 से 2004 के बीच मंत्रालय को 200 से अधिक लापता कंपनियों के बारे में पता चला था जिनमें से 77 का अब भी पता नहीं चल पाया है जबकि बाकी कंपनियों को खोजा जा चुका है. इनमें से कई कंपनियों ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए आवेदन किया था लेकिन उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला. इन सभी कंपनियों को नोटिस भेजा गया था जिस पर 100 कंपनियों ने जवाब दिया। बाकी कंपनियों का कुछ पता नहीं चला पाया है.
इन कंपनियों ने कंपनी रजिस्ट्रार या स्टॉक एक्सचेंजों को जो पता दिया था, वे उस पर नहीं पाई गईं। साथ ही इन कंपनियों ने दो वर्षों से कंपनी रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंजों (सूचीबद्घ कंपनियों के मामले में) में रिटर्न दाखिल नहीं किया है।  सरकारी रिकॉर्ड में इन कंपनियों का लापता बताया गया है क्योंकि इनके निदेशकों का भी पता नहीं चल पाया है। कंपनी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में हाल में दिए जवाब में कहा कि गुजरात में सर्वाधिक 17 लापता कंपनियां हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि सरकार ने 70 से अधिक कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
कंपनी रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि सार्वजनिक निर्गम के जरिये पैसा जुटाने वाली कंपनी की बैलेंस शीट और दूसरे रिकॉर्ड को खंगाला जाए. साथ ही इस बात पर नजर रखी जाए कि वह पैसों का इस्तेमाल कहां कर रही है.
यह पहला मौका नहीं है जब इतनी बड़ी संख्या में लापता कंपनियों का पता चला है. 1992 से 1996 के बीच 4,000 से अधिक कंपनियां लापता पाई गई थीं. इतना ही नहीं, यह भी पता चला था कि ये कंपनियां धन शोधन में लिप्त थीं. इस बारे में प्राइम ने 1997 में एक अध्ययन किया था. इसके मुताबिक 1992 से 1996 के बीच आए सार्वजनिक निर्गमों में से करीब 85 फीसदी स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्घ नहीं हुए या उन्होंने कारोबार नहीं किया या उनका कारोबार नियमित नहीं था या वे अपने निर्गम मूल्य से बहुत कम पर कारोबार कर रहे थे.
क्या होती हैं मुखौटा कंपनियां या शेल कम्पनी?

शेल कंपनियां वे कम्पनियाँ हैं जो प्रायः कागजों पर चलती हैं और पैसे का भौतिक लेनदेन नहीं करती पर मनी लॉन्ड्रिंग का आसान जरिया होती हैं. इन्हें ‘मुखौटा कम्पनी’ या ‘छद्म कम्पनी’ भी कह सकते हैं.

शेल कंपनियां का अस्तित्व केवल कागजों पर ही होता है और ये किसी तरह से कोई आधिकारिक कारोबार नहीं करती हैं. ये कंपनियां न्यूनतम पेड अप कैपिटल के साथ काम करती है. इनका डिविडेंड इनकम जीरो होता है. साथ ही टर्नओवर और ऑपरेटिंग इनकम भी बहुत कम होती है. कहा जाता है कि काले धन को सफेद करने के लिए बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है.


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